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"राजकुमार" के 75 पत्रों ने बनाई 30 किमी की सड़क...... लगातार मिल रहे पत्र से तिलमिला गए थे पूर्व CM दिग्विजय
Opinion By Devendra Patel
कौन कहता है कि आसमान में छेद हो नहीं सकता...... एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो.... दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को उद्दत करते हुए भोपाल शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी राजकुमार जैन ने मुझे उन 75 पत्रों की प्रतियां बताईं जो उन्होंने दिग्विजय सिंह के लोकसभा सदस्य और पीसीसी अध्यक्ष के कार्यकाल में 1981 से 1990 तक नौ वर्ष में लिखे थे।
उनसे वार्तालाप के दौरान जब इस विषय पर चर्चा हो रही थी] कि आज के सत्तारूढ़ दल के नेता अपने कार्यकर्ता अथवा मतदाता की बात सुनते ही नहीं हैं। सिर्फ अपनी ही फिक्र करते हैं] तब स्वभाव से जिद्दी] गुस्सेल किन्तु लिखने पढ़ने के सौकीन भोपाल अभिभाषक संघ के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार जैन ने बताया कि वे मूल रूप से सिरोंज जिला विदिशा के निवासी हैं और 1973 से सन् 2008 तक सिरोंज में वकील] समाजसेवी] कांग्रेसी नेता के रूप में कार्य किया।
उस वक्त विदिशा जिले की तहसील लटेरी को जिला वाले कालापानी कहकर अपने कर्मचारियों का सजा के बतौर वहां ट्रांसफर करते थे। इसी प्रकार सिरोंज से भी सड़कें बहुत जीर्ण क्षीर्ण गड्ढे वालीं थीं। 1978 में राघोगढ़ से युवा दिग्विजय सिंह विधायक बनकर मप्र विधानसभा में पहुंचे। उनकी तेजी] कार्यपटुता से प्रभावित होकर सिरोंज विधानसभा के सभी कांग्रेसी कार्यकर्ता पहले उनके संपर्क में आए फिर उनसे जुड़ गए। 1980 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया और तभी से राजकुमार जैन ने उनसे पत्रों के माध्यम से बासौदा सिरोंज लटेरी मकसूदनगढ़ रोड बनाने का अनुरोध किया। समय का चक्र घूमता गया, 1985 में राजगढ़ लोकसभा सीट से दिग्विजय सिंह सांसद बन गए और सिरोंज विधानसभा उक्त संसदीय सीट का भाग था, इस कारण राजकुमार जैन और उनकी टीम ने बहुत उत्साह से उन्हें जिताया। जीतने के बाद पहले उनसे मौखिक तौर पर, बाद में पत्र के माध्यम से अनुरूरोध किया कि वे जनप्रतिनिधि होने के नाते राज्य सरकार से इस मार्ग को जो कि राजमार्ग क्रमांक 14 था को बनवाएं। अनुरोध बार-बार विफल रहा। तब उन्हें एक पत्र लिखा] जिसका शीर्षक था.......
एक मतदाता का पत्र अपने जनप्रतिनिधि के नाम।

उस पत्र में सांसद जी को इस बात के लिये उल्लाहना दिया कि जिस जनप्रतिनिधि की राजनीतिक यात्रा राघोगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष से शुरू हुई हो उस राघोगढ़ की सड़कें इतनी दयनीय और जीर्ण क्षीर्ण हैं जो साबित करती हैं कि आप केवल सामंतवादी सोच के व्यक्ति हैं] आपकी विकास में कोई रूचि नहीं है। क्योंकि अच्छी सड़कें बनने से संचार साधनों में तेजी आएगी] जनता पढ़ लिखकर जागरूक हो जाएगी] देश विदेश से जुड़ जाएगी तो आपकी सामंतवादी सोच का कुटाराघात होगा।

पत्र पढ़कर दिग्विजय सिंह तिलमिला गए.... उन्होंने भी उतनी ही तल्खी के साथ राजकुमार जैन को पत्र लिखा और मानसिक हताशवादिता का रोगी बताया। फिर राजकुमार जैन ने उन्हें दूसरा पांच पेज का पत्र लिखा और फिर अच्छे मार्ग होने का लाभ रोमन एम्पार्य से लगाकर शेरशाह सूरी तक गिनाया। दिग्विजय सिंह पत्र का उत्तर न दे सके। उसके बाद उन्हें हर पंद्राह बीस दिन के अंतराल से सड़क बनाने का पत्र राजकुमार जैन लिखते रहे। वे कभी पत्र को अनदेखा कर देते] कभी पीडब्ल्यू मिनिस्टर को फारवर्ड कर देते थे। ऐसा चलते&चलते राजकुमार जैन ने लगभग 75 पत्र लिख दिये। और एक समय आया जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने के लगभग एक माह बाद सिरोंज लटेरी मार्ग जिसकी लंबाई 30 किमी थी] कार्य प्रारंभ हुआ और उनके कार्यकाल के दस वर्षों में जहां पूरे मप्र में सड़कों की स्थिति बद से बत्तर हो गई थी] वहीं सिरोंज लटेरी मार्ग आज की सड़कों के समान व्यवस्थित था।
