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होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का अशुभ साया, नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय
Dharm Desk
होलिका दहन के लिए तिथि, भद्रा और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. इस बार, होलिका दहन पर भद्रा का साया रात 11:26तक रहेगा.
पूरा देश होली के रंगों में सराबोर होने के लिए तैयार है. रंगों का त्योहार होली नजदीक है और इसके साथ ही होलिका दहन की तैयारियां भी जोरों पर हैं. इस वर्ष, होलिका दहन 13 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा और रंगों वाली होली 14 मार्च, शुक्रवार को खेली जाएगी. फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन का विधान है.
होलिका दहन: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. यह हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि विधि-विधान और नियमों के साथ होलिका दहन करने से सभी चिंताएं और परेशानियां उसी अग्नि में स्वाहा हो जाती हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है. इस शुभ दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ चंद्र देव की भी पूजा की जाती है. ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती.
होलिका दहन की तिथि और भद्रा का साया
होलिका दहन के लिए तिथि, भद्रा और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. इस बार, होलिका दहन पर भद्रा का साया सुबह 10 बजकर 35 मिनट से रात 11 बजकर 26 मिनट तक रहने वाला है. ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, होलिका दहन कभी भी भद्रा काल में नहीं करना चाहिए. इसलिए, लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि पूरे दिन भद्रा का प्रभाव रहने पर होलिका दहन के लिए शुभ समय क्या होगा.
चलिए, विस्तार से जानते हैं इस बारे में:
- फाल्गुन पूर्णिमा प्रारंभ: 13 मार्च, सुबह 10 बजकर 35 मिनट से
- फाल्गुन पूर्णिमा समापन: 14 मार्च, दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक
- होलिका दहन की तिथि: 13 मार्च (क्योंकि 13 मार्च को दिन और रात दोनों समय पूर्णिमा तिथि है)
भद्रा का समय:
- भद्रा काल: 13 मार्च, सुबह 10 बजकर 35 मिनट से रात 11 बजकर 26 मिनट तक
- भद्रा की पूंछ: शाम 6 बजकर 57 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक
- भद्रा का मुख: रात 8 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 22 मिनट तक
भद्रा का प्रभाव: 13 मार्च को चंद्रमा सिंह राशि में संचार करेगा, जिसके कारण भद्रा का साया मृत्यु लोक में रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, जब भद्रा मृत्यु लोक में होती है, तब यह सबसे अधिक हानिकारक मानी जाती है. इस वर्ष, होलिका दहन पर भद्रा लगभग 12 घंटे 51 मिनट तक रहेगी.
होलिका दहन 2025: पूजा मुहूर्त
13 मार्च को होलिका दहन वाले दिन दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से दोपहर 3 बजे तक राहुकाल का समय रहेगा, इसलिए इस अवधि में होली पूजन से बचें. शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल में पूजन करना अशुभ माना गया है. इसलिए, होली पूजन का समय सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
होलिका दहन 2025: शुभ मुहूर्त
13 मार्च को होलिका दहन वाले दिन होलिका दहन के लिए केवल 1 घंटा 4 मिनट का समय मिलेगा. क्योंकि रात 11 बजकर 26 मिनट तक भद्रा व्याप्त रहेगी, इसलिए इससे पहले होलिका दहन नहीं किया जा सकेगा.
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होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का अशुभ साया, नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय
Dharm Desk
पूरा देश होली के रंगों में सराबोर होने के लिए तैयार है. रंगों का त्योहार होली नजदीक है और इसके साथ ही होलिका दहन की तैयारियां भी जोरों पर हैं. इस वर्ष, होलिका दहन 13 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा और रंगों वाली होली 14 मार्च, शुक्रवार को खेली जाएगी. फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन का विधान है.
होलिका दहन: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. यह हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि विधि-विधान और नियमों के साथ होलिका दहन करने से सभी चिंताएं और परेशानियां उसी अग्नि में स्वाहा हो जाती हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है. इस शुभ दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ चंद्र देव की भी पूजा की जाती है. ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती.
होलिका दहन की तिथि और भद्रा का साया
होलिका दहन के लिए तिथि, भद्रा और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. इस बार, होलिका दहन पर भद्रा का साया सुबह 10 बजकर 35 मिनट से रात 11 बजकर 26 मिनट तक रहने वाला है. ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, होलिका दहन कभी भी भद्रा काल में नहीं करना चाहिए. इसलिए, लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि पूरे दिन भद्रा का प्रभाव रहने पर होलिका दहन के लिए शुभ समय क्या होगा.
चलिए, विस्तार से जानते हैं इस बारे में:
- फाल्गुन पूर्णिमा प्रारंभ: 13 मार्च, सुबह 10 बजकर 35 मिनट से
- फाल्गुन पूर्णिमा समापन: 14 मार्च, दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक
- होलिका दहन की तिथि: 13 मार्च (क्योंकि 13 मार्च को दिन और रात दोनों समय पूर्णिमा तिथि है)
भद्रा का समय:
- भद्रा काल: 13 मार्च, सुबह 10 बजकर 35 मिनट से रात 11 बजकर 26 मिनट तक
- भद्रा की पूंछ: शाम 6 बजकर 57 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक
- भद्रा का मुख: रात 8 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 22 मिनट तक
भद्रा का प्रभाव: 13 मार्च को चंद्रमा सिंह राशि में संचार करेगा, जिसके कारण भद्रा का साया मृत्यु लोक में रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, जब भद्रा मृत्यु लोक में होती है, तब यह सबसे अधिक हानिकारक मानी जाती है. इस वर्ष, होलिका दहन पर भद्रा लगभग 12 घंटे 51 मिनट तक रहेगी.
होलिका दहन 2025: पूजा मुहूर्त
13 मार्च को होलिका दहन वाले दिन दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से दोपहर 3 बजे तक राहुकाल का समय रहेगा, इसलिए इस अवधि में होली पूजन से बचें. शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल में पूजन करना अशुभ माना गया है. इसलिए, होली पूजन का समय सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
होलिका दहन 2025: शुभ मुहूर्त
13 मार्च को होलिका दहन वाले दिन होलिका दहन के लिए केवल 1 घंटा 4 मिनट का समय मिलेगा. क्योंकि रात 11 बजकर 26 मिनट तक भद्रा व्याप्त रहेगी, इसलिए इससे पहले होलिका दहन नहीं किया जा सकेगा.
