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खरमास में अपनी मर्जी से किया विवाह तो हो सकता है तलाक, ज्योतिषी बोले- शास्त्रों में लिखा है दंड का विधान
Dharm Desk
लड़का और लड़की अपनी सहूलियत के हिसाब से कोर्ट मैरिज, आश्रम, मंदिर आदि में जाकर विवाह (शादी) कर लेते हैं. हरिद्वार के ज्योतिषी ने बताया कि ऐसा करने पर उन्हें अपने जीवन में बहुत से समस्याओं का सामना करना होता है. इसके साथ ही तलाक होने की संभावना हमेशा बनी रहती है.
चातुर्मास के बाद देवउठनी एकादशी से शादी विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त शुरू हो जाते हैं. मार्गशीर्ष मास शादी विवाह के लिए सबसे उत्तम समय होता है. वहीं, हिंदू कैलेंडर के मार्गशीर्ष महीने के बाद पौष मास का आगमन होता है. हिंदू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस मास में विवाह, मांगलिक कार्य करने पर दोष लगता है, जिसका जीवन भर उपाय करने पर भी दोष खत्म नहीं होता है.
खरमास में मांगलिक कार्यों पर लग जाती है रोक
ऐसे में मार्गशीर्ष के बाद पौष मास में सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती हैं. वर्तमान समय में विवाह करने के लिए लड़का-लड़की अपनी मर्जी से भी रिश्ता कर लेते हैं, जिसमें न तो पंचांग से विवाह का मुहूर्त निकाला जाता है और न ही कोई रीति रिवाज किए जाते हैं. लड़का और लड़की अपनी सहूलियत के हिसाब से कोर्ट मैरिज, आश्रम, मंदिर आदि में जाकर विवाह (शादी) कर लेते हैं. ऐसा करने पर उन्हें अपने जीवन में बहुत से समस्याओं का सामना करना होता है.
अपनी मर्जी से शादी करने के नुकसान
खरमास में अपनी मर्जी से विवाह करने पर क्या नुकसान और हानि होती है. इसकी जानकारीदेते हुए हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि खरमास में शादी विवाह या मांगलिक कार्य करने वर्जित होते हैं. यदि लड़का-लड़की पौष मास (खरमास) में अपनी मर्जी से कोर्ट मैरिज, मंदिर, आश्रम या अन्य जगह शादी कर लेते हैं, तो जीवन भर उन्हें बहुत सी समस्याओं, दुखों आदि का सामना करना पड़ता हैं.
हिंदू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार खरमास यानी पौष मास में सूर्य कमजोर हो जाते हैं. इसलिए विवाह संस्कार के बंधन बांधने पर अनेकों शारीरिक समस्याएं और दोष लगता है. ऐसे में इस समय शादी विवाह नहीं करना चाहिए.
खरमास में जरूर होता है तलाक
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि खरमास में विवाह करने पर तलाक जरूर होता है. साथ ही शारीरिक समस्याएं, शारीरिक व्याधियां, आर्थिक तंगी आदि से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. खरमास में अपनी मर्जी से विवाह करने पर लगने वाले दोष का शास्त्रों में कोई समाधान नहीं है. बल्कि जीवन भर इस दोष के साथ ही जीवन गुजारना पड़ता हैं. भूलकर भी खरमास में विवाह या कोई मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से शरीर में आंतरिक रोग होने पर व्यक्ति को जीवन भर इससे जूझना पड़ता है.
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खरमास में अपनी मर्जी से किया विवाह तो हो सकता है तलाक, ज्योतिषी बोले- शास्त्रों में लिखा है दंड का विधान
Dharm Desk
चातुर्मास के बाद देवउठनी एकादशी से शादी विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त शुरू हो जाते हैं. मार्गशीर्ष मास शादी विवाह के लिए सबसे उत्तम समय होता है. वहीं, हिंदू कैलेंडर के मार्गशीर्ष महीने के बाद पौष मास का आगमन होता है. हिंदू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस मास में विवाह, मांगलिक कार्य करने पर दोष लगता है, जिसका जीवन भर उपाय करने पर भी दोष खत्म नहीं होता है.
खरमास में मांगलिक कार्यों पर लग जाती है रोक
ऐसे में मार्गशीर्ष के बाद पौष मास में सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती हैं. वर्तमान समय में विवाह करने के लिए लड़का-लड़की अपनी मर्जी से भी रिश्ता कर लेते हैं, जिसमें न तो पंचांग से विवाह का मुहूर्त निकाला जाता है और न ही कोई रीति रिवाज किए जाते हैं. लड़का और लड़की अपनी सहूलियत के हिसाब से कोर्ट मैरिज, आश्रम, मंदिर आदि में जाकर विवाह (शादी) कर लेते हैं. ऐसा करने पर उन्हें अपने जीवन में बहुत से समस्याओं का सामना करना होता है.
अपनी मर्जी से शादी करने के नुकसान
खरमास में अपनी मर्जी से विवाह करने पर क्या नुकसान और हानि होती है. इसकी जानकारीदेते हुए हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि खरमास में शादी विवाह या मांगलिक कार्य करने वर्जित होते हैं. यदि लड़का-लड़की पौष मास (खरमास) में अपनी मर्जी से कोर्ट मैरिज, मंदिर, आश्रम या अन्य जगह शादी कर लेते हैं, तो जीवन भर उन्हें बहुत सी समस्याओं, दुखों आदि का सामना करना पड़ता हैं.
हिंदू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार खरमास यानी पौष मास में सूर्य कमजोर हो जाते हैं. इसलिए विवाह संस्कार के बंधन बांधने पर अनेकों शारीरिक समस्याएं और दोष लगता है. ऐसे में इस समय शादी विवाह नहीं करना चाहिए.
खरमास में जरूर होता है तलाक
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि खरमास में विवाह करने पर तलाक जरूर होता है. साथ ही शारीरिक समस्याएं, शारीरिक व्याधियां, आर्थिक तंगी आदि से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. खरमास में अपनी मर्जी से विवाह करने पर लगने वाले दोष का शास्त्रों में कोई समाधान नहीं है. बल्कि जीवन भर इस दोष के साथ ही जीवन गुजारना पड़ता हैं. भूलकर भी खरमास में विवाह या कोई मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से शरीर में आंतरिक रोग होने पर व्यक्ति को जीवन भर इससे जूझना पड़ता है.
