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भोपाल में आज अमावस्या तिथि: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग विवरण
धर्म डेस्क
18 मार्च 2026 के पंचांग के अनुसार आज चतुर्दशी से अमावस्या तिथि, राहुकाल और अमृत काल के समय का विवरण उपलब्ध
आज चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ हो रहा है। पंचांग के अनुसार आज सुबह 08:25 बजे तक कृष्ण चतुर्दशी तिथि रहेगी, जिसके बाद अमावस्या शुरू हो जाएगी। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक आज चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा और पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में संचरण करेगा। नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं, इसलिए आज का दिन व्यवहार में विनम्रता, ईमानदारी और आध्यात्मिक चिंतन को बढ़ाने वाला माना गया है।
पंचांग के अनुसार बुधवार को राहुकाल दोपहर 12:29 बजे से 2:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं गुलिकाल सुबह 10:59 बजे से 12:29 बजे तक और यमगंड सुबह 07:58 बजे से 09:28 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन अशुभ समयों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना बेहतर माना जाता है।
आज का एक सकारात्मक संयोग यह भी है कि दिनभर शुभ योग प्रभावी रहेगा, जो 19 मार्च की सुबह 04:01 बजे तक जारी रहेगा। यह योग नई योजनाओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, इसलिए विशेष कार्यों के लिए रात का समय अधिक अनुकूल बताया गया है। पंचांग के अनुसार अमृत काल रात्रि 09:37 बजे से 11:10 बजे तक रहेगा, जिसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
खगोलीय स्थिति के अनुसार आज सूर्योदय सुबह 06:28 बजे और सूर्यास्त शाम 06:31 बजे होगा। चंद्रास्त का समय शाम 05:52 बजे है, जबकि आज चंद्रोदय नहीं होगा क्योंकि अमावस्या के दौरान चंद्रमा सूर्य के साथ लगभग एक ही दिशा में रहता है। सूर्य वर्तमान में मीन राशि में स्थित हैं, जबकि चंद्रमा कुंभ राशि में रात 11:36 बजे तक रहेगा।
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव में गंभीरता, ईमानदारी और विचारशीलता बढ़ाने वाला माना जाता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस नक्षत्र के दौरान लोग कला, संगीत और रचनात्मक गतिविधियों की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि भावनात्मक संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक बताया गया है, क्योंकि इस समय मन में संवेदनशीलता और प्रतिक्रियात्मक व्यवहार भी बढ़ सकता है।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, आध्यात्मिक साधना और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है। कई लोग इस दिन पितरों की शांति के लिए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य भी करते हैं। ऐसे में पंचांग के अनुसार समय का ध्यान रखते हुए कार्य करना अधिक लाभकारी माना जाता है।
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