क्या खत्म होगा इंसानी सैनिकों का दौर? युद्ध में उतर रहे ह्यूमनॉइड रोबोट, यूक्रेन में शुरू हुआ प्रयोग

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Phantom Mk‑I रोबोट युद्ध क्षेत्र में निगरानी और डेटा संग्रह के लिए पहले प्रयोग में भेजे गए, भविष्य में सैन्य रणनीतियों में तकनीकी बदलाव की संभावना

यूक्रेन में युद्ध के मैदान पर पहली बार इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट भेजे गए हैं। रोबोटिक्स स्टार्टअप Foundation Robotics ने Phantom Mk‑I नामक दो ह्यूमनॉइड रोबोट युद्ध क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति की निगरानी और जानकारी जुटाने के लिए तैनात किए हैं। कंपनी के सह-संस्थापक और पूर्व सैनिक Mike LeBlanc के अनुसार, यह तकनीक अभी परीक्षण चरण में है।

यह प्रयोग 2026 की शुरुआत में यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में किया गया। रोबोट विशेष रूप से युद्ध के मोर्चे के पास भेजे गए ताकि सैनिकों के लिए खतरनाक परिस्थितियों में वे निगरानी और अन्य सहायक कार्य कर सकें।

Foundation Robotics का उद्देश्य भविष्य में सैनिकों के खतरे को कम करना और युद्ध संचालन में रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ाना है। Phantom Mk‑I रोबोट को ऐसे कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है जो वर्तमान में मानव सैनिक करते हैं। इसमें पिस्टल और शॉटगन जैसे हथियारों का संचालन करने की क्षमता भी परीक्षण में शामिल है, हालांकि फिलहाल वास्तविक युद्ध में उपयोग नहीं किया गया।

रूस-यूक्रेन युद्ध में पहले से ही कई रोबोटिक सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यूक्रेन ने जनवरी 2026 तक 7,000 से अधिक रोबोटिक मिशन पूरे किए, जिनमें अधिकांश मिशन सप्लाई, लॉजिस्टिक और सैनिकों तक गोला-बारूद पहुंचाने जैसे सहायक कार्यों के लिए थे। युद्ध में रोबोटिक्स और AI के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य की लड़ाइयाँ पहले से कहीं अधिक तकनीकी और स्वचालित होने की संभावना है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ह्यूमनॉइड रोबोट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल अभी सीमित है। इसके लिए देशों को नई तकनीक, सुरक्षा ढांचे और सैन्य रणनीति विकसित करनी होगी। लेकिन शुरुआती प्रयोग से संकेत मिल रहे हैं कि भविष्य में मानव सैनिकों का रोल बदल सकता है और कुछ खतरनाक कार्य रोबोटों को सौंपे जा सकते हैं।

इस प्रयोग के सफल होने पर युद्ध की रणनीतियों में बड़ा बदलाव आ सकता है। तकनीकी उन्नति से सैनिकों की सुरक्षा बढ़ेगी और युद्ध संचालन अधिक कुशल और स्वचालित होगा। हालांकि, मानव नियंत्रण और नैतिक सवाल अभी भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

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www.dainikjagranmpcg.com
16 Mar 2026 By Nitin Trivedi

क्या खत्म होगा इंसानी सैनिकों का दौर? युद्ध में उतर रहे ह्यूमनॉइड रोबोट, यूक्रेन में शुरू हुआ प्रयोग

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यूक्रेन में युद्ध के मैदान पर पहली बार इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट भेजे गए हैं। रोबोटिक्स स्टार्टअप Foundation Robotics ने Phantom Mk‑I नामक दो ह्यूमनॉइड रोबोट युद्ध क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति की निगरानी और जानकारी जुटाने के लिए तैनात किए हैं। कंपनी के सह-संस्थापक और पूर्व सैनिक Mike LeBlanc के अनुसार, यह तकनीक अभी परीक्षण चरण में है।

यह प्रयोग 2026 की शुरुआत में यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में किया गया। रोबोट विशेष रूप से युद्ध के मोर्चे के पास भेजे गए ताकि सैनिकों के लिए खतरनाक परिस्थितियों में वे निगरानी और अन्य सहायक कार्य कर सकें।

Foundation Robotics का उद्देश्य भविष्य में सैनिकों के खतरे को कम करना और युद्ध संचालन में रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ाना है। Phantom Mk‑I रोबोट को ऐसे कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है जो वर्तमान में मानव सैनिक करते हैं। इसमें पिस्टल और शॉटगन जैसे हथियारों का संचालन करने की क्षमता भी परीक्षण में शामिल है, हालांकि फिलहाल वास्तविक युद्ध में उपयोग नहीं किया गया।

रूस-यूक्रेन युद्ध में पहले से ही कई रोबोटिक सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यूक्रेन ने जनवरी 2026 तक 7,000 से अधिक रोबोटिक मिशन पूरे किए, जिनमें अधिकांश मिशन सप्लाई, लॉजिस्टिक और सैनिकों तक गोला-बारूद पहुंचाने जैसे सहायक कार्यों के लिए थे। युद्ध में रोबोटिक्स और AI के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य की लड़ाइयाँ पहले से कहीं अधिक तकनीकी और स्वचालित होने की संभावना है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ह्यूमनॉइड रोबोट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल अभी सीमित है। इसके लिए देशों को नई तकनीक, सुरक्षा ढांचे और सैन्य रणनीति विकसित करनी होगी। लेकिन शुरुआती प्रयोग से संकेत मिल रहे हैं कि भविष्य में मानव सैनिकों का रोल बदल सकता है और कुछ खतरनाक कार्य रोबोटों को सौंपे जा सकते हैं।

इस प्रयोग के सफल होने पर युद्ध की रणनीतियों में बड़ा बदलाव आ सकता है। तकनीकी उन्नति से सैनिकों की सुरक्षा बढ़ेगी और युद्ध संचालन अधिक कुशल और स्वचालित होगा। हालांकि, मानव नियंत्रण और नैतिक सवाल अभी भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

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