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23 या 24 फरवरी…कब रखा जाएगा विजया एकादशी का व्रत? जानें सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
Dharm Desk
एकादशी का व्रत हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. कहते हैं इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. वहीं फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत किया जाता है. अगर आपको भी इस तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है तो आइए इस दूर करते हैं.
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालन हार माना जाता है. कहते हैं इनकी सच्चे मन से पूजा करने वाले को बैकुंठ की प्राप्ति होती है. हर माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को श्री हरि की पूजा की जाती है. कहते है यह तिथि भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. वहीं फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा और व्रत का पालन करने से व्यक्ति को जीवन की तमाम परेशानियों से छुटकारा मिलता है.
विजया एकादशी कब हैं?
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 24 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस बार विजया एकादशी का व्रत सोमवार 24 फरवरी को रखा जाएगा.
विजया एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी के दिन का मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक
- विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक
विजया एकादशी पारण का समय
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि पर किया जाता है. यानी विजया एकादशी व्रत का पारण 25 फरवरी को सुबह 6 बजकर 50 मिनट से लेकर 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. इस दौरान व्रत करने वाले लोग पारण कर सकते हैं.
विजया एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत को रखने से व्यक्ति को हर जगह विजय मिलती है, सभी शुभ कार्य पूर्ण होता है. भगवान राम ने लंका विजय करने के लिए बकदाल्भ्य मुनि के कहने पर समुद्र के तट पर विजया एकादशी का व्रत किया था. जिसके प्रभाव से रावण का वध हुआ और भगवान राम ने लंका पर जीत हासिल हुई थी. मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है. सभी जरूरी कार्य पूरे होते हैं. वहीं इस दिन दान- पुण्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. dainikjagranmpcg.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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23 या 24 फरवरी…कब रखा जाएगा विजया एकादशी का व्रत? जानें सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
Dharm Desk
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालन हार माना जाता है. कहते हैं इनकी सच्चे मन से पूजा करने वाले को बैकुंठ की प्राप्ति होती है. हर माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को श्री हरि की पूजा की जाती है. कहते है यह तिथि भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. वहीं फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा और व्रत का पालन करने से व्यक्ति को जीवन की तमाम परेशानियों से छुटकारा मिलता है.
विजया एकादशी कब हैं?
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 24 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस बार विजया एकादशी का व्रत सोमवार 24 फरवरी को रखा जाएगा.
विजया एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी के दिन का मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक
- विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक
विजया एकादशी पारण का समय
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि पर किया जाता है. यानी विजया एकादशी व्रत का पारण 25 फरवरी को सुबह 6 बजकर 50 मिनट से लेकर 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. इस दौरान व्रत करने वाले लोग पारण कर सकते हैं.
विजया एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत को रखने से व्यक्ति को हर जगह विजय मिलती है, सभी शुभ कार्य पूर्ण होता है. भगवान राम ने लंका विजय करने के लिए बकदाल्भ्य मुनि के कहने पर समुद्र के तट पर विजया एकादशी का व्रत किया था. जिसके प्रभाव से रावण का वध हुआ और भगवान राम ने लंका पर जीत हासिल हुई थी. मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है. सभी जरूरी कार्य पूरे होते हैं. वहीं इस दिन दान- पुण्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. dainikjagranmpcg.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.
