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रीवा से राजधानी तक: राजेंद्र शुक्ल के नेतृत्व में विन्ध्य की नई पहचान..... जन्मदिवस पर विशेष
ओपीनियन - अनूप सक्सेना
आज, 3 अगस्त को मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल का जन्मदिन है। जनसेवा, दूरदृष्टि और विकास को समर्पित उनका जीवन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अनुकरणीय मिसाल पेश करता है। रीवा से निकलकर प्रदेश की सत्ता के शिखर तक का उनका सफर, उनके संघर्ष, संकल्प और समर्पण का प्रमाण है।
मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल आज 3 अगस्त को अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं। बीते दो दशकों में प्रदेश की राजनीति में अपनी विशेष पहचान बना चुके श्री शुक्ल जनसेवा, दूरदृष्टि और विकास के संगम का नाम हैं। वे न केवल रीवा और विंध्य क्षेत्र के लोकप्रिय नेता हैं, बल्कि राज्य स्तर पर भी विकास के पर्याय बन चुके हैं।
छात्र जीवन से नेतृत्व की बुनियाद
रीवा में जन्मे शुक्ल का छात्र जीवन नेतृत्व क्षमता का परिचायक रहा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही वे वर्ष 1985-86 में छात्रसंघ अध्यक्ष बने और तभी से सक्रिय जनभागीदारी की शुरुआत हुई। आगे चलकर लायंस क्लब, भाजपा कार्यसमिति और गृह निर्माण मंडल में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की नींव रखी।
विधायक से उप मुख्यमंत्री तक का सतत विकासपथ
वर्ष 1998 में भाजपा की सदस्यता लेने के बाद वर्ष 2003 में पहली बार विधायक चुने गए और पहली ही पारी में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद ऊर्जा, खनिज, पर्यावरण, वाणिज्य, जनसंपर्क, उद्योग, प्रवासी भारतीय जैसे दर्जनों अहम विभागों में मंत्री के रूप में उन्होंने मध्यप्रदेश को नई दिशा दी। दिसंबर 2023 में वे प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बने और वर्तमान में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का दायित्व संभाल रहे हैं।
अटल ज्योति से रोशन हुआ मध्यप्रदेश
ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्होंने ‘अटल ज्योति योजना’ के माध्यम से प्रदेश को 24 घंटे बिजली देने का सपना साकार किया। गुजरात की ग्राम ज्योति योजना से प्रेरणा लेकर शुरू की गई यह योजना आज भी ग्रामीण मध्यप्रदेश के विकास की रीढ़ बनी हुई है।
एशिया का सबसे बड़ा सौर प्लांट: रीवा की पहचान
शुक्ल के नेतृत्व में रीवा में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट स्थापित हुआ, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया। यह परियोजना आज न केवल प्रदेश की ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का आदर्श भी है।
भावनाओं से जुड़ा निर्णय: सफेद बाघ की वापसी
विन्ध्य क्षेत्र के गौरव व्हाइट टाइगर को 46 वर्षों के अंतराल के बाद मुकुंदपुर लाना सिर्फ एक योजना नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र की भावनाओं का सम्मान था। शुक्ल के प्रयासों से स्थापित यह जू आज हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
आधारभूत ढांचे का कायाकल्प
रीवा में हवाई सेवा का संचालन, खेल परिसर, बीहर नदी का रिवर फ्रंट, तालाबों का जीर्णोद्धार, सड़क और पुलों का निर्माण, सुपरस्पेशलिटी अस्पताल – यह सब उनकी विकास दृष्टि के ठोस उदाहरण हैं। वाणसागर परियोजना से सिंचाई के विस्तार ने हजारों किसानों को राहत दी है।
पर्यावरण और गौ-सेवा में भी अग्रणी
शुक्ल ने नगर वन, एपीएस वन, व्यापक वृक्षारोपण अभियानों और बसामन मामा गौ अभयारण्य जैसी योजनाओं के माध्यम से पर्यावरण और गौ-संरक्षण को जनआंदोलन में बदला। उन्होंने गौ-सेवा को लाभकारी बनाने हेतु सामुदायिक सहभागिता पर बल दिया।
शिक्षा और संस्कृति के संवाहक
संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, मंदिरों और तीर्थ स्थलों का विकास, सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता – ये सभी पहल उनके शिक्षा एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने का प्रमाण हैं।
निष्कर्ष
राजेंद्र शुक्ल का जीवन एक समर्पित जनप्रतिनिधि की कहानी है – जिसने राजनीति को सेवा का माध्यम माना और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। उनके जन्मदिन के इस अवसर पर पूरा विंध्य और मध्यप्रदेश उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है और उनके नेतृत्व में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचते देखने की आशा कर रहा है।
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को।
