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महालक्ष्मी व्रत का आखिरी दिन आज, जानें तिथि, मुहूर्त से लेकर पारण तक सबकुछ
Jagran, Desk
हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का खास महत्व माना जाता है. सोलह दिनों के महालक्ष्मी व्रत का समापन अश्विन मास की अष्टमी तिथि के दिन होने जा रहा है. इसे गजा लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें गज पर बैठी माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है.
हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. जो धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है. 16 दिनों तक चलने वाले महालक्ष्मी पर्व का मंगलवार को समापन होने जा रहा है. ऐसी मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बरसती है. महालक्ष्मी व्रत में विधि-विधान से पूजन करने के लिए सुबह के समय स्नानादि कार्यों से निवृत होकर माता की पूजा की जाती है. महालक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता
है.
महालक्ष्मी व्रत तिथि
पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत पर अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 24 सितंबर की शाम 5 बजकर 45 मिनट पर शुरू हो जाएगा. ऐसे में यह व्रत 24 सितंबर को ही रखा जाएगा, चूंकि महालक्ष्मी व्रत की सप्तमी तिथि 25 सितंबर की शाम 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगी. ऐसे में कुछ महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार इस दिन भी व्रत रख सकती हैं.
महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि
- महालक्ष्मी व्रत के दिन माता लक्ष्मी की पूजा में सबसे पहले पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाएं.
- पूजा के स्थान पर मां लक्ष्मी की गज पर बैठी मूर्ति स्थापित करें.
- पूजा में याद से श्रीयंत्र जरूर रखें. ये मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है.
- सोने चांदी के सिक्के और फल-फूल और माता का श्रृंगार करें.
- एक साफ स्वच्छ कलश में पानी भरकर पूजा स्थल पर रखें.
- इस कलश में पान का पत्ता भी डाल दें और फिर उस पर नारियल रखें.
- मालपुए को मिठास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
- मालपुआ बनाने के लिए मैदा और खोए से दो अलग-अलग बैटर तैयार करके चढ़ाएं.
- पूजा में मां लक्ष्मी के साथ मां लक्ष्मी के गजलक्ष्मी रूप की पूजा करें.
- इस पूजा में हाथी भी पूजा में रखा जाता है. इस पूजा में कमलगट्टे की माला भी रखी जाती है.
- इस पूजा में प्रसाद के तौर पर माता के लिए खीर बनाई जाती है.
- पूजा के बाद 16 दीपक भी जलाए जाते हैं. अगले दिन व्रत खोला जाता है.
- फल, पुष्प, अक्षत से पूजा करें. चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का उद्यापन करें.
महालक्ष्मी व्रत मंत्र जाप
“ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करते हुए मन को एकाग्र करें.
महालक्ष्मी व्रत पर क्या करे
- शुद्धता बनाए रखें: व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध रहें.
- सात्विक भोजन: सात्विक भोजन का सेवन करें, जैसे फल, सब्जियां, दही आदि.
- मंत्र जाप: महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें.
- पूजा: प्रतिदिन माता लक्ष्मी की पूजा करें.
- दान: जरूरतमंदों को दान करें.
- सत्य बोलें: सत्य बोलना और सदाचरण का पालन करना.
- ध्यान: ध्यान और योग करें, अपने आसपास की जगह को साफ-सुथरा रखें.
महालक्ष्मी व्रत पर क्या न करें
- अशुद्ध भोजन: मांस, मछली, अंडे आदि का सेवन न करें.
- हिंसा: किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें.
- झूठ बोलना: झूठ बोलना वर्जित है.
- क्रोध: क्रोध, ईर्ष्या और लोभ से दूर रहें.
- नकारात्मक विचार: नकारात्मक विचारों को मन में न लाएं.
- आलस्य: आलसी न बनें, नियमित रूप से काम करते रहें.
- अनैतिक कार्य: कोई भी अनैतिक कार्य न करें.
महालक्ष्मी व्रत कथा
एक गांव में एक गरीब ब्राह्मणी रहती थी. वह नियमित भगवान विष्णु की पूजा करती थी. भक्त की श्रद्धा-भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णुजी ने उसे दर्शन दिए और भक्त से वरदान मांगने को कहा. ब्राह्मणी ने कहा कि, मैं बहुत गरीब हूं मेरी इच्छा है कि मेरे घर पर मां लक्ष्मी का वास रहे. विष्णुजी ने ब्राह्मणी को एक उपाय बताया, जिससे कि उसके घर में मां लक्ष्मी का आगमन हो.
भगवान विष्णु ने बताया कि, तुम्हारे घर से कुछ दूर एक मंदिर है वहां एक स्त्री आकर उपले थापती है. तुम उस स्त्री को अपने घर पर आमंत्रित करो. क्योंकि वही मां लक्ष्मी है. ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया और उस स्त्री को अपने घर आने का निमंत्रण दिया. उस स्त्री ने ब्राह्मणी से कहा कि वह 16 दिनों तक मां लक्ष्मी की पूजा करें.
