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आस्था और विकास का अटूट संगम नया "पांवन ब्रिज" : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
Opinion
6 अप्रैल 2025 को राम नवमी के पावन अवसर पर, जब हम भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव मना रहे होंगे तब हमारा देश भारत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में नए पांबन ब्रिज का उद्घाटन करेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस महत्वपूर्ण परियोजना- देश के पहले वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।
यह पुल भारत की प्रगति, नवाचार और संपर्क साधनों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। नया पांबन ब्रिज केवल एक भव्य संरचना नहीं, बल्कि नए भारत का प्रतीक है। यह ब्रिज परंपरा और आधुनिकता का संगम है जो विकसित भारत के उज्जवल भविष्य का वादा करता है।

परिवहन के नए युग की ओर : भारत का पहला समुद्री पुल पांबन ब्रिज का निर्माण 1911 में शुरू और 1914 में इसे यातायात के लिए खोल दिया गया था। तब यह भारत का एकमात्र समुद्री पुल था जो सन् 2010 में बान्द्रा-वर्ली समुद्रसेतु के खुलने तक भारत का सबसे लम्बा समुद्री सेतु रहा। अपनी सेवा समय के दौरान इस ब्रिज ने कई विकट परिस्थितियां देखी और उनका डटकर सामना किया। 1964 में आए एक चक्रवाती तूफान ने इस पुल को बहुत नुकसान पहुंचाया था बावजूद इसके ये समुद्र की लहरों के बीच अडिग खड़ा रहा। 21वीं सदी और बदलते भारत की परिवहन आवश्यकताओं ने पुराने पांबन ब्रिज के समक्ष कई तरह की नई चुनौतियाँ रख दी थीं। जिसे देखते हुए आधुनिक ट्रेनों और बड़े समुद्री जहाजों की आवश्यकताओं के अनुरूप एक नई संरचना की जरूरत महसूस की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में इस नए ब्रिज के निर्माण की आधारशिला रखी गई। नवाचार का जूनून और विकास की अभूतपूर्व गति के कारण मात्र 4 साल में समुद्र पर इस अद्भुत निर्माण को पूरा कर लिया गया।
पांबन ब्रिज की विशेषताएँ
2.08 किलोमीटर का ये भव्य संरचना पुराने पांबन ब्रिज से 3 मीटर अधिक ऊँचा बनाया गया है, ताकि छोटे जहाज सुगमता के साथ इसके नीचे से होकर गुजर सकें। इस पूरे ब्रिज को बनाने में 18.3 मीटर के 99 स्पैन का प्रयोग किया गया है साथ ही ब्रिज के मध्य में 72.5 मीटर का एक वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जिसे जरूरत पड़ने पर बड़े जहाजों के लिए 17 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है। इस ब्रिज में 333 पाइल्स और 101 पाइल कैप्स का इस्तेमाल कर मजबूत आधार के साथ दोहरी रेल लाइनों के लिए डिज़ाइन किया गया है। जिसपर भारी-भरकम मालगाड़ियों के साथ वंदे भारत जैसी तेज गति से चलने वाली अत्याधुनिक सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें भी बड़े ही आसानी से गुजर सकती है। साथ ही इसकी सतह को 58 वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए उत्कृष्ट सुरक्षा प्रणाली अपनाई गई है। इस ब्रिज के निर्माण के दौरान समुद्री तूफानों, तेज हवाओं और ज्वार-भाटाओं जैसी परिस्थितियों का भी खास ध्यान रखा गया है। पॉलिसिलोक्सेन पेंट, स्टेनलेस स्टील और फाइबर रिइंफोर्ड प्लास्टिक (FRP) के प्रयोग ने समुद्र के खारा पानी बीच होते हुए भी इसे लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखेगा।
निर्माण की उपलब्धियाँ
यह ब्रिज पुराने पुल की तुलना में अधिक टिकाऊ और अत्याधुनिक तकनीकों से बनाया गया है। इसका सब-स्ट्रक्चर भी तय समय सीमा से पहले ही पूरा कर लिया गया था, जो इसकी मजबूती को सुनिश्चित करता है। सटीक और अद्भुत इंजीनियरिंग के तहत इस पुल के लिए 99 स्पैन को एकल लाइन हेतु निर्मित कर उत्कृष्टता के साथ स्थापित किया गया है। इसकी निर्माण तकनीक और डिज़ाइन इसे केवल दक्षिण भारत में ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संरचना बनाते हैं।

