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गणेश स्थापना में रखें विशेष ध्यान: इन गलतियों से बचें वरना नहीं मिलेगा पूर्ण फल
Dharm desk
गणेश चतुर्थी 2025 इस बार 27 अगस्त से शुरू होकर 10 दिन तक चलेगी और अनंत चतुर्दशी (6 सितंबर 2025) को समाप्त होगी।
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व पूरे देश में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गणपति बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक भक्त कई नियमों का पालन करते हैं ताकि पूजा का पूरा शुभ फल प्राप्त हो सके।
गणेश स्थापना में ध्यान रखने योग्य बातें
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स्थान और दिशा का महत्व
गणेश जी की प्रतिमा को हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में स्थापित करना चाहिए। उनका मुख उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना गया है। -
खंडित मूर्ति का प्रयोग न करें
यदि प्रतिमा लाते समय टूट जाए तो उसे कभी स्थापित न करें। खंडित मूर्ति की पूजा अशुभ मानी जाती है। -
तुलसी और केतकी का प्रयोग वर्जित
गणेश जी को दूर्वा घास और गेंदा विशेष प्रिय हैं। लेकिन तुलसी और केतकी के फूल चढ़ाना वर्जित माना गया है। -
घर को खाली न छोड़ें
स्थापना के बाद घर में हमेशा किसी न किसी का रहना आवश्यक है। माना जाता है कि इस दौरान गणेश जी घर में मेहमान के रूप में विराजते हैं। -
शुद्धता और ब्रह्मचर्य का पालन
स्थापना के बाद परिवार को पूर्ण शुद्धता और संयम का पालन करना चाहिए। इससे पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
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भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व पूरे देश में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गणपति बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक भक्त कई नियमों का पालन करते हैं ताकि पूजा का पूरा शुभ फल प्राप्त हो सके।
गणेश स्थापना में ध्यान रखने योग्य बातें
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स्थान और दिशा का महत्व
गणेश जी की प्रतिमा को हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में स्थापित करना चाहिए। उनका मुख उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना गया है। -
खंडित मूर्ति का प्रयोग न करें
यदि प्रतिमा लाते समय टूट जाए तो उसे कभी स्थापित न करें। खंडित मूर्ति की पूजा अशुभ मानी जाती है। -
तुलसी और केतकी का प्रयोग वर्जित
गणेश जी को दूर्वा घास और गेंदा विशेष प्रिय हैं। लेकिन तुलसी और केतकी के फूल चढ़ाना वर्जित माना गया है। -
घर को खाली न छोड़ें
स्थापना के बाद घर में हमेशा किसी न किसी का रहना आवश्यक है। माना जाता है कि इस दौरान गणेश जी घर में मेहमान के रूप में विराजते हैं। -
शुद्धता और ब्रह्मचर्य का पालन
स्थापना के बाद परिवार को पूर्ण शुद्धता और संयम का पालन करना चाहिए। इससे पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
