हत्यारोपी को संपत्ति का हक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर दे दिया अहम फैसला, समझें

नेशनल डेस्क

By Rohit.P
On

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हत्या का आरोपी मृतक की संपत्ति का वारिस नहीं हो सकता। जानें हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 और पूरा मामला।

संपत्ति विवाद और पारिवारिक रिश्तों के बीच बढ़ते आपराधिक मामलों में एक बड़ा सवाल अक्सर सामने आता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने ही परिजन की हत्या कर दे, तो क्या उसे उसकी जायदाद में हिस्सा मिलेगा? यह सवाल सिर्फ नैतिक नहीं बल्कि कानूनी दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस मुद्दे पर स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है कि हत्यारोपी किसी भी हाल में मृतक की संपत्ति का वारिस नहीं हो सकता।

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची। विवाद बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले से जुड़ा था, जिसमें संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर अलग राय सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति पर मृतक की हत्या या हत्या के लिए उकसाने का आरोप है, तो वह उस संपत्ति पर किसी भी तरह का अधिकार नहीं जता सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत केवल उन मामलों तक सीमित नहीं है, जहां वसीयत मौजूद नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों में भी लागू होगा जहां वसीयत के जरिए संपत्ति का बंटवारा किया गया हो। यहां तक कि अगर मामला अदालत में विचाराधीन हो, तब भी आरोपी को संपत्ति से लाभ लेने का अधिकार नहीं मिलेगा। यह टिप्पणी कानून की व्याख्या के साथ-साथ नैतिकता और न्याय के सिद्धांतों को भी मजबूत करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 25 इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्रावधान स्पष्ट रूप से कहता है कि जो व्यक्ति किसी हिंदू की हत्या करता है या हत्या में सहायता करता है, वह उस व्यक्ति की संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कोई व्यक्ति अपने ही अपराध का लाभ न उठा सके।

कानून यह भी स्पष्ट करता है कि केवल हत्यारे को ही संपत्ति से वंचित किया जाता है, जबकि उसकी संतानों को, यदि वे अपराध में शामिल नहीं हैं, तो उत्तराधिकार से नहीं रोका जाता। इसका मतलब यह है कि अपराध का दंड व्यक्तिगत स्तर पर सीमित रहता है और निर्दोष परिवार के सदस्यों को इसका नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।

इस फैसले के पीछे न्यायालय का तर्क केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में पब्लिक पॉलिसीऔर नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे और कोई भी व्यक्ति अपने अपराध से लाभ न उठा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे कई मामलों के लिए दिशा-निर्देशक साबित होगा, जहां संपत्ति विवाद और आपराधिक आरोप एक साथ जुड़े होते हैं। अदालत का यह रुख समाज में यह संदेश भी देता है कि कानून केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि जिम्मेदारी और नैतिकता को भी बराबर महत्व देता है।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
10 May 2026 By Rohit.P

हत्यारोपी को संपत्ति का हक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर दे दिया अहम फैसला, समझें

नेशनल डेस्क

संपत्ति विवाद और पारिवारिक रिश्तों के बीच बढ़ते आपराधिक मामलों में एक बड़ा सवाल अक्सर सामने आता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने ही परिजन की हत्या कर दे, तो क्या उसे उसकी जायदाद में हिस्सा मिलेगा? यह सवाल सिर्फ नैतिक नहीं बल्कि कानूनी दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस मुद्दे पर स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है कि हत्यारोपी किसी भी हाल में मृतक की संपत्ति का वारिस नहीं हो सकता।

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची। विवाद बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले से जुड़ा था, जिसमें संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर अलग राय सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति पर मृतक की हत्या या हत्या के लिए उकसाने का आरोप है, तो वह उस संपत्ति पर किसी भी तरह का अधिकार नहीं जता सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत केवल उन मामलों तक सीमित नहीं है, जहां वसीयत मौजूद नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों में भी लागू होगा जहां वसीयत के जरिए संपत्ति का बंटवारा किया गया हो। यहां तक कि अगर मामला अदालत में विचाराधीन हो, तब भी आरोपी को संपत्ति से लाभ लेने का अधिकार नहीं मिलेगा। यह टिप्पणी कानून की व्याख्या के साथ-साथ नैतिकता और न्याय के सिद्धांतों को भी मजबूत करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 25 इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्रावधान स्पष्ट रूप से कहता है कि जो व्यक्ति किसी हिंदू की हत्या करता है या हत्या में सहायता करता है, वह उस व्यक्ति की संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कोई व्यक्ति अपने ही अपराध का लाभ न उठा सके।

कानून यह भी स्पष्ट करता है कि केवल हत्यारे को ही संपत्ति से वंचित किया जाता है, जबकि उसकी संतानों को, यदि वे अपराध में शामिल नहीं हैं, तो उत्तराधिकार से नहीं रोका जाता। इसका मतलब यह है कि अपराध का दंड व्यक्तिगत स्तर पर सीमित रहता है और निर्दोष परिवार के सदस्यों को इसका नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।

इस फैसले के पीछे न्यायालय का तर्क केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में पब्लिक पॉलिसीऔर नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे और कोई भी व्यक्ति अपने अपराध से लाभ न उठा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे कई मामलों के लिए दिशा-निर्देशक साबित होगा, जहां संपत्ति विवाद और आपराधिक आरोप एक साथ जुड़े होते हैं। अदालत का यह रुख समाज में यह संदेश भी देता है कि कानून केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि जिम्मेदारी और नैतिकता को भी बराबर महत्व देता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-supreme-court-explained-that-the-murderer-has-no-right/article-53057

खबरें और भी हैं

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

टाप न्यूज

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

मझौली जनपद पंचायत के विभागीय ग्रुप में सामने आया मैसेज, प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले सोशल मीडिया पर वायरल...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

प्रयागराज से रीवा लाई जा रही थी 1312 शीशी नशीली कफ सीरप, 19 वर्षीय तस्कर गिरफ्तार, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष...
देश विदेश 
ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

संयुक्त संसदीय समिति का दावा- अधिकांश लोगों ने किया समर्थन, राज्यों से सुझाव लेकर तैयार हो रहा रोडमैप; संवैधानिक संशोधन...
देश विदेश 
2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

बिजनेस

ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप
एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी...
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू
शेयर बाजार में शानदार तेजी: सेंसेक्स 828 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार; बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने भरी उड़ान
BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क भी होगी बातचीत; खरीदने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी
शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.