डिजाइन में तकनीकी का समावेश
इस पुल का डिजाइन जहां इंटरनेशनल कंसल्टेंट TYPSA द्वारा बनाया गया है तो वही ॥ चेन्नई व ॥ बॉम्बे द्वारा डिजाइन को सत्यापित किया गया है। उच्च ग्रेड सामग्री और स्टेनलेस स्टील के प्रयोग ने इसे एक दृढ़, सुरक्षित और कम रखरखाव वाली संरचना बना दिया है। ब्रिज के केंद्र में 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जिसे जहाजों के आकार के हिसाब से ऊपर-नीचे किया जा सकता है।

आस्था और प्रगति का संगम
पांबन ब्रिज का भगवान राम और भगवान शिव के साथ भी सीधा संबंध है। ये ब्रिज जिस द्वीप रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ता है, उसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां स्थित रामेश्वरम मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिलिंगों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्रीराम लंका पर चढाई करने जा रहे थे, तब उन्होंने इस ज्योतिलिंग की स्थापना की थी और भगवान शिव की पूजा की थी। पांबन ब्रिज से होकर गुजरने वाला मार्ग भगवान राम की लंका यात्रा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, जिससे यह धार्मिक रूप से और भी विशेष हो जाता है। रामायण के अनुसार, भगवान राम और उनकी वानर सेना ने लंका जाने के लिए रामसेतु का निर्माण किया था, जो वर्तमान पांबन ब्रिज के पास स्थित है। ऐसे में नया पांबन ब्रिज श्रद्धालुओं के लिए रामेश्वरम की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाएगा। यह पुल आधुनिक तकनीक से निर्मित है, जिससे श्रद्धालु बिना किसी बाधा के भगवान शिव और भगवान राम से जुड़े स्थलों के दर्शन कर सकते हैं।
एक गौरवशाली उपलब्धि "यह शानदार समुद्री पुल भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे ब्रिज है और यह उस प्रतिष्ठित 105 साल पुराने पुल की जगह लेने वाला है, जिसने पीढ़ियों तक इस क्षेत्र की सेवा की है।"
-अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
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आस्था और विकास का अटूट संगम नया "पांवन ब्रिज" : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
Opinion
यह पुल भारत की प्रगति, नवाचार और संपर्क साधनों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। नया पांबन ब्रिज केवल एक भव्य संरचना नहीं, बल्कि नए भारत का प्रतीक है। यह ब्रिज परंपरा और आधुनिकता का संगम है जो विकसित भारत के उज्जवल भविष्य का वादा करता है।

