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बुजुर्गों के आशीष के आकाश में उड़ती है हमारी प्रगति की पतंग
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: 01 अक्टूबर
अजहर हाशमी कवि और साहित्यकार
बुजुर्ग (वृद्धजन) अर्थात सीनियर सिटीजन, परिवार रूपी पुस्तक के वे पन्ने (पृष्ठ) हैं, जिनको ध्यान और आदर के साथ पढऩे पर पुस्तक दुआ का दस्तावेज बन जाती है। एक और रूपक से कहूं तो यह कि परिवार रूपी जमीन में जब बुजुर्ग दुआ के बीज बोते हैं तब वे बीज पीढ़ी (संतान) के लिए अंकुरित और पल्लवित होकर ऐसा दरख्त बन जाते हैं जिनकी टहनियों पर सफलता के सदाबहार सुमन खिलते हैं।
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बुजुर्गों के आशीष के आकाश में उड़ती है हमारी प्रगति की पतंग
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: 01 अक्टूबर
बुजुर्ग (वृद्धजन) अर्थात सीनियर सिटीजन, परिवार रूपी पुस्तक के वे पन्ने (पृष्ठ) हैं, जिनको ध्यान और आदर के साथ पढऩे पर पुस्तक दुआ का दस्तावेज बन जाती है। एक और रूपक से कहूं तो यह कि परिवार रूपी जमीन में जब बुजुर्ग दुआ के बीज बोते हैं तब वे बीज पीढ़ी (संतान) के लिए अंकुरित और पल्लवित होकर ऐसा दरख्त बन जाते हैं जिनकी टहनियों पर सफलता के सदाबहार सुमन खिलते हैं।