ब्राह्मणी ने 16 दिनों तक मां लक्ष्मी की उपासना की. इसके बाद मां लक्ष्मी ने गरीब ब्राह्मणी के घर निवास किया. इसके बाद उसका घर धन-धान्य से भर गया. मान्यता है कि, तभी से 16 दिनों तक चलने वाले महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हुई. जो व्यक्ति 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत रखकर लक्ष्मी जी की उपासना करता है मां लक्ष्मी उससे प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.
महालक्ष्मी व्रत में क्या खाएं
- फल: सभी प्रकार के फल जैसे केला, सेब, अंगूर, संतरा आदि.
- सब्जियां: उबली हुई या भाप में पकी हुई सब्जियां जैसे आलू, गाजर, बीन्स आदि.
- दूध और दूध से बने पदार्थ: दूध, दही, पनीर, मठ्ठा आदि.
- सूखा फल: बादाम, काजू, किशमिश आदि.
- कुट्टू का आटा: कुट्टू के आटे से बना ढोकला, पकौड़े आदि.
- सत्तू: सत्तू का शरबत.
- फलाहार: फल, सूखा फल और मेवे से बना फलाहार.
महालक्ष्मी व्रत में क्या न खाएं
- अनाज: चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि.
- दालें: सभी प्रकार की दालें.
- मांस: मांस, मछली, अंडे आदि.
- प्याज और लहसुन: प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित है.
- तली हुई चीजें: तली हुई चीजें जैसे समोसे, पकौड़े आदि.
- मसालेदार भोजन: बहुत अधिक मसालेदार भोजन से बचना चाहिए.
- अचार और पापड़: अचार और पापड़ का सेवन नहीं करना चाहिए.
महालक्ष्मी व्रत का महत्व
हिन्दू धर्म में महालक्ष्मी व्रत पूरे 16 दिनों तक रखा जाता है. हालांकि यह निर्जला व्रत नहीं होता है, लेकिन अन्न ग्रहण करने की मनाही होती है. आप इस व्रत में फलाहार कर सकते हैं. 16वें दिन व्रत का उद्यापन किया जाता है. यदि आप 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत करने में असमर्थ हैं तो शुरुआत के 3 या आखिर के 3 व्रत रख सकते हैं. इससे लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली बनी रहती है.
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महालक्ष्मी व्रत का आखिरी दिन आज, जानें तिथि, मुहूर्त से लेकर पारण तक सबकुछ
Jagran, Desk
हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. जो धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है. 16 दिनों तक चलने वाले महालक्ष्मी पर्व का मंगलवार को समापन होने जा रहा है. ऐसी मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बरसती है. महालक्ष्मी व्रत में विधि-विधान से पूजन करने के लिए सुबह के समय स्नानादि कार्यों से निवृत होकर माता की पूजा की जाती है. महालक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता
है.
महालक्ष्मी व्रत तिथि
पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत पर अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 24 सितंबर की शाम 5 बजकर 45 मिनट पर शुरू हो जाएगा. ऐसे में यह व्रत 24 सितंबर को ही रखा जाएगा, चूंकि महालक्ष्मी व्रत की सप्तमी तिथि 25 सितंबर की शाम 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगी. ऐसे में कुछ महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार इस दिन भी व्रत रख सकती हैं.
महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि
- महालक्ष्मी व्रत के दिन माता लक्ष्मी की पूजा में सबसे पहले पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाएं.
- पूजा के स्थान पर मां लक्ष्मी की गज पर बैठी मूर्ति स्थापित करें.
- पूजा में याद से श्रीयंत्र जरूर रखें. ये मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है.
- सोने चांदी के सिक्के और फल-फूल और माता का श्रृंगार करें.
- एक साफ स्वच्छ कलश में पानी भरकर पूजा स्थल पर रखें.
- इस कलश में पान का पत्ता भी डाल दें और फिर उस पर नारियल रखें.
- मालपुए को मिठास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
- मालपुआ बनाने के लिए मैदा और खोए से दो अलग-अलग बैटर तैयार करके चढ़ाएं.
- पूजा में मां लक्ष्मी के साथ मां लक्ष्मी के गजलक्ष्मी रूप की पूजा करें.
- इस पूजा में हाथी भी पूजा में रखा जाता है. इस पूजा में कमलगट्टे की माला भी रखी जाती है.
- इस पूजा में प्रसाद के तौर पर माता के लिए खीर बनाई जाती है.
- पूजा के बाद 16 दीपक भी जलाए जाते हैं. अगले दिन व्रत खोला जाता है.