परिवहन के नए युग की ओर : भारत का पहला समुद्री पुल पांबन ब्रिज का निर्माण 1911 में शुरू और 1914 में इसे यातायात के लिए खोल दिया गया था। तब यह भारत का एकमात्र समुद्री पुल था जो सन् 2010 में बान्द्रा-वर्ली समुद्रसेतु के खुलने तक भारत का सबसे लम्बा समुद्री सेतु रहा। अपनी सेवा समय के दौरान इस ब्रिज ने कई विकट परिस्थितियां देखी और उनका डटकर सामना किया। 1964 में आए एक चक्रवाती तूफान ने इस पुल को बहुत नुकसान पहुंचाया था बावजूद इसके ये समुद्र की लहरों के बीच अडिग खड़ा रहा। 21वीं सदी और बदलते भारत की परिवहन आवश्यकताओं ने पुराने पांबन ब्रिज के समक्ष कई तरह की नई चुनौतियाँ रख दी थीं। जिसे देखते हुए आधुनिक ट्रेनों और बड़े समुद्री जहाजों की आवश्यकताओं के अनुरूप एक नई संरचना की जरूरत महसूस की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में इस नए ब्रिज के निर्माण की आधारशिला रखी गई। नवाचार का जूनून और विकास की अभूतपूर्व गति के कारण मात्र 4 साल में समुद्र पर इस अद्भुत निर्माण को पूरा कर लिया गया।
पांबन ब्रिज की विशेषताएँ
2.08 किलोमीटर का ये भव्य संरचना पुराने पांबन ब्रिज से 3 मीटर अधिक ऊँचा बनाया गया है, ताकि छोटे जहाज सुगमता के साथ इसके नीचे से होकर गुजर सकें। इस पूरे ब्रिज को बनाने में 18.3 मीटर के 99 स्पैन का प्रयोग किया गया है साथ ही ब्रिज के मध्य में 72.5 मीटर का एक वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जिसे जरूरत पड़ने पर बड़े जहाजों के लिए 17 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है। इस ब्रिज में 333 पाइल्स और 101 पाइल कैप्स का इस्तेमाल कर मजबूत आधार के साथ दोहरी रेल लाइनों के लिए डिज़ाइन किया गया है। जिसपर भारी-भरकम मालगाड़ियों के साथ वंदे भारत जैसी तेज गति से चलने वाली अत्याधुनिक सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें भी बड़े ही आसानी से गुजर सकती है। साथ ही इसकी सतह को 58 वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए उत्कृष्ट सुरक्षा प्रणाली अपनाई गई है। इस ब्रिज के निर्माण के दौरान समुद्री तूफानों, तेज हवाओं और ज्वार-भाटाओं जैसी परिस्थितियों का भी खास ध्यान रखा गया है। पॉलिसिलोक्सेन पेंट, स्टेनलेस स्टील और फाइबर रिइंफोर्ड प्लास्टिक (FRP) के प्रयोग ने समुद्र के खारा पानी बीच होते हुए भी इसे लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखेगा।
निर्माण की उपलब्धियाँ
यह ब्रिज पुराने पुल की तुलना में अधिक टिकाऊ और अत्याधुनिक तकनीकों से बनाया गया है। इसका सब-स्ट्रक्चर भी तय समय सीमा से पहले ही पूरा कर लिया गया था, जो इसकी मजबूती को सुनिश्चित करता है। सटीक और अद्भुत इंजीनियरिंग के तहत इस पुल के लिए 99 स्पैन को एकल लाइन हेतु निर्मित कर उत्कृष्टता के साथ स्थापित किया गया है। इसकी निर्माण तकनीक और डिज़ाइन इसे केवल दक्षिण भारत में ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संरचना बनाते हैं।

डिजाइन में तकनीकी का समावेश
इस पुल का डिजाइन जहां इंटरनेशनल कंसल्टेंट TYPSA द्वारा बनाया गया है तो वही ॥ चेन्नई व ॥ बॉम्बे द्वारा डिजाइन को सत्यापित किया गया है। उच्च ग्रेड सामग्री और स्टेनलेस स्टील के प्रयोग ने इसे एक दृढ़, सुरक्षित और कम रखरखाव वाली संरचना बना दिया है। ब्रिज के केंद्र में 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जिसे जहाजों के आकार के हिसाब से ऊपर-नीचे किया जा सकता है।

आस्था और प्रगति का संगम
पांबन ब्रिज का भगवान राम और भगवान शिव के साथ भी सीधा संबंध है। ये ब्रिज जिस द्वीप रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ता है, उसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां स्थित रामेश्वरम मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिलिंगों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्रीराम लंका पर चढाई करने जा रहे थे, तब उन्होंने इस ज्योतिलिंग की स्थापना की थी और भगवान शिव की पूजा की थी। पांबन ब्रिज से होकर गुजरने वाला मार्ग भगवान राम की लंका यात्रा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, जिससे यह धार्मिक रूप से और भी विशेष हो जाता है। रामायण के अनुसार, भगवान राम और उनकी वानर सेना ने लंका जाने के लिए रामसेतु का निर्माण किया था, जो वर्तमान पांबन ब्रिज के पास स्थित है। ऐसे में नया पांबन ब्रिज श्रद्धालुओं के लिए रामेश्वरम की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाएगा। यह पुल आधुनिक तकनीक से निर्मित है, जिससे श्रद्धालु बिना किसी बाधा के भगवान शिव और भगवान राम से जुड़े स्थलों के दर्शन कर सकते हैं।
एक गौरवशाली उपलब्धि "यह शानदार समुद्री पुल भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे ब्रिज है और यह उस प्रतिष्ठित 105 साल पुराने पुल की जगह लेने वाला है, जिसने पीढ़ियों तक इस क्षेत्र की सेवा की है।"
-अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
