Jagran Opinion: तोड़ना होगा मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क

Opinion

दिल्ली ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में हर साल हजारों करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में इन पदार्थों की खपत होती है और युवाओं का भविष्य चौपट हो रहा है।

Nitin Kumardr

जिस तरह से नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ रही है, उसे देखते हुए देश में फैल रहे ड्रग नेटवर्क का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। दिल्ली में दो हजार करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थों की बरामदगी वाकई चौंकाने वाली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 560 किलोग्राम से ज्यादा कोकीन जब्त की है। इस तस्करी से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर गिरोह जुड़ा हुआ है। पुलिस ने इस गिरोह के 4 लोगों को गिरफ्तार करने में भी कामयाबी हासिल की है।

देश की राजधानी में इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना चौंकाने से अधिक चिंता की बात है। दिल्ली ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में हर साल हजारों करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में इन पदार्थों की खपत होती है और युवाओं का भविष्य चौपट हो रहा है। पाकिस्तान के रास्ते होने वाली इस तस्करी के जरिए समाजकंटक खूब पैसा कमा रहे हैं। इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक मिलीभगत का खेल भी चल रहा है। अहम सवाल यह है कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद नशे का यह जाल दिन दूनी, रात चौगुनी प्रगति कैसे कर रहा है? क्या पुलिस और सरकारी एजेंसियों की मिलीभगत भी है? एक दशक पहले तक पंजाब को नशीले पदार्थों का केंद्र माना जाता था। वर्तमान में लगभग पूरा देश इसकी गिरफ्त में नजर आ रहा है। तमाम सरकारी प्रयास नाकाफी नजर आ रहे हैं। क्या नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क इतना मजबूत है कि सरकार उसके सामने कमजोर नजर आ रही है? या फिर हमारे कानून में कमी है जिससे अपराधियों को सजा ही नहीं मिल पाती? कई देशों में नशीले पदार्थों को लेकर सरकारें कड़े कानून बना रही हैं। युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाले ऐसे कृत्य से जुड़े लोगों को सजा दिलाने के लिए भारत में भी कड़े कानून बनाने की जरूरत है। अलग-अलग राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय की भी जरूरत है। साथ ही आम जनता का सहयोग भी लिया जाना चाहिए, ताकि नशे के नेटवर्क का समय रहते पता चल सके और उसे तोड़ा जा सके।
मादक पदार्थों की तस्करी के मुकदमों की समीक्षा भी होनी चाहिए। मादक पदार्थों की तस्करी में पकड़े गए लोगों को कितनी सजा मिली और अगर नहीं मिल पाई तो क्यों? अगर कानूनी दांवपेंच के चलते किसी को सजा नहीं मिल पाई तो इसके लिए आखिर किसे दोषी माना जाए? तस्करों से सांठगांठ के चक्रव्यूह को तोड़ने में आ रही अड़चनों को दूर किए बिना अपेक्षित परिणाम की उम्मीद करना बेमानी होगा।

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03 Oct 2024 By दैनिक जागरण

Jagran Opinion: तोड़ना होगा मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क

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Nitin Kumardr

जिस तरह से नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ रही है, उसे देखते हुए देश में फैल रहे ड्रग नेटवर्क का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। दिल्ली में दो हजार करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थों की बरामदगी वाकई चौंकाने वाली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 560 किलोग्राम से ज्यादा कोकीन जब्त की है। इस तस्करी से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर गिरोह जुड़ा हुआ है। पुलिस ने इस गिरोह के 4 लोगों को गिरफ्तार करने में भी कामयाबी हासिल की है।

देश की राजधानी में इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना चौंकाने से अधिक चिंता की बात है। दिल्ली ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में हर साल हजारों करोड़ रुपए मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में इन पदार्थों की खपत होती है और युवाओं का भविष्य चौपट हो रहा है। पाकिस्तान के रास्ते होने वाली इस तस्करी के जरिए समाजकंटक खूब पैसा कमा रहे हैं। इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक मिलीभगत का खेल भी चल रहा है। अहम सवाल यह है कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद नशे का यह जाल दिन दूनी, रात चौगुनी प्रगति कैसे कर रहा है? क्या पुलिस और सरकारी एजेंसियों की मिलीभगत भी है? एक दशक पहले तक पंजाब को नशीले पदार्थों का केंद्र माना जाता था। वर्तमान में लगभग पूरा देश इसकी गिरफ्त में नजर आ रहा है। तमाम सरकारी प्रयास नाकाफी नजर आ रहे हैं। क्या नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क इतना मजबूत है कि सरकार उसके सामने कमजोर नजर आ रही है? या फिर हमारे कानून में कमी है जिससे अपराधियों को सजा ही नहीं मिल पाती? कई देशों में नशीले पदार्थों को लेकर सरकारें कड़े कानून बना रही हैं। युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाले ऐसे कृत्य से जुड़े लोगों को सजा दिलाने के लिए भारत में भी कड़े कानून बनाने की जरूरत है। अलग-अलग राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय की भी जरूरत है। साथ ही आम जनता का सहयोग भी लिया जाना चाहिए, ताकि नशे के नेटवर्क का समय रहते पता चल सके और उसे तोड़ा जा सके।
मादक पदार्थों की तस्करी के मुकदमों की समीक्षा भी होनी चाहिए। मादक पदार्थों की तस्करी में पकड़े गए लोगों को कितनी सजा मिली और अगर नहीं मिल पाई तो क्यों? अगर कानूनी दांवपेंच के चलते किसी को सजा नहीं मिल पाई तो इसके लिए आखिर किसे दोषी माना जाए? तस्करों से सांठगांठ के चक्रव्यूह को तोड़ने में आ रही अड़चनों को दूर किए बिना अपेक्षित परिणाम की उम्मीद करना बेमानी होगा।
https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/jagran-opinion-drug-trafficking-network-will-have-to-be-broken/article-555

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