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खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा
Digital Desk
पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।
इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है।
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खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा
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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।
इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है।
