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अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता पर ट्रम्प की नजर, जिनेवा में आज दूसरा दौर
अंतराष्ट्रीय न्यूज
यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा पर फोकस; सैन्य गतिविधियों के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर हो रही बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होते हुए भी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। उनका यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड के जिनेवा में वार्ता के दूसरे दौर के लिए मिल रहे हैं।
ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि ईरान इस बार समझौते को लेकर पहले से अधिक गंभीर दिख रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि पिछले वर्ष ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान के रुख में बदलाव आया है।
वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के संभावितढांचे पर सहमति बनाना है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को या तो समाप्त करे या न्यूनतम स्तर पर सीमित रखे। इसके साथ ही उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के मौजूदा भंडार को कम करने, निष्क्रिय करने या देश से बाहर भेजने का प्रस्ताव भी चर्चा में शामिल है।
ईरान की प्राथमिक मांग आर्थिक प्रतिबंधों में राहत है। तेल निर्यात, बैंकिंग और वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच पर लगे प्रतिबंध हटाने को तेहरान समझौते की शर्त मानता है। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने संकेत दिया है कि यदि प्रतिबंधों में ठोस प्रगति होती है तो परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर लचीला रुख अपनाया जा सकता है।
कूटनीतिक वार्ता के समानांतर क्षेत्रीय गतिविधियां भी तेज हुई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और ओमान सागर में नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र में लाइव-फायर अभ्यास की संभावना को लेकर वाणिज्यिक जहाजों को सतर्क किया गया है।
उधर अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है और परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड को तैनाती के लिए रवाना किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर हो रही बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होते हुए भी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। उनका यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड के जिनेवा में वार्ता के दूसरे दौर के लिए मिल रहे हैं।
ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि ईरान इस बार समझौते को लेकर पहले से अधिक गंभीर दिख रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि पिछले वर्ष ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान के रुख में बदलाव आया है।
वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के संभावितढांचे पर सहमति बनाना है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को या तो समाप्त करे या न्यूनतम स्तर पर सीमित रखे। इसके साथ ही उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के मौजूदा भंडार को कम करने, निष्क्रिय करने या देश से बाहर भेजने का प्रस्ताव भी चर्चा में शामिल है।
ईरान की प्राथमिक मांग आर्थिक प्रतिबंधों में राहत है। तेल निर्यात, बैंकिंग और वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच पर लगे प्रतिबंध हटाने को तेहरान समझौते की शर्त मानता है। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने संकेत दिया है कि यदि प्रतिबंधों में ठोस प्रगति होती है तो परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर लचीला रुख अपनाया जा सकता है।
कूटनीतिक वार्ता के समानांतर क्षेत्रीय गतिविधियां भी तेज हुई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और ओमान सागर में नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र में लाइव-फायर अभ्यास की संभावना को लेकर वाणिज्यिक जहाजों को सतर्क किया गया है।
उधर अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है और परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड को तैनाती के लिए रवाना किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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