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पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, वरना नहीं मिलता पूरा फल
धर्म डेस्क
पूजा-पाठ के दौरान की गई छोटी गलतियां भी आराधना का फल कम कर सकती हैं। जानें पूजा के समय किन 7 बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ की गई आराधना व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि ला सकती है। लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी या जानकारी की कमी में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे पूजा का प्रभाव कम हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के समय शुद्धता, दिशा और सामग्री का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना गया है। ज्योतिष और धर्माचार्यों के मुताबिक कुछ छोटी लापरवाहियाँ भी पूजा को निष्फल बना सकती हैं।
सबसे पहली बात घर के मंदिर में रखी मूर्तियों को लेकर कही जाती है। धार्मिक मान्यता है कि टूटी या खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए। ऐसी मूर्तियों की पूजा करना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा देवी-देवताओं को गलत फूल अर्पित करने से भी बचना चाहिए। बताया जाता है कि भगवान शिव और गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती, वहीं शिव पूजा में केतकी का फूल वर्जित माना गया है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल और जल भी ताजे होने चाहिए। बासी फूल, मुरझाई माला या पुराना जल पूजा की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है।
पूजा करते समय दिशा का भी खास महत्व माना गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार पूर्व, उत्तर या ईशान दिशा की ओर मुख करके पूजा करना शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं आरती के दौरान बीच में उठकर चले जाना भी उचित नहीं माना गया। ऐसा कहा जाता है कि अधूरी आरती से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। कई लोग जल्दबाजी में आरती छोड़ देते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे सही नहीं माना जाता।
दीपक को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि पूजा का दीपक किसी दूसरे जलते हुए दीपक से नहीं जलाना चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान दीपक बुझना भी शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसलिए लोग पूजा शुरू करने से पहले घी या तेल की मात्रा का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा पूजा करते समय मन को शांत रखना भी बेहद जरूरी माना गया है। गुस्सा करना, अपशब्द बोलना या किसी की बुराई करना पूजा की पवित्रता को कम कर सकता है। धर्माचार्यों का कहना है कि शांत और सकारात्मक मन से की गई पूजा ही फलदायी मानी जाती है।
धार्मिक जानकारों के मुताबिक पूजा केवल विधि-विधान नहीं बल्कि आस्था और अनुशासन का भी विषय है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से पूजा का शुभ प्रभाव बढ़ सकता है और मानसिक संतुलन भी बना रहता है।
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पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, वरना नहीं मिलता पूरा फल
धर्म डेस्क
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ की गई आराधना व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि ला सकती है। लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी या जानकारी की कमी में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे पूजा का प्रभाव कम हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के समय शुद्धता, दिशा और सामग्री का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना गया है। ज्योतिष और धर्माचार्यों के मुताबिक कुछ छोटी लापरवाहियाँ भी पूजा को निष्फल बना सकती हैं।
सबसे पहली बात घर के मंदिर में रखी मूर्तियों को लेकर कही जाती है। धार्मिक मान्यता है कि टूटी या खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए। ऐसी मूर्तियों की पूजा करना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा देवी-देवताओं को गलत फूल अर्पित करने से भी बचना चाहिए। बताया जाता है कि भगवान शिव और गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती, वहीं शिव पूजा में केतकी का फूल वर्जित माना गया है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल और जल भी ताजे होने चाहिए। बासी फूल, मुरझाई माला या पुराना जल पूजा की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है।
पूजा करते समय दिशा का भी खास महत्व माना गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार पूर्व, उत्तर या ईशान दिशा की ओर मुख करके पूजा करना शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं आरती के दौरान बीच में उठकर चले जाना भी उचित नहीं माना गया। ऐसा कहा जाता है कि अधूरी आरती से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। कई लोग जल्दबाजी में आरती छोड़ देते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे सही नहीं माना जाता।
दीपक को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि पूजा का दीपक किसी दूसरे जलते हुए दीपक से नहीं जलाना चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान दीपक बुझना भी शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसलिए लोग पूजा शुरू करने से पहले घी या तेल की मात्रा का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा पूजा करते समय मन को शांत रखना भी बेहद जरूरी माना गया है। गुस्सा करना, अपशब्द बोलना या किसी की बुराई करना पूजा की पवित्रता को कम कर सकता है। धर्माचार्यों का कहना है कि शांत और सकारात्मक मन से की गई पूजा ही फलदायी मानी जाती है।
धार्मिक जानकारों के मुताबिक पूजा केवल विधि-विधान नहीं बल्कि आस्था और अनुशासन का भी विषय है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से पूजा का शुभ प्रभाव बढ़ सकता है और मानसिक संतुलन भी बना रहता है।
