लोकसभा सीट बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा, सरकार दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी

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543 से 850 सीटें करने का प्रस्ताव असफल, महिला आरक्षण लागू होने में और देरी तय

लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक शुक्रवार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और 54 वोट से गिर गया। 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखने वाले इस बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। बिल पारित करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।

करीब 21 घंटे की विस्तृत चर्चा के बाद हुई इस वोटिंग में सरकार अपेक्षित समर्थन जुटाने में असफल रही। यह पिछले 12 वर्षों में पहला मौका है, जब केंद्र सरकार लोकसभा में कोई अहम विधेयक पारित नहीं करा सकी। इससे पहले 2002 के बाद किसी सरकारी बिल के पराजित होने का यह दुर्लभ मामला माना जा रहा है।

यह विधेयक लोकसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से सीधे जुड़ा हुआ था। बिल के पारित न होने से अब महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ अगले परिसीमन के बाद ही मिल सकेगा, जो नई जनगणना के आधार पर प्रस्तावित है। ऐसे में 2029 के आम चुनाव तक इसका लागू होना संभव नहीं माना जा रहा।

सरकार ने इस सत्र में दो अन्य संबंधित विधेयकों—परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल 2026—को वोटिंग के लिए पेश नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये प्रस्ताव मुख्य विधेयक से जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग से मतदान की आवश्यकता नहीं है।

विपक्ष ने मुख्य रूप से परिसीमन प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि इससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है और सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना था कि सीटों में वृद्धि सभी राज्यों के लिए समान रूप से लाभकारी होगी।

राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता पक्ष के पास बहुमत होने के बावजूद अतिरिक्त समर्थन न जुटा पाना सरकार के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों ने मतदान से पहले विपक्ष से समर्थन की अपील भी की थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब इस बिल में संशोधन कर दोबारा पेश कर सकती है या विपक्ष के साथ व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेगी।

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18 Apr 2026 By Nitin Trivedi

लोकसभा सीट बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा, सरकार दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी

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लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक शुक्रवार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और 54 वोट से गिर गया। 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखने वाले इस बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। बिल पारित करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।

करीब 21 घंटे की विस्तृत चर्चा के बाद हुई इस वोटिंग में सरकार अपेक्षित समर्थन जुटाने में असफल रही। यह पिछले 12 वर्षों में पहला मौका है, जब केंद्र सरकार लोकसभा में कोई अहम विधेयक पारित नहीं करा सकी। इससे पहले 2002 के बाद किसी सरकारी बिल के पराजित होने का यह दुर्लभ मामला माना जा रहा है।

यह विधेयक लोकसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से सीधे जुड़ा हुआ था। बिल के पारित न होने से अब महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ अगले परिसीमन के बाद ही मिल सकेगा, जो नई जनगणना के आधार पर प्रस्तावित है। ऐसे में 2029 के आम चुनाव तक इसका लागू होना संभव नहीं माना जा रहा।

सरकार ने इस सत्र में दो अन्य संबंधित विधेयकों—परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल 2026—को वोटिंग के लिए पेश नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये प्रस्ताव मुख्य विधेयक से जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग से मतदान की आवश्यकता नहीं है।

विपक्ष ने मुख्य रूप से परिसीमन प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि इससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है और सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना था कि सीटों में वृद्धि सभी राज्यों के लिए समान रूप से लाभकारी होगी।

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विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब इस बिल में संशोधन कर दोबारा पेश कर सकती है या विपक्ष के साथ व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-bill-to-increase-lok-sabha-seats-was-defeated-by/article-51516

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