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यशोदा जयंती के दिन पूजा के समय सुनें ये व्रत कथा, सुखी रहेगी संतान!
Dharm Desk
माता यशोदा के जन्मदिन को यशोदा जंयती के रूप में मनाया जाता है. इस दिन माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण का पूजन किया जाता है. संतान की लंबी आयु और उनके सुखी जीवन की कामना करते हुए महिलाएं यशोदा जयंती के दिन व्रत रखती हैं.
हिंदू धर्म में यशोदा जंयती विशेष महत्व रखती है. हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि यशोदा जयंती के दिन ही माता यशोदा का जन्म हुआ था. सभी जानते हैं कि नंदलाल को जन्म तो माता देवकी ने दिया था, लेकिन उनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया था. इस दिन व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि संतान प्राप्ति या संतान से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए ये व्रत किया जाता है.
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती का व्रत रखने से सभी पापों का भी नाश हो जाता है. साथ ही घर के दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली आती है. इस दिन व्रत के साथ-साथ माता यशोदा और बाल गोपाल का पूजन किया जाता है. पूजा के समय कथा सुनी या पढ़ी जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा के समय कथा पढ़ने या सुनने से संतान सुखी रहती है.
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन यशोदा जयंती मनाई जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत कल यानी 18 फरवरी को सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 19 फरवरी को सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, यशोदा जयंती कल मनाई जाएगी. कल ही इसका व्रत रखा जाएगा.
यशोदा जयंती व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज में गोपाल सुमुख और उनकी पत्नी नीवास करते थे.ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से उनके यहां ही माता यशोदा का जन्म हुआ. माता यशोदा का विवाह ब्रज के ही राजा नंद से हुआ. माता यशोदा ने संतान प्राप्ति के लिए जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की तपस्या की. भगवान श्री हरि विष्णु ने माता यशोदा की तपस्या से प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने के लिए कहा.
इसके बाद माता यशोदा ने भगवान श्री हरि विष्णु से कहा कि हे भगवन मेरी तपस्या तभी पूरी होगी जब आप मेरे यहां मुझे पुत्र रूप में प्राप्त होंगे. तब भगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए कहा था कि द्वापर युग में मैं वासुदेव और देवकी के घर में जन्म लूंगा, लेकिन मेरा पालन-पोषण आप ही करेंगी. समय बितता गया और भगवान विष्णु के कहे अनुसार ही हुआ.
भगवान विष्णु ने द्वापर युग में श्री कृष्ण के रूप में अपना आठवां अवतार लिया. भगवान ने माता देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया. इसके बाद वासुदेव बाल गोपाल श्री कृष्ण को नंद और माता यशोदा के यहां छोड़ आए, ताकि अत्याचारी कंस से उनके जीवन की रक्षा की जा सके. इसके बाद भगवान श्री कृष्ण का पालन-पोषण माता यशोदा ने ही किया. माता यशोदा के बारे में श्रीमद्भागवत में कहा गया कि भगवान की जो कृपा माता यशोदा को प्राप्त हुई, वैसे न तो ब्रह्मा जी को, न महादेव को और न लक्ष्मी जी को ही प्राप्त हुई.
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यशोदा जयंती के दिन पूजा के समय सुनें ये व्रत कथा, सुखी रहेगी संतान!
Dharm Desk
हिंदू धर्म में यशोदा जंयती विशेष महत्व रखती है. हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि यशोदा जयंती के दिन ही माता यशोदा का जन्म हुआ था. सभी जानते हैं कि नंदलाल को जन्म तो माता देवकी ने दिया था, लेकिन उनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया था. इस दिन व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि संतान प्राप्ति या संतान से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए ये व्रत किया जाता है.
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती का व्रत रखने से सभी पापों का भी नाश हो जाता है. साथ ही घर के दुख दूर हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली आती है. इस दिन व्रत के साथ-साथ माता यशोदा और बाल गोपाल का पूजन किया जाता है. पूजा के समय कथा सुनी या पढ़ी जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा के समय कथा पढ़ने या सुनने से संतान सुखी रहती है.
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन यशोदा जयंती मनाई जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत कल यानी 18 फरवरी को सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 19 फरवरी को सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, यशोदा जयंती कल मनाई जाएगी. कल ही इसका व्रत रखा जाएगा.
यशोदा जयंती व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज में गोपाल सुमुख और उनकी पत्नी नीवास करते थे.ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से उनके यहां ही माता यशोदा का जन्म हुआ. माता यशोदा का विवाह ब्रज के ही राजा नंद से हुआ. माता यशोदा ने संतान प्राप्ति के लिए जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की तपस्या की. भगवान श्री हरि विष्णु ने माता यशोदा की तपस्या से प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने के लिए कहा.
इसके बाद माता यशोदा ने भगवान श्री हरि विष्णु से कहा कि हे भगवन मेरी तपस्या तभी पूरी होगी जब आप मेरे यहां मुझे पुत्र रूप में प्राप्त होंगे. तब भगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए कहा था कि द्वापर युग में मैं वासुदेव और देवकी के घर में जन्म लूंगा, लेकिन मेरा पालन-पोषण आप ही करेंगी. समय बितता गया और भगवान विष्णु के कहे अनुसार ही हुआ.
भगवान विष्णु ने द्वापर युग में श्री कृष्ण के रूप में अपना आठवां अवतार लिया. भगवान ने माता देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया. इसके बाद वासुदेव बाल गोपाल श्री कृष्ण को नंद और माता यशोदा के यहां छोड़ आए, ताकि अत्याचारी कंस से उनके जीवन की रक्षा की जा सके. इसके बाद भगवान श्री कृष्ण का पालन-पोषण माता यशोदा ने ही किया. माता यशोदा के बारे में श्रीमद्भागवत में कहा गया कि भगवान की जो कृपा माता यशोदा को प्राप्त हुई, वैसे न तो ब्रह्मा जी को, न महादेव को और न लक्ष्मी जी को ही प्राप्त हुई.
