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जानकी जयंती के दिन पूजा में जरूर पढ़ें ये आरती, पूरी होगी हर मनोकामना!
Dharm Desk
फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जानकी जयंती मनाई जाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन राजा दशरथ को माता सीता की प्राप्ति हुई थी. कहते हैं जानकी जयंती के दिन पूजा के दौरान माता सीता की आरती करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है.
हिंदू धर्म में जानकी जयंती का खास महत्व है. जानकी जयंती को सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यताओं के अनुसार जहां मां जानकी की सुबह-शाम पूजा-अर्चना की जाती है, वहां मां लक्ष्मी साक्षात विराजमान रहती हैं. जानकी जयंती के दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए माता सीता की पूजा तथा व्रत का पालन करती है. कहते हैं कि माता सीता की पूजा में पवित्र आरती पढने से सभी मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती हैं.
सीता माता की आरती
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिण।
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी।
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई।
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
जानकी जयंती का महत्व
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, माता सीता, मां लक्ष्मी का अवतार हैं. जानकी जयंती के दिन व्रत करने के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है कहते है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजन करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.
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हिंदू धर्म में जानकी जयंती का खास महत्व है. जानकी जयंती को सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यताओं के अनुसार जहां मां जानकी की सुबह-शाम पूजा-अर्चना की जाती है, वहां मां लक्ष्मी साक्षात विराजमान रहती हैं. जानकी जयंती के दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए माता सीता की पूजा तथा व्रत का पालन करती है. कहते हैं कि माता सीता की पूजा में पवित्र आरती पढने से सभी मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती हैं.
सीता माता की आरती
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिण।
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी।
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई।
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
जानकी जयंती का महत्व
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, माता सीता, मां लक्ष्मी का अवतार हैं. जानकी जयंती के दिन व्रत करने के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है कहते है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजन करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.
