20 साल बाद ठाकरे बंधुओं की सियासी एकजुटता: उद्धव और राज आज करेंगे गठबंधन का ऐलान, नगर निगम चुनावों में साथ उतरेंगे

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जनवरी 2026 में 29 नगर निगमों के चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम; BMC समेत शहरी सत्ता की लड़ाई होगी निर्णायक

महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक बड़ा मोड़ आने जा रहा है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे मंगलवार दोपहर 12 बजे औपचारिक रूप से अपने राजनीतिक गठबंधन का ऐलान करेंगे। यह गठबंधन जनवरी 2026 में होने वाले 29 नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। लगभग 20 साल बाद ठाकरे परिवार के दोनों प्रमुख नेता एक साथ चुनावी राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं।

गठबंधन की घोषणा से पहले दोनों नेता मुंबई के शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे स्मारक पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी रणनीति और साझा एजेंडे को लेकर जानकारी दी जाएगी। राजनीतिक जानकार इसे महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में सबसे अहम घटनाक्रमों में से एक मान रहे हैं।

जनवरी 2026 में जिन 29 नगर निगमों के चुनाव होने हैं, उनमें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और पुणे नगर निगम (PMC) जैसे हाई-प्रोफाइल निकाय शामिल हैं। 15 जनवरी को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना प्रस्तावित है। खास तौर पर BMC का चुनाव सभी दलों के लिए साख का सवाल बना हुआ है, क्योंकि यह एशिया की सबसे अमीर नगर निगम है, जिसका वार्षिक बजट करीब 74 हजार करोड़ रुपए है।

उद्धव और राज ठाकरे के एकसाथ आने के पीछे सबसे बड़ा कारण मराठी वोटों का बंटवारा रोकना माना जा रहा है। अब तक शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे के अलग-अलग चुनाव लड़ने से मराठी मतदाता विभाजित होते रहे हैं, जिसका फायदा भाजपा और अन्य दलों को मिलता रहा। गठबंधन से मराठी अस्मिता के मुद्दे पर एकजुट संदेश जाएगा और शहरी इलाकों में सीधा असर पड़ेगा।

राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह गठबंधन भाजपा के लिए चुनौती और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के लिए दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। शिंदे गुट खुद को ‘असली शिवसेना’ बताता रहा है, लेकिन ठाकरे भाइयों की एकजुटता से उसकी वैधता और कैडर पर असर पड़ सकता है। वहीं, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार व अजीत पवार गुट) भी नए समीकरणों को लेकर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती हैं।

दोनों नेताओं के बीच यह नजदीकी अचानक नहीं बनी है। 5 जुलाई को मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित ‘मराठी एकता’ रैली में उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए थे। यह 2006 के बाद पहली बार था, जब दोनों ने सार्वजनिक मंच साझा किया। इससे पहले 2006 में बालासाहेब ठाकरे की रैली में दोनों साथ दिखे थे, जिसके बाद राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर मनसे का गठन किया था।

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर दोनों दल किस तरह का फॉर्मूला अपनाते हैं। फिलहाल, आज की घोषणा ने महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा देने के संकेत दे दिए हैं।

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www.dainikjagranmpcg.com
24 Dec 2025 By Nitin Trivedi

20 साल बाद ठाकरे बंधुओं की सियासी एकजुटता: उद्धव और राज आज करेंगे गठबंधन का ऐलान, नगर निगम चुनावों में साथ उतरेंगे

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महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक बड़ा मोड़ आने जा रहा है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे मंगलवार दोपहर 12 बजे औपचारिक रूप से अपने राजनीतिक गठबंधन का ऐलान करेंगे। यह गठबंधन जनवरी 2026 में होने वाले 29 नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। लगभग 20 साल बाद ठाकरे परिवार के दोनों प्रमुख नेता एक साथ चुनावी राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं।

गठबंधन की घोषणा से पहले दोनों नेता मुंबई के शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे स्मारक पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी रणनीति और साझा एजेंडे को लेकर जानकारी दी जाएगी। राजनीतिक जानकार इसे महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में सबसे अहम घटनाक्रमों में से एक मान रहे हैं।

जनवरी 2026 में जिन 29 नगर निगमों के चुनाव होने हैं, उनमें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और पुणे नगर निगम (PMC) जैसे हाई-प्रोफाइल निकाय शामिल हैं। 15 जनवरी को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना प्रस्तावित है। खास तौर पर BMC का चुनाव सभी दलों के लिए साख का सवाल बना हुआ है, क्योंकि यह एशिया की सबसे अमीर नगर निगम है, जिसका वार्षिक बजट करीब 74 हजार करोड़ रुपए है।

उद्धव और राज ठाकरे के एकसाथ आने के पीछे सबसे बड़ा कारण मराठी वोटों का बंटवारा रोकना माना जा रहा है। अब तक शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे के अलग-अलग चुनाव लड़ने से मराठी मतदाता विभाजित होते रहे हैं, जिसका फायदा भाजपा और अन्य दलों को मिलता रहा। गठबंधन से मराठी अस्मिता के मुद्दे पर एकजुट संदेश जाएगा और शहरी इलाकों में सीधा असर पड़ेगा।

राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह गठबंधन भाजपा के लिए चुनौती और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के लिए दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। शिंदे गुट खुद को ‘असली शिवसेना’ बताता रहा है, लेकिन ठाकरे भाइयों की एकजुटता से उसकी वैधता और कैडर पर असर पड़ सकता है। वहीं, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार व अजीत पवार गुट) भी नए समीकरणों को लेकर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती हैं।

दोनों नेताओं के बीच यह नजदीकी अचानक नहीं बनी है। 5 जुलाई को मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित ‘मराठी एकता’ रैली में उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए थे। यह 2006 के बाद पहली बार था, जब दोनों ने सार्वजनिक मंच साझा किया। इससे पहले 2006 में बालासाहेब ठाकरे की रैली में दोनों साथ दिखे थे, जिसके बाद राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर मनसे का गठन किया था।

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर दोनों दल किस तरह का फॉर्मूला अपनाते हैं। फिलहाल, आज की घोषणा ने महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा देने के संकेत दे दिए हैं।

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