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पंचांग: महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, बन रहा रवि योग
DHARAM DESK
बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 को आश्विन माह की शुक्ल पक्ष नवमी तिथि है।
इस दिन महानवमी का पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती मानी जाती हैं। आज के दिन रवि योग भी बन रहा है, जो साधना और देवी आराधना के लिए अत्यंत शुभ है। हालांकि विवाह, यात्रा और अन्य मंगल कार्यों के लिए यह तिथि वर्जित मानी जाती है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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माह: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष नवमी
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दिन: बुधवार
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योग: अतिगंड
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नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा
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करण: बलव
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: कन्या
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सूर्योदय: प्रातः 06:30 बजे
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सूर्यास्त: सायं 06:27 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 02:28 बजे
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चंद्रास्त: रात्रि 12:53 बजे (2 अक्टूबर)
राहुकाल और वर्जित समय
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राहुकाल: 12:29 से 13:58 बजे तक
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यमगंड: 08:00 से 09:30 बजे तक
इन समयावधियों में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का महत्व
आज चंद्रमा धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। इस नक्षत्र के अधिपति ग्रह शुक्र और देवता वरुण हैं। पूर्वाषाढ़ा का अर्थ है “विजय से पूर्व”, जो तैयारी और योजना का प्रतीक है। इस नक्षत्र में मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभफलदायी माना जाता है।
महानवमी का पर्व
नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां और आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आज के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया है।
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पंचांग: महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, बन रहा रवि योग
DHARAM DESK
इस दिन महानवमी का पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती मानी जाती हैं। आज के दिन रवि योग भी बन रहा है, जो साधना और देवी आराधना के लिए अत्यंत शुभ है। हालांकि विवाह, यात्रा और अन्य मंगल कार्यों के लिए यह तिथि वर्जित मानी जाती है।
आज का पंचांग
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विक्रम संवत: 2081
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माह: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष नवमी
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दिन: बुधवार
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योग: अतिगंड
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नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा
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करण: बलव
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: कन्या
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सूर्योदय: प्रातः 06:30 बजे
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सूर्यास्त: सायं 06:27 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 02:28 बजे
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चंद्रास्त: रात्रि 12:53 बजे (2 अक्टूबर)
राहुकाल और वर्जित समय
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राहुकाल: 12:29 से 13:58 बजे तक
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यमगंड: 08:00 से 09:30 बजे तक
इन समयावधियों में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का महत्व
आज चंद्रमा धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। इस नक्षत्र के अधिपति ग्रह शुक्र और देवता वरुण हैं। पूर्वाषाढ़ा का अर्थ है “विजय से पूर्व”, जो तैयारी और योजना का प्रतीक है। इस नक्षत्र में मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभफलदायी माना जाता है।
महानवमी का पर्व
नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां और आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आज के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया है।
