प्रचंड हेलिकॉप्टर में राष्ट्रपति की ऐतिहासिक उड़ान, सीमावर्ती क्षेत्र का हवाई निरीक्षण

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जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से को-पायलट के रूप में उड़ीं राष्ट्रपति; सैनिकों को संदेश—आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का प्रतीक ‘प्रचंड’

राजस्थान के जैसलमेर स्थित वायुसेना स्टेशन से शुक्रवार को द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में को-पायलट के रूप में उड़ान भरकर देश के रक्षा इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। करीब 25 मिनट की उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने सीमावर्ती क्षेत्रों और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई निरीक्षण किया तथा कॉकपिट से देश के नाम संदेश जारी कर सैनिकों के साहस और समर्पण को सलाम किया।

राष्ट्रपति सुबह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं, जहां वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों ने उन्हें हेलिकॉप्टर की तकनीकी विशेषताओं और उड़ान प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ उड़ान भरी। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों के ऊपर से गुजरते हुए सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया।

जैसलमेर के ऐतिहासिक किले के ऊपर से गुजरते हुए राष्ट्रपति ने रेडियो संदेश में कहा कि स्वदेशी रक्षा तकनीक देश की आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने वीर सैनिकों को धन्यवाद देते हुए राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के प्रति विश्वास व्यक्त किया।

वायुसेना अधिकारियों के अनुसार यह उड़ान आगामी सैन्य अभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ से पहले की औपचारिक निरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा थी। शाम को पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान अपनी मारक क्षमता और सटीक लक्ष्यभेदन कौशल का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में रक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य नेतृत्व भी उपस्थित रहने वाले हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संवैधानिक प्रमुख का इस प्रकार सैन्य प्लेटफॉर्म का प्रत्यक्ष अनुभव लेना प्रतीकात्मक महत्व के साथ व्यावहारिक संदेश भी देता है। इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ता है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को लेकर जनविश्वास मजबूत होता है।

राष्ट्रपति इससे पहले भी लड़ाकू विमानों में उड़ान भर चुकी हैं, जिससे सैन्य क्षमताओं के प्रति उनकी सक्रिय रुचि स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह पहल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत देती है।

सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और समन्वय व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है। आने वाले समय में सैन्य अभ्यासों और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से रक्षा क्षमता को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। 

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