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शीतला अष्टमी के दिन पूजा में अर्पित करें ये भोग, जीवन की हर परेशानी से मुक्ति!
Dharm Desk
हिंदू धर्म हर व्रत-त्योहार का अपना महत्व है. उसी तरह शीतला अष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी कष्ट और रोग से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा में कुछ खास चीजों का भोग लगाने से व्यक्ति सभी परेशनियां दूर होती है.
शीतला अष्टमी का व्रत हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है. इसै बासौड़ा, बूढ़ा बसौड़ा या बसियौरा के नाम से भी जाना जाता है. माता शीतला को स्वस्थ्य और आरोग्य की देवी माना जाता है. महिलाएं शीतला अष्टमी के व्रत अपने बच्चों और परिवार की सुख-शांति के लिए करती हैं. वैसे तो इस दिन पूजा में बासी भोजन अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन कुछ खास प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने से माता प्रसन्न होती है और व्यक्ति की सभी परेशानियां दूर करती हैं.
पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत, 22 मार्च को सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 23 मार्च को सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च को रखा जाएगा.
शीतला माता को लगाएं इन चीजों का भोग
शीतला अष्टमी की पूजा में मुख्य रूप से बासी खाने का भोग लगाते हैं और पूरे दिन बांसी भोजन ही खाया जाता है. वहीं पूजा में एक दिन पहले बने ओलिया, खाजा, चूरमा, पकौड़ी, पूड़ी और रबड़ी के अलावा आप मूंग दाल का हलवा, दही चावल,पुए और मीठे चावल आदि का भी भोग लगाना शुभ होता है. मान्यता है कि ऐसा करने से माता शीतला प्रसन्न होती है.
शीतला अष्टमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता शीतला बिमारीयों से रक्षा करने वाली देवी हैं. कहते हैं इस दिन व्रत करने से छोटी चेचक, फोड़े-फुंसी और अन्य बीमारियों से सुरक्षा मिलती है. मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.
शीतला अष्टमी व्रत रखने के लाभ
शीतला अष्टमी के दिन व्रत रखने और माता की पूजा करने से आपको रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है। माता अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करने वाली मानी जाती हैं। इनके पूजा करने से चेचक, छोटी माता जैसे भयंकर रोग भी दूर हो जाते हैं। परिवार के लोगों को आरोग्य की प्राप्ति होती है और वो जीवन का आनंद ले पाते हैं। संक्रमण और बार-बार लगने वाली बीमारियों से भी माता भक्तों की रक्षा करती हैं।
शीतला अष्टमी पूजा समय
शीतला अष्टमी शनिवार, मार्च 22, 2025 को
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त - 06:23 ए एम से 06:33 पी एम
अवधि - 12 घण्टे 11 मिनट्स
शीतला सप्तमी शुक्रवार, मार्च 21, 2025 को
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - मार्च 22, 2025 को 04:23 ए एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - मार्च 23, 2025 को 05:23 ए एम बजे
2025 शीतला अष्टमी
बासोड़ा पूजा, देवी शीतला को समर्पित पूजा है, जो होली के उपरान्त कृष्ण पक्ष अष्टमी पर की जाती है। बासोड़ा को शीतला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। सामान्यतः यह पर्व होली के आठ दिन पश्चात् आता है, किन्तु अनेक लोग इसे होली के पश्चात् आने वाले प्रथम सोमवार अथवा शुक्रवार को मनाते हैं। शीतला अष्टमी उत्तर भारतीय राज्यों जैसे गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में अधिक लोकप्रिय है।
बासोड़ा पर्व की परम्परा के अनुसार, इस दिन घरों में भोजन पकाने हेतु अग्नि नहीं जलायी जाती है। इसीलिये अधिकांश परिवार एक दिन पूर्व भोजन बनाते हैं तथा शीतला अष्टमी के दिन बासी भोजन का सेवन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि, देवी शीतला चेचक, खसरा आदि रोगों को नियन्त्रित करती हैं तथा लोग इन रोगों के प्रकोप से सुरक्षा हेतु उनकी पूजा-आराधना करते हैं।
गुजरात में, बासोड़ा के समान ही एक पर्व कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पूर्व मनाया जाता है तथा इसे शीतला सातम के नाम से जाना जाता है। शीतला सातम भी देवी शीतला को समर्पित है एवं शीतला सातम के दिन भी किसी प्रकार का ताजा भोजन नहीं पकाया जाता है।
शीतला माता की आरती
जय शीतला माता माँ शीतला की सबसे प्रसिद्ध आरती है।यह प्रसिद्ध आरती शीतला माता से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों पर गायी जाती है।
॥ श्री शीतला माता की आरती ॥
जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानीसब फल की दाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
रतन सिंहासन शोभित,श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें,जगमग छवि छाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
विष्णु सेवत ठाढ़े,सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणतपार नहीं पाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
इन्द्र मृदङ्ग बजावतचन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावैनारद मुनि गाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
घण्टा शङ्ख शहनाईबाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरतीलखि लखि हर्षाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
ब्रह्म रूप वरदानीतुही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देतीमातु पिता भ्राता॥
ॐ जय शीतला माता...।
जो जन ध्यान लगावेप्रेम शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पावेभवनिधि तर जाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
रोगों से जो पीड़ित कोईशरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल कायाअन्ध नेत्र पाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
बांझ पुत्र को पावेदारिद्र कट जाता।
ताको भजै जो नाहींसिर धुनि पछताता॥
ॐ जय शीतला माता...।
शीतल करती जन कीतू ही है जग त्राता।
उत्पत्ति बाला बिनाशनतू सब की माता॥
ॐ जय शीतला माता...।
दास नारायणकर जोरी माता।
भक्ति आपनी दीजैऔर न कुछ माता॥
ॐ जय शीतला माता...।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। dainikjagranmpcg.com एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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शीतला अष्टमी के दिन पूजा में अर्पित करें ये भोग, जीवन की हर परेशानी से मुक्ति!
