जागरण ओपीनियन : दिल्ली-एनसीआर में फिर गहराता सांसों पर संकट

opinion

नवंबर, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी- ‘दिल्ली नरक से भी बदतर हो गई है।’ लगता नहीं कि उसके बाद भी कुछ बदला है। भविष्य में भी सुधार का दावा कोई नहीं कर सकता, क्योंकि जो समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं, उनके एजेंडे पर तो यह समस्या नजर ही नहीं आती।

अभी बस दशहरा बीता है, दीपावली आने वाली है। उससे पहले ही दिल्ली- एनसीआर में जहरीली होती हवा सांसों पर भारी पडऩे लगी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआइ बहुत खराब की श्रेणी में पहुंच चुका है। दिल्ली में औसत एक्यूआइ 293 पहुंच गया है। मूंढका, आनंद विहार, पटपडग़ंज, रोहिणी और द्वारका सेक्टर-8 क्षेत्रों में यह अभी से 300 पार जा चुका है। अतीत का अनुभव बताता है कि आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा। बढ़ते वायु प्रदूषण से जनता की सांसों पर गहराते संकट के समाधान के लिए सरकार के पास विभिन्न चरणों में लगाए जाने वाले प्रतिबंधों के अलावा कोई योजना नजर नहीं आती। ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान के तहत ग्रेड-वन के प्रतिबंध दिल्ली में लागू किए जा चुके हैं। जैसे-जैसे वायु प्रदूषण बढ़ेगा, ये प्रतिबंध भी बढ़ते जाएंगे। हर साल इन्हीं दिनों गहराने वाले जानलेवा संकट के समाधान की कोई सोच देश या दिल्ली की सरकार के पास नहीं दिखती। इस विवेकहीनता और निष्क्रियता के लिए सुप्रीम कोर्ट, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा सरकारों को भी कड़ी फटकार लगा चुका है।
ध्यान रहे कि दिल्ली में इन दिनों बढऩे वाले वायु प्रदूषण में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली का बड़ा योगदान बताया जाता है। उससे निपटने के प्रयासों के दावे भी राज्य सरकारों द्वारा किए जाते हैं पर वांछित परिणाम नजर नहीं आते। वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए बना आयोग भी जिम्मेदारी के निर्वाह में नाकाम नजर आता है। हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने से रोकने में पंजाब सरकार की नाकामी पर सख्त टिप्पणी की कि सरकार को स्वयं को ‘असमर्थ’ घोषित कर देना चाहिए। पंजाब और दिल्ली, दोनों ही राज्यों में क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार है, इसलिए यह आप और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी बनता रहता है। ध्यान रहे कि पंजाब और दिल्ली के बीच स्थित राज्य हरियाणा में भाजपा की सरकार है। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा सरकार है, जिसके पश्चिमी क्षेत्र के किसानों पर पराली जलाने का आरोप लगता रहता है। आम आदमी की सेहत ही नहीं, जीवन से भी जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति हमारे दलों की संवेदनहीनता को उजागर करती है। हर साल जनता की सांसों पर मंडराने वाले इस संकट के स्थायी समाधान की दूरगामी योजना की पहल किसी को तो करनी चाहिए।
ऐसे जटिल मुद्दों के समाधान में सुप्रीम कोर्ट पहल करता रहा है, पर इस मामले में वह अभी तक सख्त टिप्पणियों से आगे बढ़ता नहीं दिखता और सख्त टिप्पणियों का संबंधित पक्षों पर असर नजर आता नहीं। तमाम तरह के प्रतिबंधों से उच्च वायु प्रदूषण काल में आंशिक नियंत्रण से संतुष्ट होने के बजाय दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी कैसे बने-इस पर सुप्रीम कोर्ट को मार्गदर्शक निर्देश देने चाहिए, वरना सत्ता पर काबिज दल और नेता एक-दूसरे पर दोषारोपण कर लोगों की आंखों में धूल झोंकते रहेंगे। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिवाली से पहले ही पटाखे चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, लेकिन लोग उस पर भी राजनीति से बाज नहीं आते। कुछ लोगों को लगता है कि पटाखे चलाए बिना ‘अंधकार पर प्रकाश की विजय’ का पर्व दीपावली मनाया ही नहीं जा सकता। पिछले साल प्रतिबंधों को धता बता कर दीपावली की रात की गई आतिशबाजी से अगले दिन वायु प्रदूषण 999 के बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। यह आम आदमी की सेहत, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 401 से 500 तक के एक्यूआइ को भी ‘गंभीर’ माना जाता है। यह आंकड़ा भी गोपनीय नहीं है कि भारत में हर साल वायु प्रदूषण से 20 लाख मौतें होती हैं। देश में होने वाली मौतों का यह पांचवां बड़ा कारण है। इसके बावजूद दमघोंटू हवा का दोष पराली और पटाखों के सिर मढ़ कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है तो उसे संवेदनहीनता और निष्क्रियता की पराकाष्ठा ही कहा जा सकता है।
बेशक पराली जलाने से रोकने के लिए सरकारों को किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यावहारिक कदम उठाने होंगे, पर सच यह भी है कि दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में पराली और पटाखों का योगदान अवधि और मात्रा की दृष्टि से सीमित है। इसलिए अन्य स्थायी कारणों का निदान जरूरी है। भू-विज्ञान मंत्रालय के एक रिसर्च पेपर के मुताबिक वायु प्रदूषण में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों की रहती है। भवन निर्माण आदि से उडऩेवाली धूल 21.5 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है।
दिल्ली परिवहन विभाग के आंकड़े के मुताबिक पिछले 30 साल में वाहन और उनसे होने वाला प्रदूषण तीन गुणा बढ़ गया है। फिर भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर और विश्वसनीय बनाने की दिशा में कुछ खास नहीं किया गया। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र न होने पर निजी यात्री वाहनों के चालान तो बढ़े हैं, पर प्रदूषण फैलाते कॉमर्शियल वाहनों की ऑन द स्पॉट जांच कर चालान की पहल कहीं नजर नहीं आती। नवंबर, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी- ‘दिल्ली नरक से भी बदतर हो गई है।’ लगता नहीं कि उसके बाद भी कुछ बदला है। भविष्य में भी सुधार का दावा कोई नहीं कर सकता, क्योंकि जो समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं, उनके एजेंडे पर तो यह समस्या नजर ही नहीं आती।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
22 Oct 2024 By दैनिक जागरण

