- Hindi News
- देश विदेश
- ईरान तनाव के बीच ट्रंप की लोकप्रियता गिरी, सर्वे में बड़ा झटका
ईरान तनाव के बीच ट्रंप की लोकप्रियता गिरी, सर्वे में बड़ा झटका
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
ईरान तनाव और महंगाई के बीच डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता घटी। ताजा सर्वे में स्वीकृति रेटिंग 37% पर पहुंची, जनता ने आर्थिक नीतियों पर नाराजगी जताई।
ईरान को लेकर सख्त रुख और बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। एक ताजा सर्वे में उनकी लोकप्रियता में तेज गिरावट दर्ज की गई है और यह गिरावट ऐसे वक्त आई है जब नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव धीरे-धीरे अमेरिकी राजनीति का केंद्र बनते जा रहे हैं। वॉशिंगटन पोस्ट, ABC न्यूज और इप्सोस के संयुक्त सर्वे के मुताबिक ट्रंप की कुल स्वीकृति रेटिंग अब घटकर 37 प्रतिशत रह गई है। फरवरी में यह आंकड़ा 39 प्रतिशत था। यानी कि कुछ ही महीनों में उनकी स्थिति और भी कमजोर हो गई है। ईरान के तनाव के प्रति अपनाए गए उनके रुख का असर अब सीधे जनता की राय में दिखने लगा है।
सर्वे में सबसे बड़ा झटका ट्रंप को अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर लगा है, जिसे लंबे समय तक उनकी सबसे मजबूत राजनीतिक जमीन माना जाता रहा। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अर्थव्यवस्था को संभालने के मामले में उनकी रेटिंग 7 अंक गिरकर 34 प्रतिशत पर आ गई। महंगाई पर उनकी स्वीकृति रेटिंग और नीचे खिसककर 27 प्रतिशत रह गई। जीवन-यापन की बढ़ती लागत पर हालात और खराब दिखे, जहां सिर्फ 23 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज पर भरोसा जताया, जबकि 76 प्रतिशत ने असहमति दर्ज की। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों और रोजमर्रा के खर्च में बढ़ोतरी ने आम लोगों की नाराजगी को और बढ़ाया है। बताया जा रहा है कि ट्रंप की आर्थिक नीतियों से 66 प्रतिशत अमेरिकी संतुष्ट नहीं हैं और यही आंकड़ा उनके लिए सबसे बड़ी चिंता माना जा रहा है।
ईरान तनाव को लेकर भी ट्रंप को जनता से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। सर्वे के मुताबिक 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के उनके तरीके पर असहमति जताई, जबकि सिर्फ 33 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया। यह संकेत साफ है कि विदेश नीति में आक्रामक रुख अब राजनीतिक फायदा देने के बजाय उल्टा असर डाल रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंका ने अमेरिकी मतदाताओं के भीतर असहजता बढ़ा दी है। हालात खासतौर पर तब और बिगड़े जब घरेलू आर्थिक दबाव पहले से लोगों को परेशान कर रहे थे। ऐसे में विदेश मोर्चे पर सख्ती जनता को भरोसे के बजाय जोखिम की तरह दिख रही है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ घरेलू सवालों पर भी ट्रंप को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। आव्रजन ऐसा मुद्दा रहा जहां उन्हें बाकी विषयों के मुकाबले कुछ बेहतर समर्थन मिला। अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर उनकी नीति को 45 प्रतिशत लोगों ने मंजूरी दी, जबकि 54 प्रतिशत ने विरोध किया। हालांकि यह भी साफ है कि इस मुद्दे पर देश बंटा हुआ है। सर्वे में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी अब किसी भी राजनीतिक दल पर पूरा भरोसा नहीं कर रहे। आव्रजन, अपराध, अर्थव्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों पर 23 से 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें किसी भी दल पर भरोसा नहीं है। यह अमेरिकी राजनीति में बढ़ती बेचैनी का संकेत माना जा रहा है।
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ट्रंप की अस्वीकृति रेटिंग अब बढ़कर 62 प्रतिशत पहुंच गई है, जो उनके मौजूदा और पिछले कार्यकाल के दौरान सबसे ऊंचे स्तरों में मानी जा रही है। हालांकि रिपब्लिकन समर्थकों के बीच उनकी पकड़ अब भी बनी हुई है और करीब 85 प्रतिशत पार्टी समर्थक अब भी उनके साथ खड़े हैं। लेकिन व्यापक जनमत में आई यह गिरावट नवंबर चुनाव से पहले रिपब्लिकन खेमे की चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
