- Hindi News
- धर्म
- यहां भगवान शिव को चॉकलेट और बिस्कुट का लगता है भोग, बालक रूप में होती है पूजा
यहां भगवान शिव को चॉकलेट और बिस्कुट का लगता है भोग, बालक रूप में होती है पूजा
Dharm Desk
वैसे तो आपने भगवान शिव के बहुत से मंदिर देखे होंगे. लेकिन भोलेनाथ का एक ऐसा भी मंदिर है जहां उनकी बालक रूप में पूजा की जाती है. यहीं नहीं उन्हें एक बालक की तरह ही टॉफी, चॉकलेट और बिस्कुट का भोग भी लगाया जाता है.
अक्सर लोग भगवान शिव के मंदिर में गाय का दूध, बेल के पत्ते, भांग आदि चढ़ाते हैं. लेकिन एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है जहां भगवान को टॉफी, बिस्कुट, नमकीन और चॉकलेट आदि चढ़ाते हैं. लोगों की मान्यता है कि यहां भगवान को इन चीजों को भोग लगाने से सभी कष्ट दूर होते हैं. साथ ही व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती हैं. आइए जानते हैं कहां है यह मंदिर और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.
कहां है ये मंदिर?
भोलेनाथ का यह अनोखा मंदिर शिव की नगरी कहे जाने वाले शहर वाराणसी में हैं. काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है. वैसे तो इस शहर के कण-कण में भगवान शिव विराजमान है. इसके अलावा भी यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. जिसमें से एक कमच्छा में स्थित बटुक भैरव का मंदिर है. बटुक भैरव को भगवान शिव का बाल रूप माना जाता है.
ये भी पढ़ें- कब से शुरू होगा खरमास? इस दौरान भूलकर भी न करें ये काम, झेलने पड़ेंगे ढेरों नुकसान!
लगता है चॉकलेट और बिस्कुट का भोग
इस मंदिर में भगवान बटुक भैरव की पूजा की जाती है. जिसमे बटुक का अर्थ होता है बालक. काशी के बटुक भैरव की आयु 5 वर्ष बताई जाती है. लोग जिस तरह एक बालक को प्यार दुलार करते हैं उसी तरह वहां आने वाले भक्त बटुक भैरव को टॉफी, चॉकलेट और बिस्कुट आदि का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.
दूर होते हैं कष्ट
मान्यता यह भी है कि भगवान बटुक भैरव के दर्शन से हर तरह के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं. इसके अलावा कुंडली में राहु केतु के कष्टों से भी मुक्ति मिल जाती है. सिर्फ यही नहीं ऊपरी बाधा से जुड़ी परेशानियां भी इनके दर्शन से दूर होती है.
इन चीजों का भी लगता है भोग
बटुक भैरव मंदिर में जहां पूरे दिन भगवान को बिस्कुट नमकीन, चॉकलेट और लड्डू आदि का भोग लगता है. वहीं शाम को महाआरती के बाद उन्हें भैरव रूप में मटन करी,चिकन करी, मछली करी और आमलेट के साथ मदिरा का भी भोग लगाया जाता है.
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
यहां भगवान शिव को चॉकलेट और बिस्कुट का लगता है भोग, बालक रूप में होती है पूजा
Dharm Desk
अक्सर लोग भगवान शिव के मंदिर में गाय का दूध, बेल के पत्ते, भांग आदि चढ़ाते हैं. लेकिन एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है जहां भगवान को टॉफी, बिस्कुट, नमकीन और चॉकलेट आदि चढ़ाते हैं. लोगों की मान्यता है कि यहां भगवान को इन चीजों को भोग लगाने से सभी कष्ट दूर होते हैं. साथ ही व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती हैं. आइए जानते हैं कहां है यह मंदिर और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.
कहां है ये मंदिर?
भोलेनाथ का यह अनोखा मंदिर शिव की नगरी कहे जाने वाले शहर वाराणसी में हैं. काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है. वैसे तो इस शहर के कण-कण में भगवान शिव विराजमान है. इसके अलावा भी यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. जिसमें से एक कमच्छा में स्थित बटुक भैरव का मंदिर है. बटुक भैरव को भगवान शिव का बाल रूप माना जाता है.
ये भी पढ़ें- कब से शुरू होगा खरमास? इस दौरान भूलकर भी न करें ये काम, झेलने पड़ेंगे ढेरों नुकसान!
लगता है चॉकलेट और बिस्कुट का भोग
इस मंदिर में भगवान बटुक भैरव की पूजा की जाती है. जिसमे बटुक का अर्थ होता है बालक. काशी के बटुक भैरव की आयु 5 वर्ष बताई जाती है. लोग जिस तरह एक बालक को प्यार दुलार करते हैं उसी तरह वहां आने वाले भक्त बटुक भैरव को टॉफी, चॉकलेट और बिस्कुट आदि का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.
दूर होते हैं कष्ट
मान्यता यह भी है कि भगवान बटुक भैरव के दर्शन से हर तरह के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं. इसके अलावा कुंडली में राहु केतु के कष्टों से भी मुक्ति मिल जाती है. सिर्फ यही नहीं ऊपरी बाधा से जुड़ी परेशानियां भी इनके दर्शन से दूर होती है.
इन चीजों का भी लगता है भोग
बटुक भैरव मंदिर में जहां पूरे दिन भगवान को बिस्कुट नमकीन, चॉकलेट और लड्डू आदि का भोग लगता है. वहीं शाम को महाआरती के बाद उन्हें भैरव रूप में मटन करी,चिकन करी, मछली करी और आमलेट के साथ मदिरा का भी भोग लगाया जाता है.