Dharm Desk
शीतला अष्टमी का व्रत हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है. इसै बासौड़ा, बूढ़ा बसौड़ा या बसियौरा के नाम से भी जाना जाता है. माता शीतला को स्वस्थ्य और आरोग्य की देवी माना जाता है. महिलाएं शीतला अष्टमी के व्रत अपने बच्चों और परिवार की सुख-शांति के लिए करती हैं. वैसे तो इस दिन पूजा में बासी भोजन अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन कुछ खास प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने से माता प्रसन्न होती है और व्यक्ति की सभी परेशानियां दूर करती हैं.
पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत, 22 मार्च को सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 23 मार्च को सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च को रखा जाएगा.
शीतला माता को लगाएं इन चीजों का भोग
शीतला अष्टमी की पूजा में मुख्य रूप से बासी खाने का भोग लगाते हैं और पूरे दिन बांसी भोजन ही खाया जाता है. वहीं पूजा में एक दिन पहले बने ओलिया, खाजा, चूरमा, पकौड़ी, पूड़ी और रबड़ी के अलावा आप मूंग दाल का हलवा, दही चावल,पुए और मीठे चावल आदि का भी भोग लगाना शुभ होता है. मान्यता है कि ऐसा करने से माता शीतला प्रसन्न होती है.
शीतला अष्टमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता शीतला बिमारीयों से रक्षा करने वाली देवी हैं. कहते हैं इस दिन व्रत करने से छोटी चेचक, फोड़े-फुंसी और अन्य बीमारियों से सुरक्षा मिलती है. मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.
शीतला अष्टमी व्रत रखने के लाभ
शीतला अष्टमी के दिन व्रत रखने और माता की पूजा करने से आपको रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है। माता अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करने वाली मानी जाती हैं। इनके पूजा करने से चेचक, छोटी माता जैसे भयंकर रोग भी दूर हो जाते हैं। परिवार के लोगों को आरोग्य की प्राप्ति होती है और वो जीवन का आनंद ले पाते हैं। संक्रमण और बार-बार लगने वाली बीमारियों से भी माता भक्तों की रक्षा करती हैं।
शीतला अष्टमी पूजा समय
शीतला अष्टमी शनिवार, मार्च 22, 2025 को
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त - 06:23 ए एम से 06:33 पी एम
अवधि - 12 घण्टे 11 मिनट्स
शीतला सप्तमी शुक्रवार, मार्च 21, 2025 को
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - मार्च 22, 2025 को 04:23 ए एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - मार्च 23, 2025 को 05:23 ए एम बजे
2025 शीतला अष्टमी
बासोड़ा पूजा, देवी शीतला को समर्पित पूजा है, जो होली के उपरान्त कृष्ण पक्ष अष्टमी पर की जाती है। बासोड़ा को शीतला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। सामान्यतः यह पर्व होली के आठ दिन पश्चात् आता है, किन्तु अनेक लोग इसे होली के पश्चात् आने वाले प्रथम सोमवार अथवा शुक्रवार को मनाते हैं। शीतला अष्टमी उत्तर भारतीय राज्यों जैसे गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में अधिक लोकप्रिय है।
बासोड़ा पर्व की परम्परा के अनुसार, इस दिन घरों में भोजन पकाने हेतु अग्नि नहीं जलायी जाती है। इसीलिये अधिकांश परिवार एक दिन पूर्व भोजन बनाते हैं तथा शीतला अष्टमी के दिन बासी भोजन का सेवन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि, देवी शीतला चेचक, खसरा आदि रोगों को नियन्त्रित करती हैं तथा लोग इन रोगों के प्रकोप से सुरक्षा हेतु उनकी पूजा-आराधना करते हैं।
गुजरात में, बासोड़ा के समान ही एक पर्व कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पूर्व मनाया जाता है तथा इसे शीतला सातम के नाम से जाना जाता है। शीतला सातम भी देवी शीतला को समर्पित है एवं शीतला सातम के दिन भी किसी प्रकार का ताजा भोजन नहीं पकाया जाता है।
शीतला माता की आरती
जय शीतला माता माँ शीतला की सबसे प्रसिद्ध आरती है।यह प्रसिद्ध आरती शीतला माता से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों पर गायी जाती है।
॥ श्री शीतला माता की आरती ॥
जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानीसब फल की दाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
रतन सिंहासन शोभित,श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें,जगमग छवि छाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
विष्णु सेवत ठाढ़े,सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणतपार नहीं पाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
इन्द्र मृदङ्ग बजावतचन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावैनारद मुनि गाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
घण्टा शङ्ख शहनाईबाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरतीलखि लखि हर्षाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
ब्रह्म रूप वरदानीतुही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देतीमातु पिता भ्राता॥
ॐ जय शीतला माता...।
जो जन ध्यान लगावेप्रेम शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पावेभवनिधि तर जाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
रोगों से जो पीड़ित कोईशरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल कायाअन्ध नेत्र पाता॥
ॐ जय शीतला माता...।
बांझ पुत्र को पावेदारिद्र कट जाता।
ताको भजै जो नाहींसिर धुनि पछताता॥
ॐ जय शीतला माता...।
शीतल करती जन कीतू ही है जग त्राता।
उत्पत्ति बाला बिनाशनतू सब की माता॥
ॐ जय शीतला माता...।
दास नारायणकर जोरी माता।
भक्ति आपनी दीजैऔर न कुछ माता॥
ॐ जय शीतला माता...।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। dainikjagranmpcg.com एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
