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नागपंचमी पर मंगलवार के विशेष उपाय: ग्रहदोष, रोग और धन बाधा से मिलेगा छुटकारा
DHARAM DESK
शिव कृपा और नाग देवता की आराधना से मंगल दोष और पित्र दोष होंगे शांत, जानिए आज के प्रभावशाली उपाय
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सर्पों की पूजा के साथ-साथ शिव उपासना के लिए भी विशेष फलदायी माना गया है। इस बार यह पर्व मंगलवार को पड़ने से मंगल दोष, भूमि विवाद, रक्त विकार, क्रोध, पित्र दोष और कुंडली के ग्रहदोष को शांत करने के लिए अत्यंत शुभ संयोग बना है।
आइए जानते हैं नागपंचमी पर मंगलवार के विशेष उपाय, जो जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं:
1. शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” का जप करें
🔸 नागपंचमी पर मंगलवार के दिन शिवलिंग का अभिषेक करें।
🔸 दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत से पूजन करें।
🔸 साथ ही 108 बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
📿 यह उपाय मंगल ग्रह की शांति और पारिवारिक क्लेश दूर करने के लिए बेहद असरकारी है।
2. नाग देवता की मूर्ति या चित्र की पूजा करें
🔸 घर में नाग देवता का चित्र या मूर्ति रखें।
🔸 उन्हें हल्दी, कच्चा दूध, चंदन, कुशा और फूल चढ़ाएं।
🔸 “ॐ नागाय नमः” मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें।
📿 यह उपाय कालसर्प दोष और पित्र दोष से मुक्ति दिलाता है।
3. मसूर दाल, लाल वस्त्र और तांबे का दान करें
🔸 मंगलवार और नाग पंचमी के संयोग में लाल वस्त्र, मसूर दाल, तांबा और गुड़ का दान करें।
🔸 यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष और रक्त विकार को शांत करता है।
📿 दान हमेशा जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।
4. हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं
🔸 मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
🔸 "ॐ हं हनुमते नमः" का 108 बार जप करें।
📿 नकारात्मक ऊर्जा, भय और दुर्भाग्य दूर होता है। शिव और नागदेव के साथ हनुमान कृपा भी प्राप्त होती है।
5. नाग पंचमी पर पीपल और बिल्व वृक्ष की परिक्रमा करें
🔸 पीपल और बिल्व के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।
🔸 7 परिक्रमा करके “ॐ नमः नागभ्यो नमः” मंत्र बोलें।
📿 यह उपाय पूर्वजों की शांति, नौकरी-कारोबार में रुकावटें दूर करने और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए लाभकारी है।
6. कालसर्प दोष निवारण के लिए नागमणि स्तोत्र का पाठ करें
🔸 नागपंचमी पर प्रातः स्नान कर “श्री नागमणि स्तोत्र” या “कालसर्प दोष शांति मंत्र” का पाठ करें।
🔸 संभव हो तो किसी शिव मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक भी करें।
📿 इससे कुंडली दोषों से राहत मिलती है और मानसिक तनाव भी कम होता है।
नागपंचमी जब मंगलवार को आए, तब इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन विशेष रूप से शत्रु बाधा, भूमि विवाद, रक्त विकार, पित्र दोष, कालसर्प योग और ग्रहपीड़ा से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत प्रभावी होता है। यदि श्रद्धा और नियम से ये उपाय किए जाएं, तो अवश्य ही जीवन में शुभता और सफलता के द्वार खुलते हैं।
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नागपंचमी पर मंगलवार के विशेष उपाय: ग्रहदोष, रोग और धन बाधा से मिलेगा छुटकारा
DHARAM DESK
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सर्पों की पूजा के साथ-साथ शिव उपासना के लिए भी विशेष फलदायी माना गया है। इस बार यह पर्व मंगलवार को पड़ने से मंगल दोष, भूमि विवाद, रक्त विकार, क्रोध, पित्र दोष और कुंडली के ग्रहदोष को शांत करने के लिए अत्यंत शुभ संयोग बना है।
आइए जानते हैं नागपंचमी पर मंगलवार के विशेष उपाय, जो जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं:
1. शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” का जप करें
🔸 नागपंचमी पर मंगलवार के दिन शिवलिंग का अभिषेक करें।
🔸 दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत से पूजन करें।
🔸 साथ ही 108 बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
📿 यह उपाय मंगल ग्रह की शांति और पारिवारिक क्लेश दूर करने के लिए बेहद असरकारी है।
2. नाग देवता की मूर्ति या चित्र की पूजा करें
🔸 घर में नाग देवता का चित्र या मूर्ति रखें।
🔸 उन्हें हल्दी, कच्चा दूध, चंदन, कुशा और फूल चढ़ाएं।
🔸 “ॐ नागाय नमः” मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें।
📿 यह उपाय कालसर्प दोष और पित्र दोष से मुक्ति दिलाता है।
3. मसूर दाल, लाल वस्त्र और तांबे का दान करें
🔸 मंगलवार और नाग पंचमी के संयोग में लाल वस्त्र, मसूर दाल, तांबा और गुड़ का दान करें।
🔸 यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष और रक्त विकार को शांत करता है।
📿 दान हमेशा जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।
4. हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं
🔸 मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
🔸 "ॐ हं हनुमते नमः" का 108 बार जप करें।
📿 नकारात्मक ऊर्जा, भय और दुर्भाग्य दूर होता है। शिव और नागदेव के साथ हनुमान कृपा भी प्राप्त होती है।
5. नाग पंचमी पर पीपल और बिल्व वृक्ष की परिक्रमा करें
🔸 पीपल और बिल्व के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।
🔸 7 परिक्रमा करके “ॐ नमः नागभ्यो नमः” मंत्र बोलें।
📿 यह उपाय पूर्वजों की शांति, नौकरी-कारोबार में रुकावटें दूर करने और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए लाभकारी है।
6. कालसर्प दोष निवारण के लिए नागमणि स्तोत्र का पाठ करें
🔸 नागपंचमी पर प्रातः स्नान कर “श्री नागमणि स्तोत्र” या “कालसर्प दोष शांति मंत्र” का पाठ करें।
🔸 संभव हो तो किसी शिव मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक भी करें।
📿 इससे कुंडली दोषों से राहत मिलती है और मानसिक तनाव भी कम होता है।
नागपंचमी जब मंगलवार को आए, तब इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन विशेष रूप से शत्रु बाधा, भूमि विवाद, रक्त विकार, पित्र दोष, कालसर्प योग और ग्रहपीड़ा से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत प्रभावी होता है। यदि श्रद्धा और नियम से ये उपाय किए जाएं, तो अवश्य ही जीवन में शुभता और सफलता के द्वार खुलते हैं।
