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उज्जैन में सोशल मीडिया से मरीजों को इलाज देता मिला डॉक्टर, अस्पताल सील
उज्जैन (म.प्र.)
उज्जैन के बड़नगर में फर्जी इलाज और सोशल मीडिया से इलाज करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल और 8 क्लीनिक सील किए।
शनिवार को उज्जैन के बड़नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फिर से बड़ा कदम उठाते हुए एक फर्जी इलाज के मामले का पर्दाफाश किया। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जिस अस्पताल को टीम ने पहले सील किया था, वह कुछ ही घंटों बाद फिर से खुल गया। जैसे ही इस बारे में जानकारी मिली, स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सख्ती से उस अस्पताल को फिर से सील कर दिया। पूरे इलाके में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया।
जांच के दौरान पता चला कि एक डॉक्टर होम्योपैथिक डिग्री के आधार पर एलोपैथिक इलाज कर रहा था और मरीजों को उसी हिसाब से दवाईयां दे रहा था। सबसे अजीब बात यह थी कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए भी मरीजों को इलाज और सलाह दे रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल से भारी मात्रा में अवैध और संदिग्ध दवाएं भी मिली हैं, जिनकी जांच अलग स्तर पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरा मामला बिना पंजीकरण और गलत डिग्री के आधार पर इलाज करने से संबंधित है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को बड़नगर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में कई अस्पतालों और क्लीनिकों की एक साथ जांच की। इस दौरान कई जगह गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। टीम ने एक मेडिकल स्टोर, एक पैथोलॉजी लैब और करीब 8 क्लीनिकों को सील किया। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें आरोग्यम क्लीनिक, वेदांता अस्पताल, देवकमल पॉली क्लीनिक और कई अन्य निजी क्लीनिक शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला कि कई जगह बिना वैध अनुमति के इलाज किया जा रहा था।
जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई जिला स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर की गई। टीम ने देखा कि कई क्लीनिकों में न तो उचित लाइसेंस था और न ही योग्य डॉक्टर मौजूद थे, फिर भी मरीजों का इलाज किया जा रहा था। इसी दौरान, एक अन्य मामले में सामने आया कि एक डॉक्टर आयुर्वेदिक डिग्री होने के बावजूद एलोपैथिक दवाओं से उपचार कर रहा था। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी खासा देखने को मिली, जिससे स्थिति और भी गंभीर लग रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए इलाज करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो कि नियमों के खिलाफ है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, और जिन संस्थानों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सभी सील किए गए क्लीनिकों और अस्पतालों की फाइलें जांच में हैं और आगे और खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
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उज्जैन में सोशल मीडिया से मरीजों को इलाज देता मिला डॉक्टर, अस्पताल सील
उज्जैन (म.प्र.)
शनिवार को उज्जैन के बड़नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फिर से बड़ा कदम उठाते हुए एक फर्जी इलाज के मामले का पर्दाफाश किया। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जिस अस्पताल को टीम ने पहले सील किया था, वह कुछ ही घंटों बाद फिर से खुल गया। जैसे ही इस बारे में जानकारी मिली, स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सख्ती से उस अस्पताल को फिर से सील कर दिया। पूरे इलाके में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया।
जांच के दौरान पता चला कि एक डॉक्टर होम्योपैथिक डिग्री के आधार पर एलोपैथिक इलाज कर रहा था और मरीजों को उसी हिसाब से दवाईयां दे रहा था। सबसे अजीब बात यह थी कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए भी मरीजों को इलाज और सलाह दे रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल से भारी मात्रा में अवैध और संदिग्ध दवाएं भी मिली हैं, जिनकी जांच अलग स्तर पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरा मामला बिना पंजीकरण और गलत डिग्री के आधार पर इलाज करने से संबंधित है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को बड़नगर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में कई अस्पतालों और क्लीनिकों की एक साथ जांच की। इस दौरान कई जगह गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। टीम ने एक मेडिकल स्टोर, एक पैथोलॉजी लैब और करीब 8 क्लीनिकों को सील किया। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें आरोग्यम क्लीनिक, वेदांता अस्पताल, देवकमल पॉली क्लीनिक और कई अन्य निजी क्लीनिक शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला कि कई जगह बिना वैध अनुमति के इलाज किया जा रहा था।
जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई जिला स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर की गई। टीम ने देखा कि कई क्लीनिकों में न तो उचित लाइसेंस था और न ही योग्य डॉक्टर मौजूद थे, फिर भी मरीजों का इलाज किया जा रहा था। इसी दौरान, एक अन्य मामले में सामने आया कि एक डॉक्टर आयुर्वेदिक डिग्री होने के बावजूद एलोपैथिक दवाओं से उपचार कर रहा था। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी खासा देखने को मिली, जिससे स्थिति और भी गंभीर लग रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए इलाज करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो कि नियमों के खिलाफ है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, और जिन संस्थानों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सभी सील किए गए क्लीनिकों और अस्पतालों की फाइलें जांच में हैं और आगे और खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
