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- इन 5 शुभ जगहों पर कर सकते हैं पितरों का श्राद्ध, जानें गरुड़ पुराण में बताए गए श्राद्ध के नियम
इन 5 शुभ जगहों पर कर सकते हैं पितरों का श्राद्ध, जानें गरुड़ पुराण में बताए गए श्राद्ध के नियम
Jagran, Desk
पितरों का श्राद्ध कहां करना चाहिए: गरुड़ पुराण के अनुसार पितरों का श्राद्ध करने के लिए कुछ जगहों को शुभ माना गया है। पितरों का श्राद्ध करने के लिए घर की दक्षिण दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। श्राद्ध से जुड़े नियमों के अनुसार जरूरी नहीं कि आप किसी घाट पर ही जाकर श्राद्ध करें बल्कि आप घर में भी श्राद्ध कर सकते हैं। घर की दक्षिण दिशा में बैठकर विधि-विधान के साथ श्राद्ध किया जा सकता है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि पितरों का श्राद्ध करने के लिए शुभ जगह।
पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए जो मनुष्य तर्पण करता है, उसे पितृदोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन की सभी बाधाएं भी दूर होती हैं। पितरों का श्राद्ध या तर्पण करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। जैसे, पितरों का श्राद्ध कहां-कहां किया जा सकता है, इससे भी कुछ नियम जुड़े हुए हैं। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
घर की इस दिशा में करें श्राद्ध
पितृपक्ष में अगर आप अपने पितरों का तर्पण घर पर कर रहे हैं, तो आपको दक्षिण दिशा में मुंह करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। दक्षिण दिशा यमलोक की दिशा मानी जाती है, इसलिए इस दिशा में ही तर्पण करना चाहिए क्योंकि इस दिशा में किया गया श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है।
नदी के तट पर कर सकते हैं श्राद्ध
बरगद के पेड़ के नीचे भी कर सकते हैं श्राद्ध
पितृपक्ष में अगर आप अपने पितरों का तर्पण घर पर कर रहे हैं, तो आपको दक्षिण दिशा में मुंह करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। दक्षिण दिशा यमलोक की दिशा मानी जाती है, इसलिए इस दिशा में ही तर्पण करना चाहिए क्योंकि इस दिशा में किया गया श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है।
गौशाला में भी कर सकते हैं श्राद्ध
गरुड़ पुराण के अनुसार गौशाला में भी आप श्राद्ध कर सकते हैं। गौशाला को गोबर से लीपने के बाद पूरी विधि-विधान के साथ इस पर पूजा का सामान रखें। फिर पूरे विधि-विधान के साथ गौशाला में दक्षिण दिशा की तरफ बैठकर पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं।
जंगल में बैठकर भी कर सकते हैं श्राद्ध
जंगल को हमेशा से पवित्र माना जाता है क्योंकि वन या जंगल प्रकृति का मूल भाग रहे हैं। जंगल में प्रकृति की गोद में बैठकर भी कोई मनुष्य अपने पितरों का श्राद्ध कर सकता है। जंगल में उपलब्ध फल, फूल, जल आदि से भी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।
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इन 5 शुभ जगहों पर कर सकते हैं पितरों का श्राद्ध, जानें गरुड़ पुराण में बताए गए श्राद्ध के नियम
Jagran, Desk
पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए जो मनुष्य तर्पण करता है, उसे पितृदोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन की सभी बाधाएं भी दूर होती हैं। पितरों का श्राद्ध या तर्पण करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। जैसे, पितरों का श्राद्ध कहां-कहां किया जा सकता है, इससे भी कुछ नियम जुड़े हुए हैं। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
घर की इस दिशा में करें श्राद्ध
पितृपक्ष में अगर आप अपने पितरों का तर्पण घर पर कर रहे हैं, तो आपको दक्षिण दिशा में मुंह करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। दक्षिण दिशा यमलोक की दिशा मानी जाती है, इसलिए इस दिशा में ही तर्पण करना चाहिए क्योंकि इस दिशा में किया गया श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है।
नदी के तट पर कर सकते हैं श्राद्ध
बरगद के पेड़ के नीचे भी कर सकते हैं श्राद्ध
पितृपक्ष में अगर आप अपने पितरों का तर्पण घर पर कर रहे हैं, तो आपको दक्षिण दिशा में मुंह करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। दक्षिण दिशा यमलोक की दिशा मानी जाती है, इसलिए इस दिशा में ही तर्पण करना चाहिए क्योंकि इस दिशा में किया गया श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है।
गौशाला में भी कर सकते हैं श्राद्ध
गरुड़ पुराण के अनुसार गौशाला में भी आप श्राद्ध कर सकते हैं। गौशाला को गोबर से लीपने के बाद पूरी विधि-विधान के साथ इस पर पूजा का सामान रखें। फिर पूरे विधि-विधान के साथ गौशाला में दक्षिण दिशा की तरफ बैठकर पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं।
जंगल में बैठकर भी कर सकते हैं श्राद्ध
जंगल को हमेशा से पवित्र माना जाता है क्योंकि वन या जंगल प्रकृति का मूल भाग रहे हैं। जंगल में प्रकृति की गोद में बैठकर भी कोई मनुष्य अपने पितरों का श्राद्ध कर सकता है। जंगल में उपलब्ध फल, फूल, जल आदि से भी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।
