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विजया एकादशी के दिन पूजा के दौरान करें इन खास मंत्रों का जाप, मिलेगा सुख-समृद्धि का वरदान!
Dharm Desk
एकादशी को भगवान विष्ण की प्रिय तिथि मानी जाती है. कहते हैं इस दिन श्री हरि और माता लक्ष्मी की व्रत और पूजन के साथ इन खास मंत्रों का जाप करने से घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है. वैसे तो हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, लेकिन मान्यता है कि विजया एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके अलावा जीवन के तमाम कष्टों से मुक्ति भी मिलती है. वहीं पूजा के दौरान कुछ खास मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं.
विजया एकादशी तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 24 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस बार विजया एकादशी का व्रत सोमवार 24 फरवरी को रखा जाएगा.
विजया एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
- वैदिक पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी के दिन का मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक
- विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक.
विजया एकादशी पूजा मंत्र
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
ॐ विष्णवे नम:
विष्णु के पंचरूप मंत्र
- ॐ अं वासुदेवाय नम:।।
- ॐ आं संकर्षणाय नम:।।
- ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।।
- ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।।
- ॐ नारायणाय नम:।।
- ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
धन-समृद्धि मंत्र
- ॐ भूरिदा भूरि देहिनो , मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि ।
- ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि ।
लक्ष्मी विनायक मंत्र
- दन्ता भये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
- धृता ब्जया लिंगितमब्धि पुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
विजया एकादशी व्रत पारण का समय
एकादशी तिथ व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाता है. इस बार विजया एकादशी व्रत का पारण 25 फरवरी को किया जाएगा. वहीं पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 50 मिनट से लेकर 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने व्रत पूरा माना जाता है.
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Dharm Desk
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है. वैसे तो हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, लेकिन मान्यता है कि विजया एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके अलावा जीवन के तमाम कष्टों से मुक्ति भी मिलती है. वहीं पूजा के दौरान कुछ खास मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं.
विजया एकादशी तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की एकादशी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 24 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस बार विजया एकादशी का व्रत सोमवार 24 फरवरी को रखा जाएगा.
विजया एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
- वैदिक पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी के दिन का मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक
- विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक.
विजया एकादशी पूजा मंत्र
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
ॐ विष्णवे नम:
विष्णु के पंचरूप मंत्र
- ॐ अं वासुदेवाय नम:।।
- ॐ आं संकर्षणाय नम:।।
- ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।।
- ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।।
- ॐ नारायणाय नम:।।
- ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
धन-समृद्धि मंत्र
- ॐ भूरिदा भूरि देहिनो , मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि ।
- ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि ।
लक्ष्मी विनायक मंत्र
- दन्ता भये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
- धृता ब्जया लिंगितमब्धि पुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
विजया एकादशी व्रत पारण का समय
एकादशी तिथ व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाता है. इस बार विजया एकादशी व्रत का पारण 25 फरवरी को किया जाएगा. वहीं पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 50 मिनट से लेकर 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने व्रत पूरा माना जाता है.