ईरान तनाव के बीच ट्रंप की लोकप्रियता गिरी, सर्वे में बड़ा झटका
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
ईरान को लेकर सख्त रुख और बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। एक ताजा सर्वे में उनकी लोकप्रियता में तेज गिरावट दर्ज की गई है और यह गिरावट ऐसे वक्त आई है जब नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव धीरे-धीरे अमेरिकी राजनीति का केंद्र बनते जा रहे हैं। वॉशिंगटन पोस्ट, ABC न्यूज और इप्सोस के संयुक्त सर्वे के मुताबिक ट्रंप की कुल स्वीकृति रेटिंग अब घटकर 37 प्रतिशत रह गई है। फरवरी में यह आंकड़ा 39 प्रतिशत था। यानी कि कुछ ही महीनों में उनकी स्थिति और भी कमजोर हो गई है। ईरान के तनाव के प्रति अपनाए गए उनके रुख का असर अब सीधे जनता की राय में दिखने लगा है।
सर्वे में सबसे बड़ा झटका ट्रंप को अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर लगा है, जिसे लंबे समय तक उनकी सबसे मजबूत राजनीतिक जमीन माना जाता रहा। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अर्थव्यवस्था को संभालने के मामले में उनकी रेटिंग 7 अंक गिरकर 34 प्रतिशत पर आ गई। महंगाई पर उनकी स्वीकृति रेटिंग और नीचे खिसककर 27 प्रतिशत रह गई। जीवन-यापन की बढ़ती लागत पर हालात और खराब दिखे, जहां सिर्फ 23 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज पर भरोसा जताया, जबकि 76 प्रतिशत ने असहमति दर्ज की। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों और रोजमर्रा के खर्च में बढ़ोतरी ने आम लोगों की नाराजगी को और बढ़ाया है। बताया जा रहा है कि ट्रंप की आर्थिक नीतियों से 66 प्रतिशत अमेरिकी संतुष्ट नहीं हैं और यही आंकड़ा उनके लिए सबसे बड़ी चिंता माना जा रहा है।
ईरान तनाव को लेकर भी ट्रंप को जनता से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। सर्वे के मुताबिक 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के उनके तरीके पर असहमति जताई, जबकि सिर्फ 33 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया। यह संकेत साफ है कि विदेश नीति में आक्रामक रुख अब राजनीतिक फायदा देने के बजाय उल्टा असर डाल रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंका ने अमेरिकी मतदाताओं के भीतर असहजता बढ़ा दी है। हालात खासतौर पर तब और बिगड़े जब घरेलू आर्थिक दबाव पहले से लोगों को परेशान कर रहे थे। ऐसे में विदेश मोर्चे पर सख्ती जनता को भरोसे के बजाय जोखिम की तरह दिख रही है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ घरेलू सवालों पर भी ट्रंप को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। आव्रजन ऐसा मुद्दा रहा जहां उन्हें बाकी विषयों के मुकाबले कुछ बेहतर समर्थन मिला। अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर उनकी नीति को 45 प्रतिशत लोगों ने मंजूरी दी, जबकि 54 प्रतिशत ने विरोध किया। हालांकि यह भी साफ है कि इस मुद्दे पर देश बंटा हुआ है। सर्वे में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी अब किसी भी राजनीतिक दल पर पूरा भरोसा नहीं कर रहे। आव्रजन, अपराध, अर्थव्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों पर 23 से 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें किसी भी दल पर भरोसा नहीं है। यह अमेरिकी राजनीति में बढ़ती बेचैनी का संकेत माना जा रहा है।
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ट्रंप की अस्वीकृति रेटिंग अब बढ़कर 62 प्रतिशत पहुंच गई है, जो उनके मौजूदा और पिछले कार्यकाल के दौरान सबसे ऊंचे स्तरों में मानी जा रही है। हालांकि रिपब्लिकन समर्थकों के बीच उनकी पकड़ अब भी बनी हुई है और करीब 85 प्रतिशत पार्टी समर्थक अब भी उनके साथ खड़े हैं। लेकिन व्यापक जनमत में आई यह गिरावट नवंबर चुनाव से पहले रिपब्लिकन खेमे की चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
