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सावधान! होलिका दहन पर यह गलती पड़ सकती है भारी, भुगतना पड़ सकता है पितृदोष के परिणाम!
Dharm Desk
\होली, रंगों का त्योहार, भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष, रंगों से खेलने का दिन 14 मार्च है. रंग खेलने से एक दिन पहले, यानी 13 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, होलिका दहन के लिए देशभर में लाखों पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. कई बार जल्दबाजी में हरे पेड़ों को भी काट दिया जाता है, जिससे प्रकृति को भारी नुकसान होता है. इस तरह होलिका दहन में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी से पुण्य की जगह पाप के भागीदार बनना पड़ता है. इस कारण हम पर प्रकृति का ऋण रह जाता है और हरा पेड़ काटने से जीवन में पितृ दोष शुरू हो सकता है.
वृक्ष: दानी गुरु: धर्म शास्त्रों में वृक्ष को हमेशा दानी गुरु माना गया है. यह हमसे कभी कुछ नहीं लेता, बल्कि हमेशा अपना सर्वस्व देता है - फल, फूल, छाया, हवा, ऑक्सीजन, ईंधन और मृत्यु के बाद लकड़ी। इसलिए हम हमेशा प्रकृति के ऋणी रहते हैं.
पर्यावरण संतुलन का रखें ध्यान: उमाशंकर मिश्र का कहना है कि, इस वर्ष होली पर हर व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिए कि कोई भी हरा पेड़ न काटा जाए. पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति या परिवार को कम से कम दो या दो से अधिक पौधे अवश्य लगाने चाहिए. यदि आप अपने जीवन में खुशहाली चाहते हैं, तो अपनी राशि या वर्तमान ग्रह दशाओं के आधार पर अपने लिए अनुकूल लाभ देने वाले पौधे लगाकर उनकी सेवा करनी चाहिए. इससे आपकी ग्रह दशा में लाभ होगा और पर्यावरण शुद्ध बना रहेगा.
राशि के अनुसार वृक्षारोपण
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि यदि आप अपने जीवन में खुशहाली लाना चाहते हैं तो आप अपनी राशि के अनुसार पौधे लगा सकते हैं:
- मेष: आंवला
- वृष: जामुन
- मिथुन: कटहल
- कर्क: नागकेसर
- सिंह: बेल
- कन्या: आम
- तुला: पलाश
- वृश्चिक: केला, बरगद
- धनु: पीपल
- मकर: शीशम
- कुंभ: खैर, शमी
- मीन: नीम, पीपल
इसके अलावा, नागचंपा, अशोक, जूही, अर्जुन, नारियल आदि के पौधे या पेड़ लगाना सभी राशियों के लिए शुभ माना जाता है.
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सावधान! होलिका दहन पर यह गलती पड़ सकती है भारी, भुगतना पड़ सकता है पितृदोष के परिणाम!
Dharm Desk
\होली, रंगों का त्योहार, भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष, रंगों से खेलने का दिन 14 मार्च है. रंग खेलने से एक दिन पहले, यानी 13 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, होलिका दहन के लिए देशभर में लाखों पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. कई बार जल्दबाजी में हरे पेड़ों को भी काट दिया जाता है, जिससे प्रकृति को भारी नुकसान होता है. इस तरह होलिका दहन में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी से पुण्य की जगह पाप के भागीदार बनना पड़ता है. इस कारण हम पर प्रकृति का ऋण रह जाता है और हरा पेड़ काटने से जीवन में पितृ दोष शुरू हो सकता है.
वृक्ष: दानी गुरु: धर्म शास्त्रों में वृक्ष को हमेशा दानी गुरु माना गया है. यह हमसे कभी कुछ नहीं लेता, बल्कि हमेशा अपना सर्वस्व देता है - फल, फूल, छाया, हवा, ऑक्सीजन, ईंधन और मृत्यु के बाद लकड़ी। इसलिए हम हमेशा प्रकृति के ऋणी रहते हैं.
पर्यावरण संतुलन का रखें ध्यान: उमाशंकर मिश्र का कहना है कि, इस वर्ष होली पर हर व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिए कि कोई भी हरा पेड़ न काटा जाए. पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति या परिवार को कम से कम दो या दो से अधिक पौधे अवश्य लगाने चाहिए. यदि आप अपने जीवन में खुशहाली चाहते हैं, तो अपनी राशि या वर्तमान ग्रह दशाओं के आधार पर अपने लिए अनुकूल लाभ देने वाले पौधे लगाकर उनकी सेवा करनी चाहिए. इससे आपकी ग्रह दशा में लाभ होगा और पर्यावरण शुद्ध बना रहेगा.
राशि के अनुसार वृक्षारोपण
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि यदि आप अपने जीवन में खुशहाली लाना चाहते हैं तो आप अपनी राशि के अनुसार पौधे लगा सकते हैं:
- मेष: आंवला
- वृष: जामुन
- मिथुन: कटहल
- कर्क: नागकेसर
- सिंह: बेल
- कन्या: आम
- तुला: पलाश
- वृश्चिक: केला, बरगद
- धनु: पीपल
- मकर: शीशम
- कुंभ: खैर, शमी
- मीन: नीम, पीपल
इसके अलावा, नागचंपा, अशोक, जूही, अर्जुन, नारियल आदि के पौधे या पेड़ लगाना सभी राशियों के लिए शुभ माना जाता है.
