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एमपी में महिला नेतृत्व की मिसाल बनीं कृष्णा गौर, कार्यक्षमता और सादगी से जीता दिल: राकेश शर्मा
opinion
मध्य प्रदेश की राजनीति में यदि महिला नेतृत्व की बात हो और कृष्णा गौर का नाम सबसे ऊपर न आए, तो आकलन अधूरा माना जाएगा। डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में कई महिला मंत्री सक्रिय हैं, लेकिन जमीन से जुड़े कार्य, संगठनात्मक पकड़ और प्रशासनिक दक्षता के पैमाने पर कृष्णा गौर लगातार सबसे आगे नजर आती हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए कृष्णा गौर ने न केवल नगर निगम से लेकर विधानसभा और मंत्रालय तक का सफर सफलतापूर्वक तय किया, बल्कि उन्होंने हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी। नगर निगम की राजनीति को देश में राजनीतिक शिक्षा की पहली सीढ़ी कहा जाता है और इस सीढ़ी पर चढ़ते हुए बतौर महापौर उन्होंने भोपाल शहर में विकास की नई इबारत लिखी।
पर्यटन से लेकर प्रशासन तक छोड़ी छाप
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने राज्य को राष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर नई पहचान दिलाई। वहीं, राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए अपने विभागों में लगातार नवाचार कर उन्हें मॉडल डिपार्टमेंट के तौर पर स्थापित किया।
फेम इंडिया सर्वे में देश के टॉप 50 विधायक में चयन
उनकी कार्यशैली और लोकप्रियता का ही परिणाम है कि फेम इंडिया द्वारा किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में उन्हें देश के टॉप 50 विधायकों में शामिल किया गया। यह न केवल उनकी कार्यदक्षता का प्रमाण है, बल्कि उनके प्रति जनता और पार्टी नेतृत्व के भरोसे का भी प्रतीक है।
हर कार्यकर्ता के लिए ‘कृष्णा दीदी’
कृष्णा गौर को उनके समर्थक और कार्यकर्ता प्यार से ‘कृष्णा दीदी’ और ‘कृष्णा भाभी’ कहकर बुलाते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं से उनका जुड़ाव भावनात्मक स्तर पर भी देखा जाता है। वे न केवल क्षेत्रीय कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी निभाती हैं, बल्कि आम कार्यकर्ताओं के छोटे आयोजनों में भी परिवार के सदस्य की तरह शामिल होती हैं।
विवादों से रही दूर, सादगी बनी पहचान
राजनीतिक जीवन में अक्सर विवादों की छाया पड़ती है, लेकिन कृष्णा गौर अपने लंबे करियर में अब तक किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रही हैं। उनकी सादगी और सहजता ही उन्हें बाकी नेताओं से अलग पहचान देती है।
महिला नेतृत्व की प्रेरणास्रोत
कृष्णा गौर न केवल भाजपा महिला मोर्चा और पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ में जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा चुकी हैं, बल्कि प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठनात्मक कार्यों में भी उन्होंने अपनी भूमिका को बखूबी अंजाम दिया है।
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि आने वाले समय में कृष्णा गौर महिला नेतृत्व के एक सशक्त और निर्णायक चेहरे के रूप में उभरेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं के लिए आरक्षित 33% आरक्षण के परिप्रेक्ष्य में पार्टी के भीतर उनके अनुभव और क्षमता का उपयोग बड़े स्तर पर किया जा सकता है।
एक नेता, जो सिर्फ नाम नहीं, एक पहचान है
कृष्णा गौर एक ऐसे राजनीतिक परिवार से आती हैं, जहां सत्ता और संग्राम दोनों विरासत में मिले, लेकिन उन्होंने अपनी सौम्यता, कार्यकुशलता और व्यवहार से अपनी एक अलग पहचान बनाई। वे आज की युवा महिला नेताओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं।
📌 लेखक
राकेश शर्मा, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति पर विशेष पकड़ रखते हैं।
