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12 दिसंबर महाकाल भस्म आरती: हनुमान स्वरूप में भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार
Ujjain, MP
पौष माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, शुक्रवार की अलसुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दिव्य भस्म आरती का आयोजन अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद भगवान महाकाल का विशेष हनुमान स्वरूप में आकर्षक श्रृंगार किया गया। अल सुबह गर्भगृह में उठती मंत्रध्वनि और भोग-आरती की सुगंध ने पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
दिव्य श्रृंगार और पंचामृत अभिषेक
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया।
इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक और—
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दूध
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दही
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घी
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शहद
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फलों के रस
से तैयार पंचामृत द्वारा अभिषेक संपन्न हुआ।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाई गई और हरिओम का जल अर्पित कर भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई, जो महाकाल की विशेष महिमा का प्रतीक है।
रजत आभूषणों से अलंकरण
भस्म रमाने के बाद भगवान को—
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शेषनाग का रजत मुकुट,
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रजत की मुण्डमाल,
-
रुद्राक्ष की माला
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और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं।
इसके साथ हनुमान स्वरूप का दिव्य श्रृंगार पूरा किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

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12 दिसंबर महाकाल भस्म आरती: हनुमान स्वरूप में भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार
Ujjain, MP
पौष माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, शुक्रवार की अलसुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दिव्य भस्म आरती का आयोजन अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद भगवान महाकाल का विशेष हनुमान स्वरूप में आकर्षक श्रृंगार किया गया। अल सुबह गर्भगृह में उठती मंत्रध्वनि और भोग-आरती की सुगंध ने पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
दिव्य श्रृंगार और पंचामृत अभिषेक
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया।
इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक और—
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दूध
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दही
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घी
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शहद
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फलों के रस
से तैयार पंचामृत द्वारा अभिषेक संपन्न हुआ।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाई गई और हरिओम का जल अर्पित कर भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई, जो महाकाल की विशेष महिमा का प्रतीक है।
रजत आभूषणों से अलंकरण
भस्म रमाने के बाद भगवान को—
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शेषनाग का रजत मुकुट,
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रजत की मुण्डमाल,
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रुद्राक्ष की माला
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और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं।
इसके साथ हनुमान स्वरूप का दिव्य श्रृंगार पूरा किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

