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मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव, ट्रंप के सख्त रुख से ईरान-अमेरिका टकराव गहरा हुआ
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ा। ट्रंप ने कहा ईरान ने पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई, शांति प्रस्ताव पर संदेह से अमेरिका-ईरान टकराव गहरा गया।
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन फिलहाल नरमी के मूड में नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसकी “पर्याप्त कीमत” अभी तक नहीं चुकाई है। यही बयान अब मिडिल ईस्ट में नई बेचैनी की वजह बन गया है। हालात ऐसे वक्त में बिगड़ते दिख रहे हैं जब तेहरान की तरफ से नया शांति प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि अमेरिका उसे आसानी से मानने वाला नहीं है।
ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल यह नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से तनाव चरम पर है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए 14 सूत्री प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने, नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने की मांग की गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव युद्धविराम बढ़ाने से ज्यादा सीधे टकराव खत्म करने पर केंद्रित है।
उधर ईरान की तरफ से भी रुख नरम नहीं दिख रहा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी (IRGS) ने साफ कहा है कि अब अमेरिका के पास फैसले की गुंजाइश काफी सीमित बची है। तेहरान से जुड़े हलकों में यह संदेश दिया जा रहा है कि दबाव की राजनीति अब ज्यादा देर नहीं चल सकती। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति अब लौटने वाली नहीं है। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है और यहां तनातनी का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
इसी बीच खाड़ी क्षेत्र से आ रही खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। रविवार को होर्मुज के पास एक कार्गो शिप पर हमले की खबर सामने आई, जिसने समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। क्षेत्र में पहले ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है और अमेरिका ने फंसे जहाजों को निकालने के लिए नई समुद्री योजना का संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज में फंसे जहाजों को “फ्री” कराने में मदद करेगा। हालांकि इस योजना को ईरान ने सीधे चुनौती की तरह देखा है। ऐसे में समुद्र, तेल और सैन्य दबाव तीनों मोर्चों पर तनाव एक साथ बढ़ता दिख रहा है।
कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात भरोसेमंद नहीं लग रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से बातचीत की है। ओमान पहले भी अमेरिका-ईरान संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इसके बावजूद जिस तरह दोनों तरफ से बयान आ रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि बातचीत फिलहाल सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। मिडिल ईस्ट में जंग की आशंका अभी टली नहीं है, बल्कि हालात बता रहे हैं कि आने वाले कुछ दिन और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।
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मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव, ट्रंप के सख्त रुख से ईरान-अमेरिका टकराव गहरा हुआ
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन फिलहाल नरमी के मूड में नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसकी “पर्याप्त कीमत” अभी तक नहीं चुकाई है। यही बयान अब मिडिल ईस्ट में नई बेचैनी की वजह बन गया है। हालात ऐसे वक्त में बिगड़ते दिख रहे हैं जब तेहरान की तरफ से नया शांति प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि अमेरिका उसे आसानी से मानने वाला नहीं है।
ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल यह नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से तनाव चरम पर है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए 14 सूत्री प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने, नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने की मांग की गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव युद्धविराम बढ़ाने से ज्यादा सीधे टकराव खत्म करने पर केंद्रित है।
उधर ईरान की तरफ से भी रुख नरम नहीं दिख रहा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी (IRGS) ने साफ कहा है कि अब अमेरिका के पास फैसले की गुंजाइश काफी सीमित बची है। तेहरान से जुड़े हलकों में यह संदेश दिया जा रहा है कि दबाव की राजनीति अब ज्यादा देर नहीं चल सकती। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति अब लौटने वाली नहीं है। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है और यहां तनातनी का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
इसी बीच खाड़ी क्षेत्र से आ रही खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। रविवार को होर्मुज के पास एक कार्गो शिप पर हमले की खबर सामने आई, जिसने समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। क्षेत्र में पहले ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है और अमेरिका ने फंसे जहाजों को निकालने के लिए नई समुद्री योजना का संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज में फंसे जहाजों को “फ्री” कराने में मदद करेगा। हालांकि इस योजना को ईरान ने सीधे चुनौती की तरह देखा है। ऐसे में समुद्र, तेल और सैन्य दबाव तीनों मोर्चों पर तनाव एक साथ बढ़ता दिख रहा है।
कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात भरोसेमंद नहीं लग रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से बातचीत की है। ओमान पहले भी अमेरिका-ईरान संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इसके बावजूद जिस तरह दोनों तरफ से बयान आ रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि बातचीत फिलहाल सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। मिडिल ईस्ट में जंग की आशंका अभी टली नहीं है, बल्कि हालात बता रहे हैं कि आने वाले कुछ दिन और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।