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एमपी में महिला नेतृत्व की मिसाल बनीं कृष्णा गौर, कार्यक्षमता और सादगी से जीता दिल: राकेश शर्मा
opinion
मध्य प्रदेश की राजनीति में यदि महिला नेतृत्व की बात हो और कृष्णा गौर का नाम सबसे ऊपर न आए, तो आकलन अधूरा माना जाएगा। डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में कई महिला मंत्री सक्रिय हैं, लेकिन जमीन से जुड़े कार्य, संगठनात्मक पकड़ और प्रशासनिक दक्षता के पैमाने पर कृष्णा गौर लगातार सबसे आगे नजर आती हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए कृष्णा गौर ने न केवल नगर निगम से लेकर विधानसभा और मंत्रालय तक का सफर सफलतापूर्वक तय किया, बल्कि उन्होंने हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी। नगर निगम की राजनीति को देश में राजनीतिक शिक्षा की पहली सीढ़ी कहा जाता है और इस सीढ़ी पर चढ़ते हुए बतौर महापौर उन्होंने भोपाल शहर में विकास की नई इबारत लिखी।
पर्यटन से लेकर प्रशासन तक छोड़ी छाप
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने राज्य को राष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर नई पहचान दिलाई। वहीं, राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए अपने विभागों में लगातार नवाचार कर उन्हें मॉडल डिपार्टमेंट के तौर पर स्थापित किया।
फेम इंडिया सर्वे में देश के टॉप 50 विधायक में चयन
उनकी कार्यशैली और लोकप्रियता का ही परिणाम है कि फेम इंडिया द्वारा किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में उन्हें देश के टॉप 50 विधायकों में शामिल किया गया। यह न केवल उनकी कार्यदक्षता का प्रमाण है, बल्कि उनके प्रति जनता और पार्टी नेतृत्व के भरोसे का भी प्रतीक है।
हर कार्यकर्ता के लिए ‘कृष्णा दीदी’
कृष्णा गौर को उनके समर्थक और कार्यकर्ता प्यार से ‘कृष्णा दीदी’ और ‘कृष्णा भाभी’ कहकर बुलाते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं से उनका जुड़ाव भावनात्मक स्तर पर भी देखा जाता है। वे न केवल क्षेत्रीय कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी निभाती हैं, बल्कि आम कार्यकर्ताओं के छोटे आयोजनों में भी परिवार के सदस्य की तरह शामिल होती हैं।
विवादों से रही दूर, सादगी बनी पहचान
राजनीतिक जीवन में अक्सर विवादों की छाया पड़ती है, लेकिन कृष्णा गौर अपने लंबे करियर में अब तक किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रही हैं। उनकी सादगी और सहजता ही उन्हें बाकी नेताओं से अलग पहचान देती है।
महिला नेतृत्व की प्रेरणास्रोत
कृष्णा गौर न केवल भाजपा महिला मोर्चा और पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ में जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा चुकी हैं, बल्कि प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठनात्मक कार्यों में भी उन्होंने अपनी भूमिका को बखूबी अंजाम दिया है।
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि आने वाले समय में कृष्णा गौर महिला नेतृत्व के एक सशक्त और निर्णायक चेहरे के रूप में उभरेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं के लिए आरक्षित 33% आरक्षण के परिप्रेक्ष्य में पार्टी के भीतर उनके अनुभव और क्षमता का उपयोग बड़े स्तर पर किया जा सकता है।
एक नेता, जो सिर्फ नाम नहीं, एक पहचान है
कृष्णा गौर एक ऐसे राजनीतिक परिवार से आती हैं, जहां सत्ता और संग्राम दोनों विरासत में मिले, लेकिन उन्होंने अपनी सौम्यता, कार्यकुशलता और व्यवहार से अपनी एक अलग पहचान बनाई। वे आज की युवा महिला नेताओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं।
📌 लेखक
राकेश शर्मा, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति पर विशेष पकड़ रखते हैं।
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