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30 सितंबर 2025 पंचांग: दुर्गा अष्टमी पर संधि पूजा का महत्व, जानें राहुकाल और शुभ समय
DHARAM DESK
आज आश्विन माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे दुर्गा अष्टमी के रूप में जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। साथ ही पितृ तर्पण और पितृ पूजन का भी विधान है। हालांकि, अधिकतर कार्यों के लिए यह तिथि अशुभ मानी जाती है। आज संधि पूजा का विशेष महत्व है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष अष्टमी
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दिन: मंगलवार
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तिथि: शुक्ल पक्ष अष्टमी
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योग: शोभन
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नक्षत्र: मूल
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करण: बव
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: कन्या
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सूर्योदय: सुबह 06:30 बजे
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सूर्यास्त: शाम 06:28 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 01:42 बजे
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चंद्रास्त: रात 11:52 बजे
राहुकाल और अशुभ मुहूर्त
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राहुकाल: दोपहर 3:28 बजे से 4:58 बजे तक
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यमगंड: सुबह 10:59 बजे से 12:29 बजे तक
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मूल नक्षत्र में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। यह नक्षत्र धनु राशि में 0° से 13°20’ तक फैला होता है और इसका शासक ग्रह केतु है। इस नक्षत्र में केवल खंडहर तोड़ने, अलगाव या तांत्रिक कार्यों को ही शुभ माना गया है।
संधि पूजा का महत्व
दुर्गा अष्टमी पर की जाने वाली संधि पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा का ध्यान और पूजन करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और पाप नष्ट होते हैं।
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30 सितंबर 2025 पंचांग: दुर्गा अष्टमी पर संधि पूजा का महत्व, जानें राहुकाल और शुभ समय
DHARAM DESK
आज आश्विन माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे दुर्गा अष्टमी के रूप में जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। साथ ही पितृ तर्पण और पितृ पूजन का भी विधान है। हालांकि, अधिकतर कार्यों के लिए यह तिथि अशुभ मानी जाती है। आज संधि पूजा का विशेष महत्व है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष अष्टमी
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दिन: मंगलवार
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तिथि: शुक्ल पक्ष अष्टमी
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योग: शोभन
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नक्षत्र: मूल
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करण: बव
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: कन्या
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सूर्योदय: सुबह 06:30 बजे
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सूर्यास्त: शाम 06:28 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 01:42 बजे
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चंद्रास्त: रात 11:52 बजे
राहुकाल और अशुभ मुहूर्त
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राहुकाल: दोपहर 3:28 बजे से 4:58 बजे तक
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यमगंड: सुबह 10:59 बजे से 12:29 बजे तक
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मूल नक्षत्र में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। यह नक्षत्र धनु राशि में 0° से 13°20’ तक फैला होता है और इसका शासक ग्रह केतु है। इस नक्षत्र में केवल खंडहर तोड़ने, अलगाव या तांत्रिक कार्यों को ही शुभ माना गया है।
संधि पूजा का महत्व
दुर्गा अष्टमी पर की जाने वाली संधि पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा का ध्यान और पूजन करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और पाप नष्ट होते हैं।
