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पंचांग: आज सर्वार्थ सिद्धि योग, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय
DHARAM DESK
रविवार, 28 सितंबर 2025 आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो कि खरीदारी और विशेष कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। खासकर जमीन-जायदाद, नया घर या आभूषण खरीदने वालों के लिए यह तिथि अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष षष्ठी
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वार: रविवार
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योग: आयुष्मान
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नक्षत्र: ज्येष्ठा
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करण: तैतिल
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चंद्र राशि: वृश्चिक
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सूर्य राशि: कन्या
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सूर्योदय: प्रातः 06:29 बजे
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सूर्यास्त: सायं 06:30 बजे
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चंद्रोदय: पूर्वाह्न 11:57 बजे
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चंद्रास्त: रात्रि 10:02 बजे
राहुकाल व अन्य वर्जित समय
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राहुकाल: शाम 05:00 से 06:30 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 12:30 से 02:00 बजे तक
इन कालखंडों में शुभ कार्य करना टालना उचित माना गया है।
ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव
आज चंद्रमा वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेंगे। ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध और देवता इंद्र माने जाते हैं। यह नक्षत्र सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए वर्जित होता है, लेकिन युद्ध-संबंधी योजनाओं, तांत्रिक साधना, विवाद या बहस की तैयारी जैसे कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है।
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पंचांग: आज सर्वार्थ सिद्धि योग, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय
DHARAM DESK
रविवार, 28 सितंबर 2025 आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो कि खरीदारी और विशेष कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। खासकर जमीन-जायदाद, नया घर या आभूषण खरीदने वालों के लिए यह तिथि अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष षष्ठी
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वार: रविवार
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योग: आयुष्मान
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नक्षत्र: ज्येष्ठा
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करण: तैतिल
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चंद्र राशि: वृश्चिक
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सूर्य राशि: कन्या
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सूर्योदय: प्रातः 06:29 बजे
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सूर्यास्त: सायं 06:30 बजे
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चंद्रोदय: पूर्वाह्न 11:57 बजे
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चंद्रास्त: रात्रि 10:02 बजे
राहुकाल व अन्य वर्जित समय
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राहुकाल: शाम 05:00 से 06:30 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 12:30 से 02:00 बजे तक
इन कालखंडों में शुभ कार्य करना टालना उचित माना गया है।
ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव
आज चंद्रमा वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेंगे। ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध और देवता इंद्र माने जाते हैं। यह नक्षत्र सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए वर्जित होता है, लेकिन युद्ध-संबंधी योजनाओं, तांत्रिक साधना, विवाद या बहस की तैयारी जैसे कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है।
