लंदन में गूँजा भारतीय होम्योपैथी का स्वर: डॉ. विकास सिंघल की शोध प्रस्तुति से वैश्विक मंच पर बढ़ी प्रतिष्ठा

डिजिटल डेस्क

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World Homoeopathy Day 2026 में भारतीय विशेषज्ञ की प्रस्तुति को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना लंदन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय होम्योपैथी की भूमिका और प्रभाव पर खास चर्चा हुई।

लंदन, यूनाइटेड किंगडम — London College of Homoeopathy द्वारा Homoeopathic Medical Association of India के सहयोग से आयोजित विश्व होम्योपैथी दिवस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 इस वर्ष वैश्विक चिकित्सा जगत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मंच बनकर उभरा।

यह सम्मेलन होम्योपैथी के जनक Samuel Hahnemann की 271वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और अकादमिक विद्वानों ने भाग लेकर ज्ञान, अनुभव और शोध का आदान-प्रदान किया।

प्रतिष्ठित स्थलों पर आयोजन: बढ़ती वैश्विक मान्यता का प्रतीक

सम्मेलन का उद्घाटन ऐतिहासिक House of Lords में हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि होम्योपैथी को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत मान्यता मिल रही है।

वहीं, इसके वैज्ञानिक और शैक्षणिक सत्र Radisson Hotel London में आयोजित किए गए, जहाँ यूरोप, एशिया और अन्य महाद्वीपों से आए प्रतिभागियों ने आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय (integrative medicine) पर गहन विचार-विमर्श किया।

रूमेटोलॉजी सत्र: डॉ. विकास सिंघल की प्रभावशाली प्रस्तुति

सम्मेलन का सबसे चर्चित और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सत्र रूमेटोलॉजी रहा, जिसमें Dr. Vikas Singhal ने हड्डियों के संक्रमण, विशेष रूप से Osteomyelitis के होम्योपैथिक प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

उन्होंने बताया कि ऑस्टियोमायलाइटिस आज भी आधुनिक चिकित्सा के लिए एक चुनौती बना हुआ है, जहाँ:

लंबे समय तक एंटीबायोटिक उपचार

बार-बार अस्पताल में भर्ती

सर्जिकल हस्तक्षेप

के बावजूद रोग की पुनरावृत्ति (recurrence) एक बड़ी समस्या बनी रहती है।

समग्र (Holistic) और व्यक्तिगत (Individualized) चिकित्सा का दृष्टिकोण

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डॉ. सिंघल ने होम्योपैथी को एक समग्र और रोगी-केंद्रित चिकित्सा प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया।

उनके अनुसार:

उपचार केवल रोग पर नहीं, बल्कि रोगी की शारीरिक, मानसिक और संवैधानिक स्थिति पर आधारित होता है

हर रोगी के लिए अलग औषधि चयन किया जाता है

यह प्रणाली शरीर की आंतरिक प्रतिरक्षा शक्ति (immune system) को सक्रिय करती है

इस दृष्टिकोण से न केवल रोग का उपचार संभव होता है, बल्कि दीर्घकालिक और स्थायी सुधार भी देखने को मिलता है।

केस स्टडी: वैज्ञानिक प्रमाण और सकारात्मक परिणाम

डॉ. सिंघल ने अपने अनुभव और कई केस स्टडी के माध्यम से यह दिखाया कि होम्योपैथिक उपचार से:

सूजन और संक्रमण में कमी

पुराने दर्द से राहत

गतिशीलता (mobility) में सुधार

बिना दुष्प्रभाव के सुरक्षित उपचार

जैसे परिणाम प्राप्त हुए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि individualized remedy selection रोग की पुनरावृत्ति को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जटिल केस: ऑस्टियोआर्थराइटिस और बोन फिशर

प्रस्तुति का एक विशेष आकर्षण Osteoarthritis और बोन फिशर से जुड़े एक जटिल केस का विश्लेषण था।

इस केस में होम्योपैथिक उपचार के माध्यम से:

  • दर्द में उल्लेखनीय कमी

  • जोड़ की कार्यक्षमता में सुधार

  • जीवन गुणवत्ता में वृद्धि

देखी गई। इस उदाहरण ने विशेषज्ञों का विशेष ध्यान आकर्षित किया और इसे जटिल रोगों में होम्योपैथी की संभावनाओं का मजबूत प्रमाण माना गया।