- फल, पुष्प, अक्षत से पूजा करें. चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का उद्यापन करें.
महालक्ष्मी व्रत मंत्र जाप
“ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करते हुए मन को एकाग्र करें.
महालक्ष्मी व्रत पर क्या करे
- शुद्धता बनाए रखें: व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध रहें.
- सात्विक भोजन: सात्विक भोजन का सेवन करें, जैसे फल, सब्जियां, दही आदि.
- मंत्र जाप: महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें.
- पूजा: प्रतिदिन माता लक्ष्मी की पूजा करें.
- दान: जरूरतमंदों को दान करें.
- सत्य बोलें: सत्य बोलना और सदाचरण का पालन करना.
- ध्यान: ध्यान और योग करें, अपने आसपास की जगह को साफ-सुथरा रखें.
महालक्ष्मी व्रत पर क्या न करें
- अशुद्ध भोजन: मांस, मछली, अंडे आदि का सेवन न करें.
- हिंसा: किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें.
- झूठ बोलना: झूठ बोलना वर्जित है.
- क्रोध: क्रोध, ईर्ष्या और लोभ से दूर रहें.
- नकारात्मक विचार: नकारात्मक विचारों को मन में न लाएं.
- आलस्य: आलसी न बनें, नियमित रूप से काम करते रहें.
- अनैतिक कार्य: कोई भी अनैतिक कार्य न करें.
महालक्ष्मी व्रत कथा
एक गांव में एक गरीब ब्राह्मणी रहती थी. वह नियमित भगवान विष्णु की पूजा करती थी. भक्त की श्रद्धा-भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णुजी ने उसे दर्शन दिए और भक्त से वरदान मांगने को कहा. ब्राह्मणी ने कहा कि, मैं बहुत गरीब हूं मेरी इच्छा है कि मेरे घर पर मां लक्ष्मी का वास रहे. विष्णुजी ने ब्राह्मणी को एक उपाय बताया, जिससे कि उसके घर में मां लक्ष्मी का आगमन हो.
भगवान विष्णु ने बताया कि, तुम्हारे घर से कुछ दूर एक मंदिर है वहां एक स्त्री आकर उपले थापती है. तुम उस स्त्री को अपने घर पर आमंत्रित करो. क्योंकि वही मां लक्ष्मी है. ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया और उस स्त्री को अपने घर आने का निमंत्रण दिया. उस स्त्री ने ब्राह्मणी से कहा कि वह 16 दिनों तक मां लक्ष्मी की पूजा करें.
ब्राह्मणी ने 16 दिनों तक मां लक्ष्मी की उपासना की. इसके बाद मां लक्ष्मी ने गरीब ब्राह्मणी के घर निवास किया. इसके बाद उसका घर धन-धान्य से भर गया. मान्यता है कि, तभी से 16 दिनों तक चलने वाले महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हुई. जो व्यक्ति 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत रखकर लक्ष्मी जी की उपासना करता है मां लक्ष्मी उससे प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.
महालक्ष्मी व्रत में क्या खाएं
- फल: सभी प्रकार के फल जैसे केला, सेब, अंगूर, संतरा आदि.
- सब्जियां: उबली हुई या भाप में पकी हुई सब्जियां जैसे आलू, गाजर, बीन्स आदि.
- दूध और दूध से बने पदार्थ: दूध, दही, पनीर, मठ्ठा आदि.
- सूखा फल: बादाम, काजू, किशमिश आदि.
- कुट्टू का आटा: कुट्टू के आटे से बना ढोकला, पकौड़े आदि.
- सत्तू: सत्तू का शरबत.
- फलाहार: फल, सूखा फल और मेवे से बना फलाहार.
महालक्ष्मी व्रत में क्या न खाएं
- अनाज: चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि.
- दालें: सभी प्रकार की दालें.
- मांस: मांस, मछली, अंडे आदि.
- प्याज और लहसुन: प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित है.
- तली हुई चीजें: तली हुई चीजें जैसे समोसे, पकौड़े आदि.
- मसालेदार भोजन: बहुत अधिक मसालेदार भोजन से बचना चाहिए.
- अचार और पापड़: अचार और पापड़ का सेवन नहीं करना चाहिए.
महालक्ष्मी व्रत का महत्व
हिन्दू धर्म में महालक्ष्मी व्रत पूरे 16 दिनों तक रखा जाता है. हालांकि यह निर्जला व्रत नहीं होता है, लेकिन अन्न ग्रहण करने की मनाही होती है. आप इस व्रत में फलाहार कर सकते हैं. 16वें दिन व्रत का उद्यापन किया जाता है. यदि आप 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत करने में असमर्थ हैं तो शुरुआत के 3 या आखिर के 3 व्रत रख सकते हैं. इससे लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली बनी रहती है.
