- Hindi News
- धर्म
- गोपाष्टमी 2025: भगवान कृष्ण ने गाय चराना कब शुरू किया?
गोपाष्टमी 2025: भगवान कृष्ण ने गाय चराना कब शुरू किया?
Dharam Desk
गोपाष्टमी का त्योहार हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण और गौ माता को समर्पित है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और गायों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि गोपाष्टमी पर गायों की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण केवल 7 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें गायों का पालन सौंपा। पहले वे सिर्फ बछड़ों की देखभाल करते थे, लेकिन गोपाष्टमी के दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से उन्होंने गौ माता को चराना शुरू किया। यही कारण है कि इस दिन को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा।
गोपाष्टमी की पौराणिक कथा
कथा के अनुसार, जब बाल गोपाल 7 साल के हुए, उन्होंने माता यशोदा से कहा कि वे अब बछड़ों के बजाय गायों को चराने जाएंगे। यशोदा माता ने सलाह दी कि पहले पिता से पूछ लें।
भगवान कृष्ण नंद बाबा के पास गए और अपनी इच्छा व्यक्त की। नंद बाबा ने कहा कि गौ चारण के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाए। कृष्ण बालक तुरंत पंडित जी के पास गए। पंचांग देखकर शुभ समय तय हुआ और नंद बाबा ने बाल कृष्ण को गौ-पालन की अनुमति दे दी।
तब से ही कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा, क्योंकि उसी दिन भगवान कृष्ण ने गौ-पालन का संकल्प लिया था।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
गोपाष्टमी 2025: भगवान कृष्ण ने गाय चराना कब शुरू किया?
Dharam Desk
गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण केवल 7 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें गायों का पालन सौंपा। पहले वे सिर्फ बछड़ों की देखभाल करते थे, लेकिन गोपाष्टमी के दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से उन्होंने गौ माता को चराना शुरू किया। यही कारण है कि इस दिन को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा।
गोपाष्टमी की पौराणिक कथा
कथा के अनुसार, जब बाल गोपाल 7 साल के हुए, उन्होंने माता यशोदा से कहा कि वे अब बछड़ों के बजाय गायों को चराने जाएंगे। यशोदा माता ने सलाह दी कि पहले पिता से पूछ लें।
भगवान कृष्ण नंद बाबा के पास गए और अपनी इच्छा व्यक्त की। नंद बाबा ने कहा कि गौ चारण के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाए। कृष्ण बालक तुरंत पंडित जी के पास गए। पंचांग देखकर शुभ समय तय हुआ और नंद बाबा ने बाल कृष्ण को गौ-पालन की अनुमति दे दी।
तब से ही कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा, क्योंकि उसी दिन भगवान कृष्ण ने गौ-पालन का संकल्प लिया था।