निष्कर्ष : यदि हर विधानसभा लोकसभा में राजकुमार जैन जैसे दस&बीस समाज सेवी ही हो जाएं तो जनप्रतिनिधि जन हितैषी कार्यों को अनदेखा नहीं कर सकता है। आज के संदर्भ में देखा जाए बजट काफी है] किन्तु समुचित नियंत्रण के अभाव में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है] आज बजट आया है लगभग साढ़े चार लाख करोड़। एक वर्ष में मध्य प्रदेश की योजनाओं पर खर्च होंगे। इस बजट में यह बात केवल जागरूक जनप्रतिनिधि या कार्यकर्ता ही समझ सकते हैं कि साढ़े चार लाख करोड़ में से कितना प्रतिशत वेतन] भत्ता] वाहन आदि सरकारी कर्मचारियों की सुख सुविधाओं पर खर्च होगा और कितना प्रतिशत जनहितैषी कार्यों में लगेगा। आज का मतदाता अपने जनप्रतिनिधि से यह पूछने का साहस नहीं करता है कि स्वास्थ्य और शिक्षा की दुरव्यवस्था क्यों है। सरकारी स्कूल में ढेड़ लाख रूपए महिना लेने वाला शिक्षक भी अपने बच्चे को बजाए अपने स्कूल में पढ़ाने के प्रायवेट स्कूल में पढ़ाता है। और सरकारी डॉक्टर अपना इलाज सदैव प्राइवेट नर्सिंग होम में कराता है और सत्तारूढ शासक और सभी लोकसेवक जो शासक के तुल्य हैं वे भी अपने अस्पताल और स्कूलों पर विश्वास न करके प्रायवेट अस्पताल और स्कूलों में अपने बच्चों को भेजते हैं] यदि दस बीस राजकुमार जगह&जगह इस कार्यप्रणाली पर अंगुली उठाएं तो व्यवस्था सुधरने में देर नहीं लगेगी।
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"राजकुमार" के 75 पत्रों ने बनाई 30 किमी की सड़क...... लगातार मिल रहे पत्र से तिलमिला गए थे पूर्व CM दिग्विजय
Opinion By Devendra Patel
उनसे वार्तालाप के दौरान जब इस विषय पर चर्चा हो रही थी] कि आज के सत्तारूढ़ दल के नेता अपने कार्यकर्ता अथवा मतदाता की बात सुनते ही नहीं हैं। सिर्फ अपनी ही फिक्र करते हैं] तब स्वभाव से जिद्दी] गुस्सेल किन्तु लिखने पढ़ने के सौकीन भोपाल अभिभाषक संघ के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार जैन ने बताया कि वे मूल रूप से सिरोंज जिला विदिशा के निवासी हैं और 1973 से सन् 2008 तक सिरोंज में वकील] समाजसेवी] कांग्रेसी नेता के रूप में कार्य किया।
उस वक्त विदिशा जिले की तहसील लटेरी को जिला वाले कालापानी कहकर अपने कर्मचारियों का सजा के बतौर वहां ट्रांसफर करते थे। इसी प्रकार सिरोंज से भी सड़कें बहुत जीर्ण क्षीर्ण गड्ढे वालीं थीं। 1978 में राघोगढ़ से युवा दिग्विजय सिंह विधायक बनकर मप्र विधानसभा में पहुंचे। उनकी तेजी] कार्यपटुता से प्रभावित होकर सिरोंज विधानसभा के सभी कांग्रेसी कार्यकर्ता पहले उनके संपर्क में आए फिर उनसे जुड़ गए। 1980 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया और तभी से राजकुमार जैन ने उनसे पत्रों के माध्यम से बासौदा सिरोंज लटेरी मकसूदनगढ़ रोड बनाने का अनुरोध किया। समय का चक्र घूमता गया, 1985 में राजगढ़ लोकसभा सीट से दिग्विजय सिंह सांसद बन गए और सिरोंज विधानसभा उक्त संसदीय सीट का भाग था, इस कारण राजकुमार जैन और उनकी टीम ने बहुत उत्साह से उन्हें जिताया। जीतने के बाद पहले उनसे मौखिक तौर पर, बाद में पत्र के माध्यम से अनुरूरोध किया कि वे जनप्रतिनिधि होने के नाते राज्य सरकार से इस मार्ग को जो कि राजमार्ग क्रमांक 14 था को बनवाएं। अनुरोध बार-बार विफल रहा। तब उन्हें एक पत्र लिखा] जिसका शीर्षक था.......
