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इस दिन लगने जा रहा है साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल लगेगा या नहीं?
Dharm Desk
चंद्र ग्रहण के बाद अब सूर्य ग्रहण लगने वाला है। ऐसे में यहां जानिए सूर्य ग्रहण और सूतक से जुड़ी सभी जानकारी।
हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है। ग्रहण के समय सभी मांगलिक और शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। अभी हाल ही में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगा था और अब जल्द ही इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल का समय शुरू हो जाता है। मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के समय पृथ्वी का वातावरण दूषित होता है। सूतक के अशुभ दोषों से बचने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। तो आइए अब जानते हैं कि सूर्य ग्रहण कब लगने जा रहा है और सूतक काल मान्य होगा या नहीं।
सूर्य ग्रहण 2024 डेट और समय
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण नवरात्रि से पहले यानी 2 अक्टूबर 2024 को लगने जा रहा है। इस दिन पितृ अमावस्या भी है। भारतीय समयानुसार, रात 9 बजकर 47 मिनट से सूर्य ग्रहण शुरू होगा। सूर्य ग्रहण समाप्त 3 अक्टूबर को तड़के सुबह 3 बजकर 17 मिनट पर होगा।
सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
सूतक काल चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूतक काल ग्रहण खत्म होने तक रहता है। बता दें कि सूतक काल उन्हीं जगहों पर लगता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। 2 अक्टूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सूतक काल के समय भोजन करने और बनाने की भी मनाही होती है। लेकिन बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति पर ये नियम लागू नहीं होता है। वहीं ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को अपना विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियों को वस्त्र आदि काटने या सिलने अथवा ऐसे अन्य कार्य नहीं करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से बच्चे पर ग्रहण का दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
सूर्य ग्रहण 2024 कहां-कहां दिखाई देगा?
इस साल का अंतिम अमेरिका, अर्जेटीना, अंटार्कटिका, उरुग्वे, होनोलूलू, ब्यूनत आयर्स, आर्कटिक, प्रशांत महासागर, पेरी, चिली, और आइलैंड के उत्तरी भाग में दिखाई देगा।
ग्रहण के दौरान मंत्र जाप करें
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तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन। हेमताराप्रदानेन मम शान्तिप्रदो भव॥
-
विधुन्तुद नमस्तुभ्यं सिंहिकानन्दनाच्युत। दानेनानेन नागस्य रक्ष मां वेधजाद्भयात्॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। DAINIK JAGRAN
एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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इस दिन लगने जा रहा है साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल लगेगा या नहीं?
Dharm Desk
हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है। ग्रहण के समय सभी मांगलिक और शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। अभी हाल ही में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगा था और अब जल्द ही इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल का समय शुरू हो जाता है। मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के समय पृथ्वी का वातावरण दूषित होता है। सूतक के अशुभ दोषों से बचने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। तो आइए अब जानते हैं कि सूर्य ग्रहण कब लगने जा रहा है और सूतक काल मान्य होगा या नहीं।
सूर्य ग्रहण 2024 डेट और समय
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण नवरात्रि से पहले यानी 2 अक्टूबर 2024 को लगने जा रहा है। इस दिन पितृ अमावस्या भी है। भारतीय समयानुसार, रात 9 बजकर 47 मिनट से सूर्य ग्रहण शुरू होगा। सूर्य ग्रहण समाप्त 3 अक्टूबर को तड़के सुबह 3 बजकर 17 मिनट पर होगा।
सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
सूतक काल चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूतक काल ग्रहण खत्म होने तक रहता है। बता दें कि सूतक काल उन्हीं जगहों पर लगता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। 2 अक्टूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सूतक काल के समय भोजन करने और बनाने की भी मनाही होती है। लेकिन बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति पर ये नियम लागू नहीं होता है। वहीं ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को अपना विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियों को वस्त्र आदि काटने या सिलने अथवा ऐसे अन्य कार्य नहीं करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से बच्चे पर ग्रहण का दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
सूर्य ग्रहण 2024 कहां-कहां दिखाई देगा?
इस साल का अंतिम अमेरिका, अर्जेटीना, अंटार्कटिका, उरुग्वे, होनोलूलू, ब्यूनत आयर्स, आर्कटिक, प्रशांत महासागर, पेरी, चिली, और आइलैंड के उत्तरी भाग में दिखाई देगा।
ग्रहण के दौरान मंत्र जाप करें
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तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन। हेमताराप्रदानेन मम शान्तिप्रदो भव॥
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विधुन्तुद नमस्तुभ्यं सिंहिकानन्दनाच्युत। दानेनानेन नागस्य रक्ष मां वेधजाद्भयात्॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। DAINIK JAGRAN
एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
