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ऑटो रिक्शा की अगली सीट से लग्ज़री कारों की पिछली सीट तक: राहुल तनेजा का संघर्ष और सफलता का सफर
Mandla, MP
मंडला के छोटे गाँव से जयपुर और मुंबई तक, राहुल तनेजा ने मेहनत, लगन और विज़न के दम पर खुद को भारत के बड़े वैडिंग और ईवेंट मैनेजमेंट उद्योग में स्थापित किया।
मध्य प्रदेश के मंडला जिले के कटरा गाँव में जन्मे राहुल तनेजा की कहानी संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का जीता-जागता उदाहरण है। उनके पिता साइकिल पंचर का काम करते थे और मां खेतों में काम करती थीं।
छोटी उम्र से संघर्ष की शुरुआत:
राहुल ने ग्यारह साल की उम्र में जीवन की जद्दोजहद शुरू कर दी। जयपुर के बर्फखाना चौराहा, आदर्श नगर के छोटे ढाबे में वेटर के रूप में काम करने के बाद, 13 से 18 साल की उम्र में उन्होंने त्यौहारों के दौरान पटाखे, रंग, पतंगे और राखियाँ बेचीं, गर्मियों की छुट्टियों में कॉमिक्स बेचे और इसके अलावा कोरियर सर्विस, टू-लेट सर्विस और अखबार वितरण जैसे कई छोटे-छोटे काम किए।
16 से 18 साल की उम्र में, राहुल रात में दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन पर ऑटो रिक्शा भी चलाते थे। इस मेहनत भरे दौर ने उन्हें आत्मनिर्भर और संघर्षशील बनाया।
व्यवसाय और मॉडलिंग में कदम:
19 साल की उम्र में, राहुल ने जयपुर के सिंधी कॉलोनी, आदर्श नगर में ‘कार पैलेस’ नाम से कार बाजार खोला। इसके साथ ही उन्होंने फैशन शोज़ में मॉडलिंग शुरू की। सिर्फ ग्यारह महीने के भीतर उन्होंने मिस्टर जयपुर, मिस्टर राजस्थान और मेल ऑफ दी ईयर जैसे टाइटल जीते। साथ ही दिल्ली से ला कर जयपुर में चमड़े की जैकेट्स, डिजीटल घड़ियाँ और इम्पोर्टेड चॉकलेट्स भी बेची।
ईवेंट और वैडिंग मैनेजमेंट में सफलता:
20 साल की उम्र में, 2000 में राहुल ने ‘लाइव क्रियेशन्स’ नाम से ईवेंट मैनेजमेंट कंपनी शुरू की। 25 साल की उम्र में मुंबई में ऑफिस खोलकर उन्होंने ‘इंडियन आर्टिस्ट डॉट कॉम’ के जरिए आर्टिस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू किया।
30 साल की उम्र में 2010 में, उन्होंने ‘राहुल तनेजा प्रीमियम वैडिंग्स’ के जरिए वैडिंग मैनेजमेंट में कदम रखा। महज पांच साल में, 2015 तक उनका नाम बिग फैट रॉयल वैडिंग्स के लिए देश के प्रमुख वैडिंग प्लानर्स में गिना जाने लगा।
आज का राहुल तनेजा:
राहुल ने कई अलग-अलग क्षेत्रों में प्रयास किए और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे सफल ईवेंट मैनेजर, बिजनेसमैन, अच्छे पिता और लग्ज़री कारों के वीआईपी नंबरों के शौकीन के रूप में जाने जाते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि संघर्ष, मेहनत और बहादुरी किसी को भी ऑटो रिक्शा की सीट से लग्ज़री कार की पिछली सीट तक पहुंचा सकती है।
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मध्य प्रदेश के मंडला जिले के कटरा गाँव में जन्मे राहुल तनेजा की कहानी संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का जीता-जागता उदाहरण है। उनके पिता साइकिल पंचर का काम करते थे और मां खेतों में काम करती थीं।
छोटी उम्र से संघर्ष की शुरुआत:
राहुल ने ग्यारह साल की उम्र में जीवन की जद्दोजहद शुरू कर दी। जयपुर के बर्फखाना चौराहा, आदर्श नगर के छोटे ढाबे में वेटर के रूप में काम करने के बाद, 13 से 18 साल की उम्र में उन्होंने त्यौहारों के दौरान पटाखे, रंग, पतंगे और राखियाँ बेचीं, गर्मियों की छुट्टियों में कॉमिक्स बेचे और इसके अलावा कोरियर सर्विस, टू-लेट सर्विस और अखबार वितरण जैसे कई छोटे-छोटे काम किए।
16 से 18 साल की उम्र में, राहुल रात में दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन पर ऑटो रिक्शा भी चलाते थे। इस मेहनत भरे दौर ने उन्हें आत्मनिर्भर और संघर्षशील बनाया।
व्यवसाय और मॉडलिंग में कदम:
19 साल की उम्र में, राहुल ने जयपुर के सिंधी कॉलोनी, आदर्श नगर में ‘कार पैलेस’ नाम से कार बाजार खोला। इसके साथ ही उन्होंने फैशन शोज़ में मॉडलिंग शुरू की। सिर्फ ग्यारह महीने के भीतर उन्होंने मिस्टर जयपुर, मिस्टर राजस्थान और मेल ऑफ दी ईयर जैसे टाइटल जीते। साथ ही दिल्ली से ला कर जयपुर में चमड़े की जैकेट्स, डिजीटल घड़ियाँ और इम्पोर्टेड चॉकलेट्स भी बेची।
ईवेंट और वैडिंग मैनेजमेंट में सफलता:
20 साल की उम्र में, 2000 में राहुल ने ‘लाइव क्रियेशन्स’ नाम से ईवेंट मैनेजमेंट कंपनी शुरू की। 25 साल की उम्र में मुंबई में ऑफिस खोलकर उन्होंने ‘इंडियन आर्टिस्ट डॉट कॉम’ के जरिए आर्टिस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू किया।
30 साल की उम्र में 2010 में, उन्होंने ‘राहुल तनेजा प्रीमियम वैडिंग्स’ के जरिए वैडिंग मैनेजमेंट में कदम रखा। महज पांच साल में, 2015 तक उनका नाम बिग फैट रॉयल वैडिंग्स के लिए देश के प्रमुख वैडिंग प्लानर्स में गिना जाने लगा।
आज का राहुल तनेजा:
राहुल ने कई अलग-अलग क्षेत्रों में प्रयास किए और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे सफल ईवेंट मैनेजर, बिजनेसमैन, अच्छे पिता और लग्ज़री कारों के वीआईपी नंबरों के शौकीन के रूप में जाने जाते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि संघर्ष, मेहनत और बहादुरी किसी को भी ऑटो रिक्शा की सीट से लग्ज़री कार की पिछली सीट तक पहुंचा सकती है।
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