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17 सितंबर का पंचांग: कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा का शुभ संयोग
DHARAM DESK
आज बुधवार, 17 सितंबर 2025 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन उपवास और पूजा-अर्चना कर विष्णु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। साथ ही, आज कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा का अद्भुत संयोग भी बन रहा है।
विश्वकर्मा पूजा को सृष्टि और शिल्पकला के देवता भगवान विश्वकर्मा की आराधना के रूप में मनाया जाता है। वहीं कन्या संक्रांति के साथ सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस परिवर्तन का सीधा असर राशियों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ता है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत : 2081
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माह : आश्विन
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पक्ष : कृष्ण पक्ष
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तिथि : एकादशी
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वार : बुधवार
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नक्षत्र : पुनर्वसु
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योग : परिध
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करण : बव
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चंद्र राशि : कर्क
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सूर्य राशि : कन्या
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सूर्योदय : सुबह 06:26 बजे
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सूर्यास्त : शाम 06:41 बजे
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चंद्रोदय : रात 02:32 बजे (18 सितंबर)
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चंद्रास्त : दोपहर 03:53 बजे
आज का अशुभ समय
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राहुकाल : 12:34 से 14:05 बजे
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यमगंड : 07:58 से 09:30 बजे
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गुलिक काल : प्रचलन अनुसार परहेज योग्य
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शुभ कार्य इन समयों में करने से बचना चाहिए।
नक्षत्र व विशेष योग
आज चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे और पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। यह नक्षत्र यात्रा, वाहन खरीदने, पूजा-पाठ करने और मित्रों से मिलने-जुलने के लिए उत्तम माना गया है। इसका अधिष्ठान देवी अदिति हैं और स्वामी गुरु बृहस्पति हैं।
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नया वाहन या ज्वेलरी खरीदने के लिए शुभ दिन
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बागवानी, उत्सव, जुलूस और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल समय
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अध्यात्म और आराधना से विशेष लाभ मिलने का योग
विशेष महत्व
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एकादशी व्रत : विष्णु आराधना और उपवास से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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विश्वकर्मा पूजा : मशीनरी, उपकरण और उद्योग-धंधे से जुड़े लोग अपने औजारों और कार्यस्थलों की पूजा करते हैं।
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कन्या संक्रांति : सूर्यदेव का कन्या राशि में प्रवेश नए बदलाव और अवसर लेकर आता है।
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17 सितंबर का पंचांग: कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा का शुभ संयोग
DHARAM DESK
आज बुधवार, 17 सितंबर 2025 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन उपवास और पूजा-अर्चना कर विष्णु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। साथ ही, आज कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा का अद्भुत संयोग भी बन रहा है।
विश्वकर्मा पूजा को सृष्टि और शिल्पकला के देवता भगवान विश्वकर्मा की आराधना के रूप में मनाया जाता है। वहीं कन्या संक्रांति के साथ सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस परिवर्तन का सीधा असर राशियों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ता है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत : 2081
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माह : आश्विन
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पक्ष : कृष्ण पक्ष
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तिथि : एकादशी
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वार : बुधवार
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नक्षत्र : पुनर्वसु
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योग : परिध
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करण : बव
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चंद्र राशि : कर्क
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सूर्य राशि : कन्या
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सूर्योदय : सुबह 06:26 बजे
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सूर्यास्त : शाम 06:41 बजे
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चंद्रोदय : रात 02:32 बजे (18 सितंबर)
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चंद्रास्त : दोपहर 03:53 बजे
आज का अशुभ समय
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राहुकाल : 12:34 से 14:05 बजे
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यमगंड : 07:58 से 09:30 बजे
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गुलिक काल : प्रचलन अनुसार परहेज योग्य
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शुभ कार्य इन समयों में करने से बचना चाहिए।
नक्षत्र व विशेष योग
आज चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे और पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। यह नक्षत्र यात्रा, वाहन खरीदने, पूजा-पाठ करने और मित्रों से मिलने-जुलने के लिए उत्तम माना गया है। इसका अधिष्ठान देवी अदिति हैं और स्वामी गुरु बृहस्पति हैं।
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नया वाहन या ज्वेलरी खरीदने के लिए शुभ दिन
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बागवानी, उत्सव, जुलूस और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल समय
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अध्यात्म और आराधना से विशेष लाभ मिलने का योग
विशेष महत्व
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एकादशी व्रत : विष्णु आराधना और उपवास से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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विश्वकर्मा पूजा : मशीनरी, उपकरण और उद्योग-धंधे से जुड़े लोग अपने औजारों और कार्यस्थलों की पूजा करते हैं।
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कन्या संक्रांति : सूर्यदेव का कन्या राशि में प्रवेश नए बदलाव और अवसर लेकर आता है।
