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भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में
Digital Desk
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। वडोदरा से मुंबई की यात्रा करीब 90 मिनट में पूरी हो सकती है।
भारत की पहली स्वदेशी रूप से निर्मित बुलेट ट्रेन अब ट्रैक परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाई-स्पीड ट्रेन का ट्रायल मई या जून 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।
वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम में वैष्णव ने बताया कि हाई-स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम हाल ही में तैयार किया गया है। इसे संरचनात्मक मजबूती की जांच के लिए स्क्वीज टेस्ट के लिए भेजा गया है।
रेल मंत्री के मुताबिक, ट्रैक पर उतरने के बाद ट्रेन का करीब दो से चार महीने तक परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद सुरक्षा और तकनीकी मानकों की प्रक्रिया पूरी होने पर ट्रेन का उद्घाटन किया जाएगा।
वडोदरा-मुंबई 90 मिनट में
बुलेट ट्रेन परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यात्रा के समय में होने वाली भारी कमी होगी।
अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सेवा शुरू होने के बाद यात्री वडोदरा से मुंबई की यात्रा करीब डेढ़ घंटे में पूरी कर सकेंगे। वर्तमान में इस दूरी को पार करने में पारंपरिक रेल और सड़क मार्ग से काफी अधिक समय लगता है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों तथा औद्योगिक केंद्रों को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। पूरे मुंबई-अहमदाबाद मार्ग की यात्रा का समय दो घंटे से कम रखने का लक्ष्य है।
स्वदेशी ट्रेन ने लिया आकार
स्वदेशी बुलेट ट्रेन का विकास भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे हाई-स्पीड रेल तकनीक में घरेलू क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
ट्रेन के पहले बॉडी फ्रेम का निर्माण पूरा हो चुका है और इसकी मजबूती जांचने के लिए स्क्वीज टेस्ट किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में यह परखा जाएगा कि तेज गति से संचालन के दौरान ट्रेन का ढांचा विभिन्न दबावों और बलों को कितना सहन कर सकता है।
यह परियोजना सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी जुड़ी है और रेलवे क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण तथा उन्नत तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकती है।
2027 में ट्रैक पर ट्रायल
रेल मंत्री के अनुसार, स्वदेशी ट्रेन को मई या जून 2027 तक परीक्षण के लिए ट्रैक पर लाने की योजना है।
इसके बाद लगभग दो से चार महीने तक ट्रेन के विभिन्न सिस्टम और संचालन क्षमता की जांच की जाएगी। अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रेन की तकनीकी क्षमता, सुरक्षा और प्रदर्शन का परीक्षण किया जाएगा।
सभी आवश्यक परीक्षण और सुरक्षा मंजूरियां पूरी होने के बाद इसे यात्री सेवा के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रेन के उद्घाटन की योजना भी बताई गई है।
सूरत-बिलिमोरा पहला सेक्शन
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को एक साथ पूरे मार्ग पर शुरू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से परिचालन में लाने की योजना है।
सूरत-बिलिमोरा सेक्शन के सबसे पहले चालू होने की उम्मीद है। इसके बाद वापी-सूरत और फिर वापी-अहमदाबाद सेक्शन को परिचालन में लाने की योजना है।
आगे के चरणों में अहमदाबाद-ठाणे सेक्शन और इसके बाद मुंबई कनेक्शन को पूरा किया जाएगा। इस तरह यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से हाई-स्पीड रेल सेवा का लाभ मिलने की संभावना है।
508 किमी का हाई-स्पीड कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। यह महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी।
पूरे कॉरिडोर पर 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना के तहत वायाडक्ट, स्टेशन, पुल, सुरंग, ट्रैक और अन्य तकनीकी प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है।
पहला परिचालन सेक्शन भारत में हाई-स्पीड रेल क्षमता का शुरुआती प्रदर्शन होगा। इसके बाद पूरे कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से यात्री सेवाओं के लिए तैयार किया जाएगा।
कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
बुलेट ट्रेन परियोजना का प्रभाव केवल यात्रा समय कम करने तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। तेज रेल कनेक्टिविटी से मुंबई और गुजरात के प्रमुख औद्योगिक तथा व्यावसायिक केंद्रों के बीच संपर्क मजबूत हो सकता है।
इससे पर्यटन, रोजगार, औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। हाई-स्पीड रेल के जरिए विनिर्माण केंद्रों और बाजारों के बीच दूरी कम होने से कारोबार और व्यावसायिक यात्रा को फायदा मिल सकता है।
रेलवे के नए दौर की शुरुआत
मई-जून 2027 में प्रस्तावित ट्रायल भारत की हाई-स्पीड रेल यात्रा में एक अहम पड़ाव होगा। यदि परीक्षण और सुरक्षा मंजूरी तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो 2027 के बाद शुरुआती सेक्शनों में यात्री सेवा शुरू होने की संभावना बन सकती है।
यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यात्रा समय में दिखाई देगा। वडोदरा से मुंबई की यात्रा को करीब 90 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य हाई-स्पीड रेल की क्षमता को दर्शाता है।
यह परियोजना भारत की रेलवे रणनीति में भी बदलाव का संकेत देती है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे, तेज यात्री सेवाओं और घरेलू विनिर्माण क्षमता पर बढ़ता जोर दिखाई दे रहा है।
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