जागरण ओपीनियन : दिल्ली-एनसीआर में फिर गहराता सांसों पर संकट

opinion

अभी बस दशहरा बीता है, दीपावली आने वाली है। उससे पहले ही दिल्ली- एनसीआर में जहरीली होती हवा सांसों पर भारी पडऩे लगी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआइ बहुत खराब की श्रेणी में पहुंच चुका है। दिल्ली में औसत एक्यूआइ 293 पहुंच गया है। मूंढका, आनंद विहार, पटपडग़ंज, रोहिणी और द्वारका सेक्टर-8 क्षेत्रों में यह अभी से 300 पार जा चुका है। अतीत का अनुभव बताता है कि आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा। बढ़ते वायु प्रदूषण से जनता की सांसों पर गहराते संकट के समाधान के लिए सरकार के पास विभिन्न चरणों में लगाए जाने वाले प्रतिबंधों के अलावा कोई योजना नजर नहीं आती। ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान के तहत ग्रेड-वन के प्रतिबंध दिल्ली में लागू किए जा चुके हैं। जैसे-जैसे वायु प्रदूषण बढ़ेगा, ये प्रतिबंध भी बढ़ते जाएंगे। हर साल इन्हीं दिनों गहराने वाले जानलेवा संकट के समाधान की कोई सोच देश या दिल्ली की सरकार के पास नहीं दिखती। इस विवेकहीनता और निष्क्रियता के लिए सुप्रीम कोर्ट, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा सरकारों को भी कड़ी फटकार लगा चुका है।
ध्यान रहे कि दिल्ली में इन दिनों बढऩे वाले वायु प्रदूषण में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली का बड़ा योगदान बताया जाता है। उससे निपटने के प्रयासों के दावे भी राज्य सरकारों द्वारा किए जाते हैं पर वांछित परिणाम नजर नहीं आते। वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए बना आयोग भी जिम्मेदारी के निर्वाह में नाकाम नजर आता है। हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने से रोकने में पंजाब सरकार की नाकामी पर सख्त टिप्पणी की कि सरकार को स्वयं को ‘असमर्थ’ घोषित कर देना चाहिए। पंजाब और दिल्ली, दोनों ही राज्यों में क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार है, इसलिए यह आप और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी बनता रहता है। ध्यान रहे कि पंजाब और दिल्ली के बीच स्थित राज्य हरियाणा में भाजपा की सरकार है। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा सरकार है, जिसके पश्चिमी क्षेत्र के किसानों पर पराली जलाने का आरोप लगता रहता है। आम आदमी की सेहत ही नहीं, जीवन से भी जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति हमारे दलों की संवेदनहीनता को उजागर करती है। हर साल जनता की सांसों पर मंडराने वाले इस संकट के स्थायी समाधान की दूरगामी योजना की पहल किसी को तो करनी चाहिए।
ऐसे जटिल मुद्दों के समाधान में सुप्रीम कोर्ट पहल करता रहा है, पर इस मामले में वह अभी तक सख्त टिप्पणियों से आगे बढ़ता नहीं दिखता और सख्त टिप्पणियों का संबंधित पक्षों पर असर नजर आता नहीं। तमाम तरह के प्रतिबंधों से उच्च वायु प्रदूषण काल में आंशिक नियंत्रण से संतुष्ट होने के बजाय दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी कैसे बने-इस पर सुप्रीम कोर्ट को मार्गदर्शक निर्देश देने चाहिए, वरना सत्ता पर काबिज दल और नेता एक-दूसरे पर दोषारोपण कर लोगों की आंखों में धूल झोंकते रहेंगे। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिवाली से पहले ही पटाखे चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, लेकिन लोग उस पर भी राजनीति से बाज नहीं आते। कुछ लोगों को लगता है कि पटाखे चलाए बिना ‘अंधकार पर प्रकाश की विजय’ का पर्व दीपावली मनाया ही नहीं जा सकता। पिछले साल प्रतिबंधों को धता बता कर दीपावली की रात की गई आतिशबाजी से अगले दिन वायु प्रदूषण 999 के बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। यह आम आदमी की सेहत, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 401 से 500 तक के एक्यूआइ को भी ‘गंभीर’ माना जाता है। यह आंकड़ा भी गोपनीय नहीं है कि भारत में हर साल वायु प्रदूषण से 20 लाख मौतें होती हैं। देश में होने वाली मौतों का यह पांचवां बड़ा कारण है। इसके बावजूद दमघोंटू हवा का दोष पराली और पटाखों के सिर मढ़ कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है तो उसे संवेदनहीनता और निष्क्रियता की पराकाष्ठा ही कहा जा सकता है।
बेशक पराली जलाने से रोकने के लिए सरकारों को किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यावहारिक कदम उठाने होंगे, पर सच यह भी है कि दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में पराली और पटाखों का योगदान अवधि और मात्रा की दृष्टि से सीमित है। इसलिए अन्य स्थायी कारणों का निदान जरूरी है। भू-विज्ञान मंत्रालय के एक रिसर्च पेपर के मुताबिक वायु प्रदूषण में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों की रहती है। भवन निर्माण आदि से उडऩेवाली धूल 21.5 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है।
दिल्ली परिवहन विभाग के आंकड़े के मुताबिक पिछले 30 साल में वाहन और उनसे होने वाला प्रदूषण तीन गुणा बढ़ गया है। फिर भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर और विश्वसनीय बनाने की दिशा में कुछ खास नहीं किया गया। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र न होने पर निजी यात्री वाहनों के चालान तो बढ़े हैं, पर प्रदूषण फैलाते कॉमर्शियल वाहनों की ऑन द स्पॉट जांच कर चालान की पहल कहीं नजर नहीं आती। नवंबर, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी- ‘दिल्ली नरक से भी बदतर हो गई है।’ लगता नहीं कि उसके बाद भी कुछ बदला है। भविष्य में भी सुधार का दावा कोई नहीं कर सकता, क्योंकि जो समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं, उनके एजेंडे पर तो यह समस्या नजर ही नहीं आती।
https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/breathing-crisis-deepens-again-in-delhi-ncr/article-1764

खबरें और भी हैं

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

टाप न्यूज

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

मझौली जनपद पंचायत के विभागीय ग्रुप में सामने आया मैसेज, प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले सोशल मीडिया पर वायरल...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

प्रयागराज से रीवा लाई जा रही थी 1312 शीशी नशीली कफ सीरप, 19 वर्षीय तस्कर गिरफ्तार, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष...
देश विदेश 
ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

संयुक्त संसदीय समिति का दावा- अधिकांश लोगों ने किया समर्थन, राज्यों से सुझाव लेकर तैयार हो रहा रोडमैप; संवैधानिक संशोधन...
देश विदेश 
2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

बिजनेस

ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप
एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी...
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू
शेयर बाजार में शानदार तेजी: सेंसेक्स 828 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार; बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने भरी उड़ान
BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क भी होगी बातचीत; खरीदने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी
शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.