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तेलंगाना के DSP के पास 300 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति का खुलासा, एसीबी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
बालीवुड डेस्क
16 ठिकानों पर छापेमारी के बाद गिरफ्तारी, रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई करोड़ों की संपत्तियां; डायरी से खुले कई अहम राज
तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़े पुलिस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। हैदराबाद में पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) संकीरेड्डी भीम रेड्डी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिन्हें कथित रूप से रिश्तेदारों, दोस्तों, सहयोगियों और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर खरीदा गया था। मामले की जांच पिछले कई दिनों से चल रही थी। एसीबी ने 2 जुलाई को डीएसपी से जुड़े 16 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति के रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच पूरी होने के बाद सोमवार देर शाम आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार सुबह उन्हें अदालत में पेश किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान डीएसपी के कब्जे से करीब 3.60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोने के आभूषण, करीब 20 किलोग्राम चांदी के सामान और विभिन्न बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये की राशि मिली। हालांकि जांच का सबसे अहम हिस्सा वह निजी डायरी साबित हुई, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान भीम रेड्डी की हस्तलिखित एक निजी डायरी मिली, जिसमें उनकी संपत्तियों, निवेश, वित्तीय लेनदेन, देनदारियों और कथित बेनामीदारों के नाम दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस डायरी में कई ऐसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से एजेंसी को नई संपत्तियों और निवेश का पता चला।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि डीएसपी ने मई महीने में चारधाम यात्रा पर जाने से पहले इस डायरी की स्कैन कॉपी अपने दोनों बेटों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपनी वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ऐसा किया था। यही दस्तावेज अब जांच एजेंसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी अधिकारी ने तेलंगाना और कर्नाटक के कई शहरों में बड़ी संख्या में अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें कृषि भूमि, प्लॉट, आवासीय भवन, व्यावसायिक परिसरों और अन्य निवेश शामिल बताए जा रहे हैं। इन संपत्तियों का स्वामित्व सीधे उनके नाम पर नहीं था, बल्कि रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज किया गया था। एसीबी इन्हें कथित बेनामी संपत्ति मानकर उनकी कानूनी जांच कर रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डायरी के आधार पर संपत्तियों की वास्तविक कीमत का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान लगभग 300 करोड़ रुपये का है, लेकिन विस्तृत जांच पूरी होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ भी सकता है। एजेंसी अब इन संपत्तियों से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, निवेश विवरण और आय के स्रोत की भी जांच कर रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोपी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्यरत रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित आय और घोषित संपत्ति के मुकाबले यह निवेश किस प्रकार किया गया। यदि आय के वैध स्रोत नहीं मिलते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसीबी का कहना है कि मामले में अभी कई वित्तीय लेनदेन की जांच बाकी है। कुछ संपत्तियों के दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तविक मालिक हैं या केवल नाम मात्र के बेनामीदार। इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही एसीबी का कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ यदि आय से अधिक संपत्ति की विश्वसनीय शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच की जाएगी।
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तेलंगाना के DSP के पास 300 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति का खुलासा, एसीबी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
बालीवुड डेस्क
तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़े पुलिस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। हैदराबाद में पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) संकीरेड्डी भीम रेड्डी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिन्हें कथित रूप से रिश्तेदारों, दोस्तों, सहयोगियों और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर खरीदा गया था। मामले की जांच पिछले कई दिनों से चल रही थी। एसीबी ने 2 जुलाई को डीएसपी से जुड़े 16 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति के रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच पूरी होने के बाद सोमवार देर शाम आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार सुबह उन्हें अदालत में पेश किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान डीएसपी के कब्जे से करीब 3.60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोने के आभूषण, करीब 20 किलोग्राम चांदी के सामान और विभिन्न बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये की राशि मिली। हालांकि जांच का सबसे अहम हिस्सा वह निजी डायरी साबित हुई, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान भीम रेड्डी की हस्तलिखित एक निजी डायरी मिली, जिसमें उनकी संपत्तियों, निवेश, वित्तीय लेनदेन, देनदारियों और कथित बेनामीदारों के नाम दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस डायरी में कई ऐसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से एजेंसी को नई संपत्तियों और निवेश का पता चला।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि डीएसपी ने मई महीने में चारधाम यात्रा पर जाने से पहले इस डायरी की स्कैन कॉपी अपने दोनों बेटों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपनी वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ऐसा किया था। यही दस्तावेज अब जांच एजेंसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी अधिकारी ने तेलंगाना और कर्नाटक के कई शहरों में बड़ी संख्या में अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें कृषि भूमि, प्लॉट, आवासीय भवन, व्यावसायिक परिसरों और अन्य निवेश शामिल बताए जा रहे हैं। इन संपत्तियों का स्वामित्व सीधे उनके नाम पर नहीं था, बल्कि रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज किया गया था। एसीबी इन्हें कथित बेनामी संपत्ति मानकर उनकी कानूनी जांच कर रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डायरी के आधार पर संपत्तियों की वास्तविक कीमत का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान लगभग 300 करोड़ रुपये का है, लेकिन विस्तृत जांच पूरी होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ भी सकता है। एजेंसी अब इन संपत्तियों से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, निवेश विवरण और आय के स्रोत की भी जांच कर रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोपी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्यरत रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित आय और घोषित संपत्ति के मुकाबले यह निवेश किस प्रकार किया गया। यदि आय के वैध स्रोत नहीं मिलते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसीबी का कहना है कि मामले में अभी कई वित्तीय लेनदेन की जांच बाकी है। कुछ संपत्तियों के दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तविक मालिक हैं या केवल नाम मात्र के बेनामीदार। इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही एसीबी का कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ यदि आय से अधिक संपत्ति की विश्वसनीय शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच की जाएगी।
