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देवउठनी एकादशी 2025: इन 5 कामों से रहें दूर, वरना जीवन में बढ़ सकती हैं परेशानियां
Dharam
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2025 में देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) का व्रत 1 नवंबर, शनिवार को रखा जाएगा।
यह दिन इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, जिससे चातुर्मास का समापन और सभी शुभ-मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस पवित्र दिन कुछ कार्य भूल से भी नहीं करने चाहिए, अन्यथा जीवन में दुर्भाग्य और बाधाएं आ सकती हैं।
देवउठनी एकादशी के दिन इन कामों से करें परहेज
1. चावल का सेवन न करें
शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति अगले जन्म में कीट या कीड़े की योनि में जन्म लेता है। इसलिए इस दिन व्रत रखने वाले ही नहीं, बल्कि घर के अन्य सदस्यों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन होता है। माना जाता है कि इस दिन तुलसी माता स्वयं व्रत रखती हैं, इसलिए उनके पत्ते तोड़ना अशुभ होता है। पूजा में उपयोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रखे जा सकते हैं।
3. मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी रखें
यह दिन पूर्णतः सात्विकता और संयम का प्रतीक है। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन या तामसिक भोजन करना पाप माना गया है। व्रती व्यक्ति को सात्विक भोजन या फलाहार ही ग्रहण करना चाहिए।
4. दिन में न सोएं
एकादशी के दिन दिन में सोना वर्जित बताया गया है। कहा गया है कि जो लोग व्रत रखते हुए दिन में सोते हैं, उन्हें व्रत का फल प्राप्त नहीं होता। इस दिन भजन, कीर्तन और विष्णु नामस्मरण करना शुभ माना जाता है।
5. वाद-विवाद और कटु वचन से बचें
देवउठनी एकादशी का दिन शांति और सद्भाव का प्रतीक है। इस दिन किसी से वाद-विवाद, झगड़ा या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है और जीवन में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
देवउठनी एकादशी का महत्व
मान्यता है कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, तब देवताओं की शक्ति पुनः सक्रिय होती है और पृथ्वी पर शुभ कार्यों का प्रारंभ होता है। इसी दिन से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान दोबारा शुरू किए जाते हैं।
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यह दिन इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, जिससे चातुर्मास का समापन और सभी शुभ-मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस पवित्र दिन कुछ कार्य भूल से भी नहीं करने चाहिए, अन्यथा जीवन में दुर्भाग्य और बाधाएं आ सकती हैं।
देवउठनी एकादशी के दिन इन कामों से करें परहेज
1. चावल का सेवन न करें
शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति अगले जन्म में कीट या कीड़े की योनि में जन्म लेता है। इसलिए इस दिन व्रत रखने वाले ही नहीं, बल्कि घर के अन्य सदस्यों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन होता है। माना जाता है कि इस दिन तुलसी माता स्वयं व्रत रखती हैं, इसलिए उनके पत्ते तोड़ना अशुभ होता है। पूजा में उपयोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रखे जा सकते हैं।
3. मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी रखें
यह दिन पूर्णतः सात्विकता और संयम का प्रतीक है। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन या तामसिक भोजन करना पाप माना गया है। व्रती व्यक्ति को सात्विक भोजन या फलाहार ही ग्रहण करना चाहिए।
4. दिन में न सोएं
एकादशी के दिन दिन में सोना वर्जित बताया गया है। कहा गया है कि जो लोग व्रत रखते हुए दिन में सोते हैं, उन्हें व्रत का फल प्राप्त नहीं होता। इस दिन भजन, कीर्तन और विष्णु नामस्मरण करना शुभ माना जाता है।
5. वाद-विवाद और कटु वचन से बचें
देवउठनी एकादशी का दिन शांति और सद्भाव का प्रतीक है। इस दिन किसी से वाद-विवाद, झगड़ा या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है और जीवन में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
देवउठनी एकादशी का महत्व
मान्यता है कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, तब देवताओं की शक्ति पुनः सक्रिय होती है और पृथ्वी पर शुभ कार्यों का प्रारंभ होता है। इसी दिन से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान दोबारा शुरू किए जाते हैं।
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