विशेषज्ञ नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सराहना

इस सत्र की अध्यक्षता Dr. Jaynay ने की, जो अमेरिका के फ्लोरिडा से विशेष रूप से इस कार्यक्रम में शामिल हुईं।

उन्होंने डॉ. सिंघल की प्रस्तुति को:

वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़

स्पष्ट और व्यावहारिक

क्लिनिकल रूप से अत्यंत प्रासंगिक

बताते हुए सराहना की और कहा कि ऐसे शोध वैश्विक स्तर पर होम्योपैथी की विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं।

उद्घाटन समारोह में विशिष्ट उपस्थिति

539f8499-5b85-4cae-bf07-768c96668735

कार्यक्रम के उद्घाटन में कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं, जिनमें:

हाउंसलो के मेयर

Randeep Singh Lal

शामिल थे।

उन्होंने King Charles III का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि आधुनिक समय में integrative medicine की आवश्यकता बढ़ रही है और होम्योपैथी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वैश्विक भागीदारी और ज्ञान-विनिमय

सम्मेलन में कुल 6 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 20 अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने विभिन्न जटिल और दुर्लभ रोगों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

Dr. Gary Smith ने भी इस पहल की सराहना करते हुए National Health Service जैसे सिस्टम में होम्योपैथी को पुनः शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दीक्षांत समारोह और वैश्विक समुदाय निर्माण

सम्मेलन के दौरान Dr. Sandeep Kaila और Dr. Saurav Arora द्वारा Turkey के छात्रों के लिए एक विशेष दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया।

इस दौरान छात्रों को:

हाह्नेमैनियन शपथ दिलाई गई

वैश्विक होम्योपैथी समुदाय में औपचारिक रूप से शामिल किया गया

निष्कर्ष: वैश्विक सहयोग की नई दिशा

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसने होम्योपैथी के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, अनुसंधान और स्वीकृति को नई दिशा दी।

डॉ. विकास सिंघल की प्रस्तुति ने विशेष रूप से यह दर्शाया कि जटिल और दीर्घकालिक रोगों के प्रबंधन में समग्र चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका को अब और गंभीरता से समझने और अपनाने की आवश्यकता है।




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24 Apr 2026 By ANKITA

लंदन में गूँजा भारतीय होम्योपैथी का स्वर: डॉ. विकास सिंघल की शोध प्रस्तुति से वैश्विक मंच पर बढ़ी प्रतिष्ठा

डिजिटल डेस्क

लंदन, यूनाइटेड किंगडम — London College of Homoeopathy द्वारा Homoeopathic Medical Association of India के सहयोग से आयोजित विश्व होम्योपैथी दिवस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 इस वर्ष वैश्विक चिकित्सा जगत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मंच बनकर उभरा।

यह सम्मेलन होम्योपैथी के जनक Samuel Hahnemann की 271वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और अकादमिक विद्वानों ने भाग लेकर ज्ञान, अनुभव और शोध का आदान-प्रदान किया।

प्रतिष्ठित स्थलों पर आयोजन: बढ़ती वैश्विक मान्यता का प्रतीक

सम्मेलन का उद्घाटन ऐतिहासिक House of Lords में हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि होम्योपैथी को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत मान्यता मिल रही है।

वहीं, इसके वैज्ञानिक और शैक्षणिक सत्र Radisson Hotel London में आयोजित किए गए, जहाँ यूरोप, एशिया और अन्य महाद्वीपों से आए प्रतिभागियों ने आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय (integrative medicine) पर गहन विचार-विमर्श किया।

रूमेटोलॉजी सत्र: डॉ. विकास सिंघल की प्रभावशाली प्रस्तुति

सम्मेलन का सबसे चर्चित और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सत्र रूमेटोलॉजी रहा, जिसमें Dr. Vikas Singhal ने हड्डियों के संक्रमण, विशेष रूप से Osteomyelitis के होम्योपैथिक प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

उन्होंने बताया कि ऑस्टियोमायलाइटिस आज भी आधुनिक चिकित्सा के लिए एक चुनौती बना हुआ है, जहाँ:

लंबे समय तक एंटीबायोटिक उपचार

बार-बार अस्पताल में भर्ती

सर्जिकल हस्तक्षेप

के बावजूद रोग की पुनरावृत्ति (recurrence) एक बड़ी समस्या बनी रहती है।

समग्र (Holistic) और व्यक्तिगत (Individualized) चिकित्सा का दृष्टिकोण

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डॉ. सिंघल ने होम्योपैथी को एक समग्र और रोगी-केंद्रित चिकित्सा प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया।

उनके अनुसार:

उपचार केवल रोग पर नहीं, बल्कि रोगी की शारीरिक, मानसिक और संवैधानिक स्थिति पर आधारित होता है

हर रोगी के लिए अलग औषधि चयन किया जाता है

यह प्रणाली शरीर की आंतरिक प्रतिरक्षा शक्ति (immune system) को सक्रिय करती है

इस दृष्टिकोण से न केवल रोग का उपचार संभव होता है, बल्कि दीर्घकालिक और स्थायी सुधार भी देखने को मिलता है।

केस स्टडी: वैज्ञानिक प्रमाण और सकारात्मक परिणाम

डॉ. सिंघल ने अपने अनुभव और कई केस स्टडी के माध्यम से यह दिखाया कि होम्योपैथिक उपचार से:

सूजन और संक्रमण में कमी

पुराने दर्द से राहत

गतिशीलता (mobility) में सुधार

बिना दुष्प्रभाव के सुरक्षित उपचार

जैसे परिणाम प्राप्त हुए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि individualized remedy selection रोग की पुनरावृत्ति को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जटिल केस: ऑस्टियोआर्थराइटिस और बोन फिशर

प्रस्तुति का एक विशेष आकर्षण Osteoarthritis और बोन फिशर से जुड़े एक जटिल केस का विश्लेषण था।

इस केस में होम्योपैथिक उपचार के माध्यम से:

  • दर्द में उल्लेखनीय कमी

  • जोड़ की कार्यक्षमता में सुधार

  • जीवन गुणवत्ता में वृद्धि

देखी गई। इस उदाहरण ने विशेषज्ञों का विशेष ध्यान आकर्षित किया और इसे जटिल रोगों में होम्योपैथी की संभावनाओं का मजबूत प्रमाण माना गया।

विशेषज्ञ नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सराहना

इस सत्र की अध्यक्षता Dr. Jaynay ने की, जो अमेरिका के फ्लोरिडा से विशेष रूप से इस कार्यक्रम में शामिल हुईं।

उन्होंने डॉ. सिंघल की प्रस्तुति को:

वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़

स्पष्ट और व्यावहारिक

क्लिनिकल रूप से अत्यंत प्रासंगिक

बताते हुए सराहना की और कहा कि ऐसे शोध वैश्विक स्तर पर होम्योपैथी की विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं।

उद्घाटन समारोह में विशिष्ट उपस्थिति

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कार्यक्रम के उद्घाटन में कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं, जिनमें:

हाउंसलो के मेयर

Randeep Singh Lal

शामिल थे।

उन्होंने King Charles III का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि आधुनिक समय में integrative medicine की आवश्यकता बढ़ रही है और होम्योपैथी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वैश्विक भागीदारी और ज्ञान-विनिमय

सम्मेलन में कुल 6 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 20 अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने विभिन्न जटिल और दुर्लभ रोगों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

Dr. Gary Smith ने भी इस पहल की सराहना करते हुए National Health Service जैसे सिस्टम में होम्योपैथी को पुनः शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दीक्षांत समारोह और वैश्विक समुदाय निर्माण

सम्मेलन के दौरान Dr. Sandeep Kaila और Dr. Saurav Arora द्वारा Turkey के छात्रों के लिए एक विशेष दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया।

इस दौरान छात्रों को:

हाह्नेमैनियन शपथ दिलाई गई

वैश्विक होम्योपैथी समुदाय में औपचारिक रूप से शामिल किया गया

निष्कर्ष: वैश्विक सहयोग की नई दिशा

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसने होम्योपैथी के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, अनुसंधान और स्वीकृति को नई दिशा दी।

डॉ. विकास सिंघल की प्रस्तुति ने विशेष रूप से यह दर्शाया कि जटिल और दीर्घकालिक रोगों के प्रबंधन में समग्र चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका को अब और गंभीरता से समझने और अपनाने की आवश्यकता है।




https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-voice-of-indian-homeopathy-echoed-in-london-due-to/article-51960

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