लेखक – अनूप सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
(यह लेख राजेंद्र शुक्ल के सार्वजनिक जीवन, उपलब्धियों और जनसेवा कार्यों पर आधारित है।)
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रीवा से राजधानी तक: राजेंद्र शुक्ल के नेतृत्व में विन्ध्य की नई पहचान..... जन्मदिवस पर विशेष
ओपीनियन - अनूप सक्सेना
मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल आज 3 अगस्त को अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं। बीते दो दशकों में प्रदेश की राजनीति में अपनी विशेष पहचान बना चुके श्री शुक्ल जनसेवा, दूरदृष्टि और विकास के संगम का नाम हैं। वे न केवल रीवा और विंध्य क्षेत्र के लोकप्रिय नेता हैं, बल्कि राज्य स्तर पर भी विकास के पर्याय बन चुके हैं।
छात्र जीवन से नेतृत्व की बुनियाद
रीवा में जन्मे शुक्ल का छात्र जीवन नेतृत्व क्षमता का परिचायक रहा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही वे वर्ष 1985-86 में छात्रसंघ अध्यक्ष बने और तभी से सक्रिय जनभागीदारी की शुरुआत हुई। आगे चलकर लायंस क्लब, भाजपा कार्यसमिति और गृह निर्माण मंडल में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की नींव रखी।
विधायक से उप मुख्यमंत्री तक का सतत विकासपथ
वर्ष 1998 में भाजपा की सदस्यता लेने के बाद वर्ष 2003 में पहली बार विधायक चुने गए और पहली ही पारी में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद ऊर्जा, खनिज, पर्यावरण, वाणिज्य, जनसंपर्क, उद्योग, प्रवासी भारतीय जैसे दर्जनों अहम विभागों में मंत्री के रूप में उन्होंने मध्यप्रदेश को नई दिशा दी। दिसंबर 2023 में वे प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बने और वर्तमान में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का दायित्व संभाल रहे हैं।
अटल ज्योति से रोशन हुआ मध्यप्रदेश
ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्होंने ‘अटल ज्योति योजना’ के माध्यम से प्रदेश को 24 घंटे बिजली देने का सपना साकार किया। गुजरात की ग्राम ज्योति योजना से प्रेरणा लेकर शुरू की गई यह योजना आज भी ग्रामीण मध्यप्रदेश के विकास की रीढ़ बनी हुई है।
एशिया का सबसे बड़ा सौर प्लांट: रीवा की पहचान
शुक्ल के नेतृत्व में रीवा में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट स्थापित हुआ, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया। यह परियोजना आज न केवल प्रदेश की ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का आदर्श भी है।
भावनाओं से जुड़ा निर्णय: सफेद बाघ की वापसी
विन्ध्य क्षेत्र के गौरव व्हाइट टाइगर को 46 वर्षों के अंतराल के बाद मुकुंदपुर लाना सिर्फ एक योजना नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र की भावनाओं का सम्मान था। शुक्ल के प्रयासों से स्थापित यह जू आज हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
आधारभूत ढांचे का कायाकल्प
रीवा में हवाई सेवा का संचालन, खेल परिसर, बीहर नदी का रिवर फ्रंट, तालाबों का जीर्णोद्धार, सड़क और पुलों का निर्माण, सुपरस्पेशलिटी अस्पताल – यह सब उनकी विकास दृष्टि के ठोस उदाहरण हैं। वाणसागर परियोजना से सिंचाई के विस्तार ने हजारों किसानों को राहत दी है।
पर्यावरण और गौ-सेवा में भी अग्रणी
शुक्ल ने नगर वन, एपीएस वन, व्यापक वृक्षारोपण अभियानों और बसामन मामा गौ अभयारण्य जैसी योजनाओं के माध्यम से पर्यावरण और गौ-संरक्षण को जनआंदोलन में बदला। उन्होंने गौ-सेवा को लाभकारी बनाने हेतु सामुदायिक सहभागिता पर बल दिया।
शिक्षा और संस्कृति के संवाहक
संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, मंदिरों और तीर्थ स्थलों का विकास, सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता – ये सभी पहल उनके शिक्षा एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने का प्रमाण हैं।
निष्कर्ष
राजेंद्र शुक्ल का जीवन एक समर्पित जनप्रतिनिधि की कहानी है – जिसने राजनीति को सेवा का माध्यम माना और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। उनके जन्मदिन के इस अवसर पर पूरा विंध्य और मध्यप्रदेश उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है और उनके नेतृत्व में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचते देखने की आशा कर रहा है।
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को।
लेखक – अनूप सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
(यह लेख राजेंद्र शुक्ल के सार्वजनिक जीवन, उपलब्धियों और जनसेवा कार्यों पर आधारित है।)
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