एक मतदाता का पत्र अपने जनप्रतिनिधि के नाम।

उस पत्र में सांसद जी को इस बात के लिये उल्लाहना दिया कि जिस जनप्रतिनिधि की राजनीतिक यात्रा राघोगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष से शुरू हुई हो उस राघोगढ़ की सड़कें इतनी दयनीय और जीर्ण क्षीर्ण हैं जो साबित करती हैं कि आप केवल सामंतवादी सोच के व्यक्ति हैं] आपकी विकास में कोई रूचि नहीं है। क्योंकि अच्छी सड़कें बनने से संचार साधनों में तेजी आएगी] जनता पढ़ लिखकर जागरूक हो जाएगी] देश विदेश से जुड़ जाएगी तो आपकी सामंतवादी सोच का कुटाराघात होगा।

पत्र पढ़कर दिग्विजय सिंह तिलमिला गए.... उन्होंने भी उतनी ही तल्खी के साथ राजकुमार जैन को पत्र लिखा और मानसिक हताशवादिता का रोगी बताया। फिर राजकुमार जैन ने उन्हें दूसरा पांच पेज का पत्र लिखा और फिर अच्छे मार्ग होने का लाभ रोमन एम्पार्य से लगाकर शेरशाह सूरी तक गिनाया। दिग्विजय सिंह पत्र का उत्तर न दे सके। उसके बाद उन्हें हर पंद्राह बीस दिन के अंतराल से सड़क बनाने का पत्र राजकुमार जैन लिखते रहे। वे कभी पत्र को अनदेखा कर देते] कभी पीडब्ल्यू मिनिस्टर को फारवर्ड कर देते थे। ऐसा चलते&चलते राजकुमार जैन ने लगभग 75 पत्र लिख दिये। और एक समय आया जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने के लगभग एक माह बाद सिरोंज लटेरी मार्ग जिसकी लंबाई 30 किमी थी] कार्य प्रारंभ हुआ और उनके कार्यकाल के दस वर्षों में जहां पूरे मप्र में सड़कों की स्थिति बद से बत्तर हो गई थी] वहीं सिरोंज लटेरी मार्ग आज की सड़कों के समान व्यवस्थित था।
निष्कर्ष : यदि हर विधानसभा लोकसभा में राजकुमार जैन जैसे दस&बीस समाज सेवी ही हो जाएं तो जनप्रतिनिधि जन हितैषी कार्यों को अनदेखा नहीं कर सकता है। आज के संदर्भ में देखा जाए बजट काफी है] किन्तु समुचित नियंत्रण के अभाव में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है] आज बजट आया है लगभग साढ़े चार लाख करोड़। एक वर्ष में मध्य प्रदेश की योजनाओं पर खर्च होंगे। इस बजट में यह बात केवल जागरूक जनप्रतिनिधि या कार्यकर्ता ही समझ सकते हैं कि साढ़े चार लाख करोड़ में से कितना प्रतिशत वेतन] भत्ता] वाहन आदि सरकारी कर्मचारियों की सुख सुविधाओं पर खर्च होगा और कितना प्रतिशत जनहितैषी कार्यों में लगेगा। आज का मतदाता अपने जनप्रतिनिधि से यह पूछने का साहस नहीं करता है कि स्वास्थ्य और शिक्षा की दुरव्यवस्था क्यों है। सरकारी स्कूल में ढेड़ लाख रूपए महिना लेने वाला शिक्षक भी अपने बच्चे को बजाए अपने स्कूल में पढ़ाने के प्रायवेट स्कूल में पढ़ाता है। और सरकारी डॉक्टर अपना इलाज सदैव प्राइवेट नर्सिंग होम में कराता है और सत्तारूढ शासक और सभी लोकसेवक जो शासक के तुल्य हैं वे भी अपने अस्पताल और स्कूलों पर विश्वास न करके प्रायवेट अस्पताल और स्कूलों में अपने बच्चों को भेजते हैं] यदि दस बीस राजकुमार जगह&जगह इस कार्यप्रणाली पर अंगुली उठाएं तो व्यवस्था सुधरने में देर नहीं लगेगी।
