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पांच देशों का दौरा खत्म कर दिल्ली लौटे पीएम मोदी, जानें भारत को क्या होगा फायदा
नेशनल डेस्क
प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा पूरी कर दिल्ली लौटे। इटली के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनी, शाम को कैबिनेट बैठक भी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों के दौरे से दिल्ली लौट आए। इस दौरे को भारत की कूटनीतिक गतिविधियों और वैश्विक साझेदारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इटली में उनकी मुलाकात वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से हुई। दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर गहन चर्चा की और भारत-इटली संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर लाने पर सहमति जताई। इस निर्णय को आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इटली से रवाना होने से पहले, पीएम मोदी ने यात्रा को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि भारत और इटली के रिश्तों को नई दिशा देने का यह फैसला दोनों देशों के लिए बड़ी बात है। इस दौरान 'मेलोडी मोमेंट' भी चर्चा में रहा, जब उन्होंने मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफियों का एक पैकेट भेंट किया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए और इस पर हल्की-फुल्की चर्चा हुई।
अधिकारियों के अनुसार, इस दौरे में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत और इटली के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, शिक्षा, संस्कृति और अंतरिक्ष सहयोग पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि भारत ने इस समय अपने संतुलित कूटनीतिक रुख को दोहराया। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव है, और भारत वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाने में लगा हुआ है, इसलिए इस दौरे को केवल द्विपक्षीय मुलाकातों तक सीमित नहीं माना जा सकता।
दिल्ली लौटने के बाद पीएम मोदी का कार्यक्रम बहुत व्यस्त रहने वाला है। गुरुवार शाम 5 बजे वे 'सेवा तीर्थ' में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसे सरकार के कामकाज की मध्यावधि समीक्षा से जोड़ा जा रहा है। बैठक में कई मंत्रालयों के कामकाज और आगामी योजनाओं पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक हलकों में भी इस बैठक को लेकर काफी हलचल है। कहा जा रहा है कि कुछ बड़े प्रशासनिक फैसलों पर भी चर्चा हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी के इस पांच देशों के दौरे को सरकार भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानती है। विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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पांच देशों का दौरा खत्म कर दिल्ली लौटे पीएम मोदी, जानें भारत को क्या होगा फायदा
नेशनल डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों के दौरे से दिल्ली लौट आए। इस दौरे को भारत की कूटनीतिक गतिविधियों और वैश्विक साझेदारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इटली में उनकी मुलाकात वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से हुई। दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर गहन चर्चा की और भारत-इटली संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर लाने पर सहमति जताई। इस निर्णय को आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इटली से रवाना होने से पहले, पीएम मोदी ने यात्रा को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि भारत और इटली के रिश्तों को नई दिशा देने का यह फैसला दोनों देशों के लिए बड़ी बात है। इस दौरान 'मेलोडी मोमेंट' भी चर्चा में रहा, जब उन्होंने मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफियों का एक पैकेट भेंट किया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए और इस पर हल्की-फुल्की चर्चा हुई।
अधिकारियों के अनुसार, इस दौरे में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत और इटली के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, शिक्षा, संस्कृति और अंतरिक्ष सहयोग पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि भारत ने इस समय अपने संतुलित कूटनीतिक रुख को दोहराया। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव है, और भारत वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाने में लगा हुआ है, इसलिए इस दौरे को केवल द्विपक्षीय मुलाकातों तक सीमित नहीं माना जा सकता।
दिल्ली लौटने के बाद पीएम मोदी का कार्यक्रम बहुत व्यस्त रहने वाला है। गुरुवार शाम 5 बजे वे 'सेवा तीर्थ' में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसे सरकार के कामकाज की मध्यावधि समीक्षा से जोड़ा जा रहा है। बैठक में कई मंत्रालयों के कामकाज और आगामी योजनाओं पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक हलकों में भी इस बैठक को लेकर काफी हलचल है। कहा जा रहा है कि कुछ बड़े प्रशासनिक फैसलों पर भी चर्चा हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी के इस पांच देशों के दौरे को सरकार भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानती है। विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
