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पंचांग: आज विघ्नहर्ता संकष्टी, रेवती नक्षत्र में व्यापार योजना और नए निर्माण के लिए दिन शुभ
Dharam Desk
10 सितंबर, बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि है।
यह तिथि अपने आप में विशेष मानी जाती है क्योंकि इसके अधिदेवता अग्निदेव हैं। मान्यता है कि इस दिन नए निर्माण कार्य, रचनात्मक प्रयास और कला से जुड़ी गतिविधियों का शुभारंभ करना अत्यंत लाभकारी होता है। साथ ही, आज विघ्नहर्ता संकष्टी का पर्व भी पड़ रहा है, जो गणपति उपासना और व्रत-पूजन का विशेष दिन माना जाता है।
पंचांग की प्रमुख बातें
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विक्रम संवत : 2081
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माह : आश्विन
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पक्ष : कृष्ण पक्ष
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तिथि : तृतीया
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वार : बुधवार
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योग : वृद्धि
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नक्षत्र : रेवती
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करण : विष्टि
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चंद्र राशि : मीन
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सूर्य राशि : सिंह
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सूर्योदय : सुबह 06:24 बजे
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सूर्यास्त : शाम 06:48 बजे
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चंद्रोदय : रात 08:06 बजे
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चंद्रास्त : सुबह 08:35 बजे
रेवती नक्षत्र का प्रभाव
आज चंद्रमा मीन राशि और रेवती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध है और इसके देवता पूषा माने जाते हैं। यह नक्षत्र कोमल और सौम्य प्रकृति का है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र में किए गए कार्यों से आध्यात्मिक उन्नति होती है। साथ ही यह व्यापार की योजना बनाने, सौम्य और रचनात्मक कार्यों की शुरुआत करने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
राहुकाल और वर्जित समय
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राहुकाल : दोपहर 12:36 से 02:09 बजे तक
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यमगंड : सुबह 07:57 से 09:30 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार इन समयावधियों में शुभ कार्य प्रारंभ करने से बचना चाहिए। यही कारण है कि आज किसी भी तरह का नया कार्य शुरू करते समय इन कालखंडों का ध्यान रखना आवश्यक है।
विघ्नहर्ता संकष्टी व्रत का महत्व
आज विघ्नहर्ता संकष्टी का व्रत भी है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसकी पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्टों का निवारण होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से गणपति की उपासना करने पर कार्यों में सफलता मिलती है और सभी प्रकार के विघ्न-बाधाएँ दूर होती हैं।
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पंचांग: आज विघ्नहर्ता संकष्टी, रेवती नक्षत्र में व्यापार योजना और नए निर्माण के लिए दिन शुभ
Dharam Desk
यह तिथि अपने आप में विशेष मानी जाती है क्योंकि इसके अधिदेवता अग्निदेव हैं। मान्यता है कि इस दिन नए निर्माण कार्य, रचनात्मक प्रयास और कला से जुड़ी गतिविधियों का शुभारंभ करना अत्यंत लाभकारी होता है। साथ ही, आज विघ्नहर्ता संकष्टी का पर्व भी पड़ रहा है, जो गणपति उपासना और व्रत-पूजन का विशेष दिन माना जाता है।
पंचांग की प्रमुख बातें
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विक्रम संवत : 2081
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माह : आश्विन
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पक्ष : कृष्ण पक्ष
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तिथि : तृतीया
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वार : बुधवार
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योग : वृद्धि
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नक्षत्र : रेवती
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करण : विष्टि
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चंद्र राशि : मीन
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सूर्य राशि : सिंह
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सूर्योदय : सुबह 06:24 बजे
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सूर्यास्त : शाम 06:48 बजे
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चंद्रोदय : रात 08:06 बजे
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चंद्रास्त : सुबह 08:35 बजे
रेवती नक्षत्र का प्रभाव
आज चंद्रमा मीन राशि और रेवती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध है और इसके देवता पूषा माने जाते हैं। यह नक्षत्र कोमल और सौम्य प्रकृति का है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र में किए गए कार्यों से आध्यात्मिक उन्नति होती है। साथ ही यह व्यापार की योजना बनाने, सौम्य और रचनात्मक कार्यों की शुरुआत करने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
राहुकाल और वर्जित समय
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राहुकाल : दोपहर 12:36 से 02:09 बजे तक
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यमगंड : सुबह 07:57 से 09:30 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार इन समयावधियों में शुभ कार्य प्रारंभ करने से बचना चाहिए। यही कारण है कि आज किसी भी तरह का नया कार्य शुरू करते समय इन कालखंडों का ध्यान रखना आवश्यक है।
विघ्नहर्ता संकष्टी व्रत का महत्व
आज विघ्नहर्ता संकष्टी का व्रत भी है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसकी पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्टों का निवारण होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से गणपति की उपासना करने पर कार्यों में सफलता मिलती है और सभी प्रकार के विघ्न-बाधाएँ दूर होती हैं।
