भारत दोहराएगा 90 के दशक जैसी आईटी क्रांति, AI में बनेगा दुनिया का सर्विस हब: NSE CEO

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युवाओं और नई तकनीक से भारत AI का ग्लोबल लीडर बन सकता है

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के MD और CEO आशीष कुमार चौहान ने कहा है कि भारत अब AI (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में वैश्विक ताकत बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका मानना है कि जैसे 1990 के दशक में भारत ने आईटी सर्विस में दुनिया में पहचान बनाई थी, वैसे ही अब देश AI का सबसे बड़ा यूजर और सर्विस हब बनकर उभर सकता है।

चौहान ने यह बात मुंबई में आयोजित 'IMC भारत कॉलिंग कॉन्फ्रेंस 2026' के उद्घाटन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि भारत के पास युवाओं की आबादी तकनीक को तेजी से अपनाने में सक्षम है और यही युवा AI क्षेत्र में भारत को दुनिया का लीडर बनाएंगे।

भारत तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग में आगे

NSE CEO ने कहा कि भारत केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है। देश अब एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, बायोटेक और सेमीकंडक्टर्स जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनका कहना है कि AI और इन सभी तकनीकों के मेल से एक ऐसा सिस्टम तैयार होगा जो दुनिया भर के देशों का मुकाबला कर सके।

चौहान ने बताया कि नई तकनीक के आने से काम करने की क्षमता बढ़ेगी और भारत की वैश्विक सर्विस पहचान और भी मजबूत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन क्षेत्रों में निवेश और नवाचार भारत को तकनीकी वैश्विक मंच पर प्रमुख बनाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से मिलेगा फायदा

आशीष चौहान ने जोर दिया कि अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ बेहतर संबंध और साझेदारी भारत की तरक्की को और गति देंगे। उनका कहना है कि सरकार का समर्थन, वैश्विक साझेदारी और तकनीक का सही तालमेल भारत को AI के क्षेत्र में वही सफलता दिला सकता है, जो आईटी सेक्टर में हासिल हुई थी।

चौहान ने याद दिलाया कि जैसे 1990 के दशक में युवाओं ने भारत को आईटी ग्लोबल लीडर बनाया, आज के युवा भी AI में भारत को शीर्ष पर ले जा सकते हैं। तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग की शक्ति के मेल से देश को वैश्विक मंच पर बड़ा मुकाम हासिल हो सकता है।

IMC भारत कॉलिंग कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य

इस सम्मेलन में विजनरी, पॉलिसीमेकर और इंडस्ट्री लीडर्स शामिल हुए। इसका उद्देश्य भारत के लिए एक रोडमैप तैयार करना है ताकि देश दुनिया के लिए निर्माण और निर्यात का प्रमुख केंद्र बन सके।

रोजगार और निवेश के नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार का समर्थन मिले और युवाओं को सही प्रशिक्षण मिले, तो भारत AI सर्विसेज का वैश्विक हब बन सकता है। जैसे आईटी सेक्टर ने देश को लाखों नौकरियां और अरबों डॉलर की कमाई दी थी, वही ग्रोथ अब AI के जरिए भी संभव है।

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