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झीरम कांड के मास्टरमाइंड चैतू समेत 120 सरेंडर नक्सली विधानसभा में कार्यवाही देखने पहुंचे, इन मुद्दों पर हुआ सदन में हंगामा
Digital Desk
छत्तीसगढ़ विधानसभा में 120 सरेंडर नक्सलियों की मौजूदगी ने सियासी हलचल बढ़ा दी। झीरम हमले से जुड़े आरोपी और पूर्व इनामी नेता भी दर्शक दीर्घा में दिखे, जबकि सदन के भीतर परीक्षा, किसानों और विकास कार्यों को लेकर जमकर हंगामा हुआ।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज का दिन कई मायनों में असाधारण रहा। 120 आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे। इनमें ऐसे चेहरे भी शामिल थे जो कभी नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व में माने जाते थे और जिन पर भारी इनाम घोषित था। इनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दिया।
इन पूर्व नक्सलियों में झीरम घाटी हमले से जुड़ा नाम चैतू उर्फ श्याम दादा भी शामिल रहा। यह वही हमला था जो वर्ष 2013 में जगदलपुर के पास हुआ था और जिसने राज्य की राजनीति को झकझोर दिया था। चैतू ने तीन महीने पहले जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा सतीश उर्फ रुपेश दादा, जो नक्सल संगठन की सेंट्रल कमेटी का सदस्य बताया जाता है और जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था, वह भी दर्शक दीर्घा में मौजूद रहा। उसने अपने सैकड़ों साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था।
डिप्टी सीएम निवास पर स्वागत
विधानसभा पहुंचने से एक दिन पहले इन सभी सरेंडर नक्सलियों को डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया गया था। वहां उनके स्वागत की विशेष व्यवस्था की गई। इस घटनाक्रम को सरकार पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी की प्रक्रिया के तौर पर प्रस्तुत कर रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहा है।
सत्ता पक्ष के विधायकों ने उठाए तीखे सवाल
सदन की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने ही अपनी सरकार से तीखे सवाल किए। परीक्षा में नकल और कई छात्रों को परीक्षा केंद्र से वंचित किए जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। विधायकों ने कहा कि कई छात्रों को 15 किलोमीटर दूर जाकर परीक्षा देनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी हो रही है। इसे केंद्र के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के रूप में भी प्रस्तुत किया गया। संबंधित मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगले शैक्षणिक सत्र से व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।
विपक्ष का हंगामा और दो बार वॉकआउट
विपक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति और औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध फ्लाईऐश डंपिंग के मुद्दे पर सरकार को घेरा। रायगढ़ जिले में संचालित उद्योगों के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई, इस पर तीखी बहस हुई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दावा किया कि पिछली सरकार की तुलना में कई गुना अधिक कार्रवाई की गई है और परिवहन में भी सख्ती बरती गई है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार किया और सरकार के दावों पर सवाल उठाए। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। बाद में विकास कार्यों की स्वीकृति को लेकर फिर नारेबाजी हुई और विपक्ष ने दूसरी बार सदन का बहिष्कार किया।
किसानों की ट्रेनिंग और फसल उत्पादन पर चर्चा
सदन में किसानों को दी जा रही ट्रेनिंग और उसके प्रभाव पर भी सवाल उठे। लगभग 900 किसानों को प्रदर्शनी और हाईब्रिड तकनीक का प्रशिक्षण दिए जाने का जिक्र हुआ। विपक्ष ने पूछा कि इससे वास्तविक लाभ कितना हुआ और कितने किसानों को बीज वितरित किए गए। कृषि मंत्री ने बताया कि चयनित किसानों को प्रशिक्षण और खाद उपलब्ध कराई जाती है ताकि उत्पादन बढ़ सके। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि मूल्यांकन की प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता है और सुझावों को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा।
लोकतंत्र और पुनर्वास की नई तस्वीर
एक ओर सदन में तीखी राजनीतिक बहस और हंगामा था, तो दूसरी ओर दर्शक दीर्घा में बैठे पूर्व नक्सली लोकतांत्रिक प्रक्रिया को देख रहे थे। यह दृश्य राज्य में बदलते हालात और पुनर्वास नीति की नई तस्वीर पेश करता है। हालांकि इस पर राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दिए, लेकिन यह दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अलग अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
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