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TMC ने चुनाव आयोग को भेजी नई सूची, ममता बनर्जी को फिर बताया पार्टी प्रमुख
Digital Desk
बागी गुट द्वारा समानांतर कार्यसमिति के गठन के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी। सूची में ममता बनर्जी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं।
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी ने चुनाव आयोग को अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की अद्यतन सूची भेज दी है। पार्टी द्वारा आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में ममता बनर्जी को अध्यक्ष, सुभ्रत बक्शी को उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक दिन पहले पार्टी के बागी गुट ने समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया था।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को भेजी गई सूची 20 जून 2026 तक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व की वैधता और संगठनात्मक संरचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इधर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट से जुड़े आठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि ये नेता संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आधिकारिक लाइन से अलग काम कर रहे हैं। हालांकि बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी संविधान के तहत संगठनात्मक रिक्तता को भरने के लिए नई कार्यसमिति गठित की है।
कार्यसमिति पर विवाद
चुनाव आयोग को भेजी गई सूची के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा, अमित मित्रा और चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यसमिति में स्थान मिला है।
दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में बैठक कर समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष तथा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष घोषित किया था।
नेतृत्व पर सियासी संदेश
बागी नेताओं का कहना है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हो गया था और नई समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कोई समानांतर संगठन चलाने का अधिकार नहीं है। सांसद सौगत रॉय ने भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और सर्वोच्च नेता हैं तथा संगठन की पहचान उनके नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है।
इस बीच हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन की घटना भी चर्चा में रही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया है और संगठनात्मक विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी गुट की गतिविधियों पर पार्टी क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है और चुनाव आयोग के समक्ष संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट तथा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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TMC ने चुनाव आयोग को भेजी नई सूची, ममता बनर्जी को फिर बताया पार्टी प्रमुख
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पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी ने चुनाव आयोग को अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की अद्यतन सूची भेज दी है। पार्टी द्वारा आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में ममता बनर्जी को अध्यक्ष, सुभ्रत बक्शी को उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक दिन पहले पार्टी के बागी गुट ने समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया था।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को भेजी गई सूची 20 जून 2026 तक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व की वैधता और संगठनात्मक संरचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इधर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट से जुड़े आठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि ये नेता संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आधिकारिक लाइन से अलग काम कर रहे हैं। हालांकि बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी संविधान के तहत संगठनात्मक रिक्तता को भरने के लिए नई कार्यसमिति गठित की है।
कार्यसमिति पर विवाद
चुनाव आयोग को भेजी गई सूची के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा, अमित मित्रा और चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यसमिति में स्थान मिला है।
दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में बैठक कर समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष तथा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष घोषित किया था।
नेतृत्व पर सियासी संदेश
बागी नेताओं का कहना है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हो गया था और नई समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कोई समानांतर संगठन चलाने का अधिकार नहीं है। सांसद सौगत रॉय ने भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और सर्वोच्च नेता हैं तथा संगठन की पहचान उनके नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है।
इस बीच हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन की घटना भी चर्चा में रही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया है और संगठनात्मक विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी गुट की गतिविधियों पर पार्टी क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है और चुनाव आयोग के समक्ष संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट तथा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
