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सर्वपितृ अमावस्या पर कर रहे हैं पितरों का श्राद्ध, तो गरुड़ पुराण में लिखे श्राद्ध भोजन से जुड़े ये 5 विशेष नियम जरूर जान लें
Dharm Desk
सर्वपितृ अमावस्या 2 अक्टूबर, बुधवार को है। आप अगर पितृ अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं, तो आपको श्राद्ध से जुड़े कुछ विशेष नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। खासकर गरुड़ पुराण में लिखे श्राद्ध के भोजन नियम बहुत ही विशेष हैं। इन नियमों के अनुसार ही आपको पितरों का श्राद्ध करना चाहिए, तभी आपके पितरों की आत्मा को शांति मिल पाएगी। आइए, जानते हैं श्राद्ध भोजन से जुड़े 5 विशेष नियम।
सर्वपितृ अमावस्या इस साल 2 अक्टूबर, बुधवार को है। इस दिन ज्यादातर लोग अपने पितरों का तर्पण करते हैं। गरुड़ पुराण सहित कई पुराणों में बताया गया है कि पितरों का श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। आप भी अगर सर्वपितृ अमावस्या पर अपने पितरों का तर्पण, श्राद्ध कर रहे हैं, तो आपको श्राद्ध भोजन से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि आपके पितरों की आत्मा को मुक्ति मिल सके।
केले के पत्ते पर न कराएं श्राद्ध भोजन
पितृपक्ष में अगर आप पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं, तो आपको केले के पत्ते पर श्राद्ध का भोजन नहीं परोसना चाहिए क्योंकि श्राद्ध का भोजन केले के पत्ते पर नहीं परोसा जाता है। आप चांदी, कांसे, तांबे के के बर्तनों में भोजन परोस सकते हैं। वहीं, पत्तल पर भोजन परोसना भी शुभ माना जाता है।
श्राद्ध भोजन में करें तिल का इस्तेमाल
पितरों के श्राद्ध के लिए भोजन बनाते समय तिल का प्रयोग भी अवश्य किया जाना चाहिए क्योंकि तिल श्राद्ध भोजन की रक्षा पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं। इसके अलावा श्राद्ध भोजन में गंगाजल, शहद, दूध का प्रयोग भी जरूर करना चाहिए।
श्राद्ध के समय दरवाजे पर कोई आए तो कराएं भोजन
आप अगर पितरों के लिए श्राद्ध भोजन का आयोजन कर रहे हैं या फिर आपके घर ब्राह्मण भोज कर रहे हैं और उसी समय आपके द्वार पर कोई भूखा या भिखारी भोजन की मांग करता है, तो उस व्यक्ति को सबसे पहले भोजन कराएं। ऐसा करने से पितरों की असीम कृपा मिलती है। गरुड़ पुराण के अनुसार पितृपक्ष में पितर किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं।
पशु-पक्षियों को भोजन भी अवश्य कराएं
श्राद्ध का भोजन पितरों और ब्राह्मणों के लिए निकालने के साथ ही पशु-पक्षियों को भी श्राद्ध का भोजन अवश्य कराना चाहिए। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पौराणिक मान्यता है कि पशु-पक्षियों पर भगवान की कृपा होती है और किसी भी ऊर्जा को वे पहले पहचान लेते हैं इसलिए गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौआ आदि को भोजन दें। पितर किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं।
रात्रि और शाम के समय कभी न कराएं श्राद्ध भोजन
पितरों की आत्मा के लिए बहुत जरूरी है कि आप अपने पितरों का श्राद्ध सुबह या दोपहर के समय ही करें। श्राद्ध का भोजन कभी भी शाम और रात्रि के समय नहीं कराना चाहिए। मान्यता है कि शाम और रात्रि के समय भटकती अतृप्त आत्माएं विचरण के लिए निकलती हैं इसलिए शाम और रात्रि के समय श्राद्ध भोजन कराना शुभ नहीं माना जाता है।

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सर्वपितृ अमावस्या पर कर रहे हैं पितरों का श्राद्ध, तो गरुड़ पुराण में लिखे श्राद्ध भोजन से जुड़े ये 5 विशेष नियम जरूर जान लें
Dharm Desk
सर्वपितृ अमावस्या इस साल 2 अक्टूबर, बुधवार को है। इस दिन ज्यादातर लोग अपने पितरों का तर्पण करते हैं। गरुड़ पुराण सहित कई पुराणों में बताया गया है कि पितरों का श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। आप भी अगर सर्वपितृ अमावस्या पर अपने पितरों का तर्पण, श्राद्ध कर रहे हैं, तो आपको श्राद्ध भोजन से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि आपके पितरों की आत्मा को मुक्ति मिल सके।
केले के पत्ते पर न कराएं श्राद्ध भोजन
पितृपक्ष में अगर आप पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं, तो आपको केले के पत्ते पर श्राद्ध का भोजन नहीं परोसना चाहिए क्योंकि श्राद्ध का भोजन केले के पत्ते पर नहीं परोसा जाता है। आप चांदी, कांसे, तांबे के के बर्तनों में भोजन परोस सकते हैं। वहीं, पत्तल पर भोजन परोसना भी शुभ माना जाता है।
श्राद्ध भोजन में करें तिल का इस्तेमाल
पितरों के श्राद्ध के लिए भोजन बनाते समय तिल का प्रयोग भी अवश्य किया जाना चाहिए क्योंकि तिल श्राद्ध भोजन की रक्षा पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं। इसके अलावा श्राद्ध भोजन में गंगाजल, शहद, दूध का प्रयोग भी जरूर करना चाहिए।
श्राद्ध के समय दरवाजे पर कोई आए तो कराएं भोजन
आप अगर पितरों के लिए श्राद्ध भोजन का आयोजन कर रहे हैं या फिर आपके घर ब्राह्मण भोज कर रहे हैं और उसी समय आपके द्वार पर कोई भूखा या भिखारी भोजन की मांग करता है, तो उस व्यक्ति को सबसे पहले भोजन कराएं। ऐसा करने से पितरों की असीम कृपा मिलती है। गरुड़ पुराण के अनुसार पितृपक्ष में पितर किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं।
पशु-पक्षियों को भोजन भी अवश्य कराएं
श्राद्ध का भोजन पितरों और ब्राह्मणों के लिए निकालने के साथ ही पशु-पक्षियों को भी श्राद्ध का भोजन अवश्य कराना चाहिए। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पौराणिक मान्यता है कि पशु-पक्षियों पर भगवान की कृपा होती है और किसी भी ऊर्जा को वे पहले पहचान लेते हैं इसलिए गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौआ आदि को भोजन दें। पितर किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं।
रात्रि और शाम के समय कभी न कराएं श्राद्ध भोजन
पितरों की आत्मा के लिए बहुत जरूरी है कि आप अपने पितरों का श्राद्ध सुबह या दोपहर के समय ही करें। श्राद्ध का भोजन कभी भी शाम और रात्रि के समय नहीं कराना चाहिए। मान्यता है कि शाम और रात्रि के समय भटकती अतृप्त आत्माएं विचरण के लिए निकलती हैं इसलिए शाम और रात्रि के समय श्राद्ध भोजन कराना शुभ नहीं माना जाता है।

